औरत ने एक दूधमुंहे बच्चे को गोद में उठा रखा था और रोती कुरलाती हुई चिल्ला रही थी, ‘शर्म नहीं आई तुझे अपने बूढ़े-बीमार मां-बाप को मुझे अपनी बीवी को अपने छोटे-छोटे इन छह बच्चों को उनके हाल पर मरने के लिए छोड़कर तुम छह महीने से गांव से भागे हुए हो? न कोई पता न खबर? यहां दूसरी औरत के साथ निकाह करके ऐश-मौज कर रहे हो? भागने से पहले एक बार भी तूने हम सबके बारे में नहीं सोचा?’ उस औरत का वह पति अपने किराये के कमरे के दरवाजे पर खड़ा था। और वह औरत अपने छह बच्चों के साथ कमरे के बाहर खड़ी थी। पति झुंझला रहा था। ‘तू यहां आई कैसे? मैंने तो तुझे बुलाया नहीं? तुझे यहां का पता किसने बताया?’
‘अपने गांव का वो बृजलाल है न जो इधर शहर में रहकर नौकरी करता है। उसी ने तुम्हारा पता-ठिकाना मालूम करके गांव जाकर मुझे बताया और मैं बच्चों को लेकर किसी तरह यहां पहुंची हूं। लेकिन तूने यह क्या किया? अल्लाह तुझे कभी माफ नहीं करेगा।’
‘मेरा मजहब मुझे चार शादियां करने की इजाजत देता है। मैंने तो दूसरी ही...?’
‘दूसरी...?’
मुझसे पहले भी तो एक थी। दूसरी तो मैं हूं। और यह तीसरी?’
‘हां तो क्या? मेरा मजहब तो मुझे चार शादियां करने की इजाजत देता है।’
‘मजहब की आड़ में तुमने मुझे धोखा दिया? चुपचाप घर से भाग गया।
‘हां, वो मेरी गलती थी। तुझे तलाक देकर आना चाहिए था। चलो अब दिये देता हूं। तलाक-तलाक।’
वह तीसरा तलाक नहीं कह पाया औरत ने गोद वाला बच्चा अपनी बड़ी लड़की को पकड़ाया और पति को जोर से धक्का दिया। वह औंधे मुंह जा गिरा। मार-पिटाई, रोना-धोना, चीख-चिल्लाहट मच गई। आस-पास के लोग वहां आ जुटे। वहां मौजूद एक व्यक्ति ने कहा, ‘अपने छोटे-छोटे रूखे-भूखे बीमार डरे सहमे इन बच्चों को देख। इन्हें देखकर किसी का दिल भी पसीज जाये? तू इंसान है या पत्थर?’ बारह-तेरह वर्ष की उसकी सबसे बड़ी लड़की ने चीख कर पूछा, ‘अब्बू तूने हमें पैदा ही क्यों किया था?’ बाकी बच्चे भी अब्बू की ओर देख रहे थे। जैसे वे भी पूछ रहे होें कि अब्बू तूने हमें पैदा ही क्यों किया था?
कोने में डरी-सहमी खड़ी उसकी नई बीवी से उसकी दूसरी बीवी बोली, ‘तेरे भी बच्चे पैदा करेगा और तुझे भी छोड़ कर भाग जायेगा। फिर चौथा निकाह कर लेगा।’
रोते-झुंझलाते हुए उसकी नई बीवी बोली, ‘यह तो कह रहा था इसकी पहली और दूसरी बीवियां मर चुकी हैं। लगता है इसे तो अल्लाह का भी खौफ नहीं?’
‘वह फिर अकड़ने लगा मेरा मजहब मुझे चार शादियां...?’
‘लेकिन मजहब किसी को धोखा देने की इजाजत नहीं देता।
मजहब तेरे जैसे को तो एक शादी की भी इजाजत नहीं देता, जिसके पास न खुद के रहने खाने का ठिकाना है। न कोई काम-धंधा? शादी के साथ-साथ मां-बाप, बीवी-बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेवारियां भी तो मिलती हैं। उसकी बड़ी बेटी आगे आकर चिल्लाई, ‘आपके मां-बाप आपकी बीवी मैं आपकी बेटी और आपके बाकी ये छोटे-छोटे बच्चे आपको शादियां करने की इजाजत नहीं देते।’

