पुस्तक समीक्षा

महिला हिंसा के खिलाफ जुझारू तेवर

महिला हिंसा के खिलाफ जुझारू तेवर

मीनाक्षी वाशिष्ठ

संवैधानिक और सामाजिक तौर पर घोषित तथ्य यही है कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान अपनी देह पर पूर्ण अधिकार है लेकिन तथ्य इसके बिल्कुल विपरीत है। पुरुष-प्रधान मानसिकता ज्यों की त्यों बरकरार है। अभी भी नारी-देह से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर खुली चर्चा की परंपरा नहीं है।

कुल 12 अध्यायों में विभाजित इस पुस्तक में लेखिका ने कुछ ज्वलंत मुद्दों को उठाया है, जिन पर खुली चर्चा होनी चाहिए थी। पहला अध्याय यौन एवं प्रजनन-स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों पर आधारित है। इसमें यथासंभव जागरूकता लाने का प्रयास किया गया है। दूसरे अध्याय में आज के साइबर संसार में महिलाओं से छेड़छाड़ व उनका पीछा करने की प्रवृत्ति, उन पर फब्तियां कसने की आदत आदि का मनोवैज्ञानिक कारण और वैधानिक विश्लेषण व निदान दिया गया है।

तीसरे अध्याय में ‘तेजाबी हमला : आत्मीयता पर आघात’ के संदर्भ में ऐसी संतप्त महिलाओं से जुड़े कानूनी पहलू और जिजीविषा-भरे जुझारू तेवरों का वर्णन है। चौथा अध्याय ‘ऑनर किलिंग’ पर केंद्रित है। इसमें खाप पंचायतों के इतिहास का वर्णन किया गया है। ‘ऑनर किलिंग’ के कई मामलों जिनमें करनाल के मनोज-बबली प्रकरण और आरुषि हत्याकांड का हवाला भी दिया गया है। पांचवां अध्याय ‘बलात्कार और यौन शोषण’ का विश्लेषण देता है। अन्य अध्यायों में जिन विषयों पर कानूनी, सामाजिक और नैतिक दृष्टि से चर्चा है। उनमें प्रथागत हिंसा, माहवारी, दहेज, भ्रूण हत्या, देह व्यापार, तस्करी, वेश्यावृत्ति आदि के एक बदले हुए तरीके में पत्नियों की अदला-बदली, सरोगेसी-किराए की कोख, प्रजनन दबाव, मीडिया में महिलाएं : एक बाज़ारू विषयवस्तु और ‘महिला और हिंसा : एक बढ़ती चुनौती’ को केंद्र में रखा गया है।

इतने विविध विषयों का निर्वहन लेखिका ने जिस व्यावहारिकता और उन्मुक्त भाव से किया है, वह सराहनीय है। एक अच्छी बात यह है कि पूरी जानकारी तथ्यों, आंकड़ों और पीड़ित महिलाओं के अनुभवों पर आधारित है। लेखिका जब ‘पुरुष-उत्पादों के विज्ञापनों में भी महिलाओं को लिए जाने’ पर प्रश्न चिन्ह टांकती है तो वह चालू व्यवस्था के खोखलेपन, विचारहीनता व सतही सोच को प्रखरता के साथ उजागर भी करती है। पूरा अध्ययन, शोधपरक आकलन पर आधारित है और ‘महिला-उत्पीड़न’ पर संभवत: यह एक प्रामाणिक और विश्लेषण-प्रधान कृति है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए। उत्पीड़न के साथ-साथ कुछ अन्य ऐसे विषयों पर भी चर्चा आवश्यक है, जिनका संबंध घरेलू-हिंसा से है।

पुस्तक : नारी देह के विरुद्ध हिंसा लेखिका : नेहा चौधरी प्रकाशक : सेज पब्लिकेशनज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नयी दिल्ली पृष्ठ : 234 मूल्य : रु. 1095.

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