कवयित्री अनामिका का उपन्यास ‘दूर देश के परिंदे’ इतिहास, साहित्य, अध्यात्म और मानवीय संवेदना का अद्भुत समन्वय है। यह कृति बीसवीं शताब्दी के भारत में स्वाधीनता-संग्राम तथा विश्व के दोनों विश्वयुद्धों से उपजी उथल-पुथल के बीच मनुष्य की सामाजिक और व्यक्तिगत भूमिका, उसके संघर्ष तथा आत्मिक विकास को रेखांकित करती है। साथ ही, यह उन प्रतिभाशाली स्त्रियों के योगदान को सामने लाती है, जिन्होंने महान पुरुष मनीषियों के जीवन, चिंतन और रचनात्मकता को समृद्ध किया।
उपन्यास के केंद्र में फ्रांसीसी पत्रकार ज्यां क्रिस्तोफ़ हैं, जो भारतीय संस्कृति, धर्म और अध्यात्म से प्रभावित होकर भारत आते हैं। शांतिनिकेतन, इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, कलकत्ता, बिहार और अंततः हिमालय तक की उनकी यात्रा अनेक स्त्री पात्रों तथा ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को जोड़ती है। मीरा बेन, कस्तूरबा, रानू, गौहर जान, सिस्टर निवेदिता, सरोजनी, कमल, डोरोथी और विद्योत्तमा जैसी स्त्रियों के माध्यम से प्रेम, ममता, त्याग, प्रतिभा, सहिष्णुता और स्त्री-चेतना के विविध आयाम उभरते हैं।
टैगोर, गांधी, निराला, अम्बेडकर और रोमा रोलां जैसे व्यक्तित्वों के विचारों एवं जीवन-प्रसंगों के माध्यम से उपन्यास भारतीय ही नहीं, वैश्विक परिदृश्य को भी व्यापक दृष्टि से देखता है। इसमें गांधी-टैगोर के वैचारिक मतभेद, सुभाष-गांधी तथा नेहरू-पटेल की असहमतियां, विश्वयुद्धों की विभीषिका, हिटलर, मुसोलिनी, स्टालिन और चर्चिल की नीतियां, नमक सत्याग्रह, अस्पृश्यता-निवारण, भूदान तथा गोलमेज सम्मेलन जैसे प्रसंग प्रभावशाली ढंग से आते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि असहमति मनभेद में परिवर्तित नहीं होती; संवाद, प्रेम और विश्वास संबंधों को बनाए रखते हैं।
कृति की विशिष्टता इसकी बहुविध शिल्प-योजना में भी है। डायरी, पत्र, संवाद, एकांकी-दृश्य, कविताएं, संस्कृत श्लोक, किस्से, सूत्र-वाक्य, व्यंग्य और रूपकों का सुंदर समावेश कथा को बहुआयामी बनाता है। गौहर जान का जीवन और उनका क्रांतिकारियों को सहयोग, टैगोर का रानू के प्रति स्नेह, कस्तूरबा की गांधी के प्रति अटूट निष्ठा तथा निराला का बेटी सरोज के प्रति वात्सल्य स्त्री-पुरुष संबंधों की गहरी मानवीय संवेदना को उजागर करते हैं।
हिमालय में क्रिस्तोफ़ का स्वयं को ‘दूर देश के परिंदे’ कहना शीर्षक का मर्म उद्घाटित करता है—अपने समूह से बिछड़ा ऐसा मनुष्य, जिसे किसी नए परिवेश में अपनापन मिलता है। इस प्रकार उपन्यास प्रेम, निष्काम कर्म, अध्यात्म, सह-अस्तित्व, संवाद और विश्व-शांति का मानवीय संदेश देता है।
पुस्तक : दूर देश के परिन्दे लेखिका : अनामिका प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली पृष्ठ : 360 मूल्य : रु. 499.

