बाल कविताएं

बाल कविताएं

बदी का पुतला

दशहरे का त्योहार है, सब पर छाया खुमार है।

मेला देखने जाएंगे, हर कोई तैयार है।

झूलों में मस्ती होगी, दिल बेकरार है।

खूब करेंगे खरीदारी, देखो सजा बाजार है।

बच्चों ने खिलौने लिए, गदा, तीर, तलवार है।

जल रहा बदी का पुतला, नेकी की जय जय कार है।

- हरिन्दर सिंह गोगन

दशहरा

नगर गांव में लगा हुआ है अद्भुत मेला

कहीं सजी हैं बड़ी दुकानें, कहीं है ठेला,

बच्चों पर मस्ती का रंग चढ़ा है गहरा,

भारत भर में इसी तरह मन रहा दशहरा।

कई दिनों तक देखी हमने राम की लीला

आओ! जलता देखें अब रावण का पुतला,

डरा -डरा सा लगे आज रावण का चेहरा

बुरे भाव पर अच्छाई की जीत दशहरा।

मोनू साइकिल की काठी पर खड़ा हुआ है

सोनू पापा के कंधों पर चढ़ा हुआ है,

तभी रामजी ने अग्नि का तीर चलाया

दशानन के अहंकार को धूल चटाया,

पाप कर्म से बचने का त्योहार दशहरा

न्याय मार्ग पर चलने का त्योहार दशहरा।

बी.मदन मोहन

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