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सामाजिक बदलावों का आकांक्षी काव्य

पुस्तक समीक्षा

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कवि प्रीतम लाल शर्मा ने अपने काव्य संग्रह ‘जीवनशैली’ में 62 कविताओं के माध्यम से अपने जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों को उकेरा है। प्रीतम लाल शर्मा मूलतः कवि नहीं हैं, लेकिन समाज में घटित हो रही घटनाओं, पारिवारिक परिस्थितियों और उनकी अपनी स्थितियों ने उन्हें इस कदर झकझोरा कि उन्होंने कलम उठाने का निश्चय कर लिया।

लेखक स्वयं बताते हैं कि जब वे छठी कक्षा में पढ़ते थे, तब उनकी बड़ी बहन ईश्वर को प्यारी हो गई थीं। वे कहते हैं कि अपनी बहन का उन पर बहुत प्रभाव था, वह अच्छे स्वभाव की थीं, वे उसूलों पर चलती थीं, इसलिए उन्होंने अपनी पुस्तक अपनी बड़ी बहन को समर्पित की है। बहन पर उन्होंने एक कविता भी लिखी है।

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अपनी बेटी के नाम लिखे पत्र में वे कहते हैं :-

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‘तेरे पत्रों के उत्तर दिए न मैंने

यह त्रुटि भी मेरी मजबूरी है

नाज़ुक मन पर बोझ न डालूं

मुझे फर्ज़ निभाना भी ज़रूरी है।’

सामाजिक व्यवस्था पर गहरी चोट करके लिखी गई कविता ‘बीता कल और आज’ में वे कहते हैं :-

‘आज सुख के साधन बेशुमार

पर सुखी नहीं है कोई

सब अपनी खातिर सुख चाहें

दूजे की सोचे ना कोई।’

कविताओं में विविधता है। वह कभी बहन, बेटी, पिता और दोस्तों के लिए कविता लिखते हैं, तो वहीं ‘आज के सीता लक्ष्मण’ और ‘कलयुगी महाभारत’ शीर्षक से भी कविताएं लिखते हैं। ‘दिशा’ कविता में वह स्वयं पूछते हैं :-

‘मैं किस दिशा में जाऊं

मुझे वो दिशा सुझा दो

सूनी पड़ी हैं जहां मंज़िल

तो राह मुझे दिखा दो।’

उनकी कविताओं में जीवन के गहरे अनुभवों, पारिवारिक रिश्तों, और सामाजिक परिप्रेक्ष्य की सजीव झलक देखने को मिलती है। कोमल भावों और गहरे प्रश्नों की यह पुस्तक एक सफल प्रयास है। उनकी लेखनी समाज में बदलाव की आवश्यकता को महसूस कराती हैं।

पुस्तक : जीवन शैली (काव्य संग्रह) कवि : डॉ. प्रीतम लाल शर्मा प्रकाशक : साहित्य कलश पब्लिकेशन, पटियाला पृष्ठ : 136 मूल्य : रु. 250.

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