हमें प्रकृति के अनुपम उपहार मिले हुए हैं, जो जीवन को बेहतर करने के उपादान हैं। लेकिन हमारे पास सब कुछ है लेकिन सोचने का समय नहीं है। नतीजा हम जल, जंगल, जमीन से खिलवाड़ करते हुए समाज को नष्ट करने में जाने-अनजाने भागीदार बनते जा रहे हैं। लेकिन कुछ लोग अभी भी हैं जो इन बातों को समझते हैं और अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपने तरीके से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ऐसे लोगों में डॉ. हरीशचंद्र झन्डई शामिल हैं।
हाल ही में उनका एक कविता संग्रह ‘जीवन पथ’ प्रकाशित हुआ है। संग्रह के शीर्षक से ही पता चल जाता है कि कवि ने जीवन पर कविताओं के जरिये विचार किया होगा। कवि समय और समाज को लेकर बहुत जागरूक है। उन्होंने अपनी कविताओं में विगत और आगत दोनों को विषय बनाया है।
हरीशचंद्र झन्डई आशावादी कवि हैं। संग्रह की पहली कविता ‘ज़िन्दगी से कुछ मांगो तो मिलेगा’। यह एक कविता जीवन के फलसफे का चित्रण कर देती है। कवि कुछ बातें कह रहा है और कुछ बातें बगैर कहे स्पष्ट कर दे रहा है। जीवन में खुशियों के लिए बहुत कुछ की जरूरत नहीं है। हद में रहकर जीवन जीने के लिए सामग्री चाहिए।
दूसरी नसीहत है कि हद में रहकर लक्ष्य स्पष्ट करो। केवल कल्पना से हासिल नहीं होगा उसके लिए प्रयत्न करना होगा। तीसरी नसीहत है कि नकारात्मकता त्याग कर जीवन को सकारात्मक सोच की पटरी पर दौड़ाओ तभी खुशहाल जीवन जी सकोगे।
इस तरह झन्डई की कविताएं प्रकृति, देश, समाज, परिवार, संबंध आदि पर केंद्रित हैं। वे कविताओं के विषय जीवन के अनुभव से लिए गए हैं। संग्रह में सौ के आसपास कविताएं हैं और ये कविताएं सरल शब्दों में लिखी गई हैं।
पुस्तक : जीवन पथ (कविता संग्रह) कवि : डॉ. हरीशचंद्र झन्डई प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 128 मूल्य : रु. 299.

