जो असम्भव था,
उसे सम्भव बनाने में लगा रहा,
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जो अप्राप्य था,
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उसे प्राप्त करने की जुगत में रहा।
बहुत कोशिश की,
सपने टूटे कांच की किरचें न बनें,
पर वे टूट कर लहूलुहान करते रहे।
जिन्दगी की भागमभाग में,
प्रेम एक सूखी नदी की तरह मिला,
जिसमे कूदकर डूबना असम्भव था!
कमाल
मेरे अंदर कभी,
एक रेगिस्तान हुआ करता था,
आज वहां हरा-भरा जंगल है।
ये खुदा की रहमतों से ज्यादा
तेरे प्यार की बारिशों का कमाल है!
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