कहा जाता है लिखने के लिए पढ़ना जरूरी होता है। सो इसी प्रक्रिया से गुजर कर आया है कविता संग्रह ‘प्रेम में ही संभव है दिगम्बर।’ दरअसल, लेखिका और कवयित्री गगन गिल की पुस्तक ‘तेजस्विनी, अक्का महादेवी के वचन’ पढ़कर सीमा गुप्ता के मन में अक्का के शिव प्रेम की कल्पनाएं घुमड़ने लगीं। अपने भावों को वह जब-तब अपनी डायरी में व्यक्त करने लगीं। इसी व्याकुलता का परिणाम है उनका यह कविता संग्रह।
अक्का महादेवी कन्नड़ साहित्य की प्रमुख कवयित्री और भगवान शिव के मल्लिकार्जुन रूप की अनन्य भक्त हैं। उनका जीवनवृत्त बहुत कुछ मीराबाई से मेल खाता है। किन्तु उनका जन्म मीरा से कई शताब्दियों पहले हुआ था। शिव से प्रेम करने के कारण मीरा की तरह इन्हें भी प्रताड़ना मिली।
किसी की पीड़ा को पढ़कर पीड़ित होने पर भावों का विस्फोट होना स्वाभाविक है। कवयित्री ने अपनी कविताओं में शिव प्रेम की साधक महादेवी के हृदय को भीतर तक टटोलने की कोशिश की है :-
तुमने देखा सूक्ष्म में स्थूल
शिव, शंकर, महादेव को एक
प्रकृति पुरुष पाने के लिए जिसे
लांघ गई अब बाधाएं।
कवयित्री अक्का के शिव प्रेम से प्रभावित तो हैं, मगर वह स्त्री के स्वाभिमान को पल भर भी नहीं भूलतीं। आखिर प्रेम में स्त्री की परीक्षा क्यों लेता है समाज?
हे लंबे-लंबे केशों वाली
मृगनयनी अक्का महादेवी
पूछे तो होंगे तुमने सब प्रश्न
अपने प्रिय मल्लिकार्जुन से।
ये कविताएं अक्का महादेवी के प्रेम की वृहद आध्यात्मिक यात्रा हैं, जिसे सीमा गुप्ता ने अपने भावुक मन को निचोड़ कर लिखा है। कविताओं को पढ़ते हुए मन शिवमय हो जाता है। इनसे महादेवी के विद्रोही चरित्र का पता भी चलता है।
पुस्तक : प्रेम में ही संभव है दिगम्बर कवयित्री : सीमा गुप्ता प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 124 मूल्य : रु. 199.

