आप क्या सोचते हो मेरे बारे में,
ये तो फैसला है आपकी सोच का।
फिर भी आपको अपनी दुआओं में,
बड़ी शिद्दत से मैं याद रखूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
आपके पास है वक्त, गर फिजूल,
शिकायतें कर लीजिए मेरी जी भर।
मेरा यह वक्त बड़ा क़ीमती है,
मैं इस तरह जाया नहीं करूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
दुश्मनी निभाने का सलीका मुझे
आया नहीं है दोस्तों, अब तलक।
दोस्ती और वफ़ा का इस्तक़बाल,
मैं आख़िरी दम तक करूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
वो होंगे बड़े नाम वाले हैं, जो
बड़ों-सी बात भी नहीं रखते हैं।
मैं जमीं से जुड़ी हूं, पली यहीं,
मैं सदा आपके बीच ही रहूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
उन्होंने खुद ही ख़ुद को ख़ुदा से
कितना बड़ा कर लिया है।
जो ख़ुद को जानते हैं सलीके से,
मैं उन्हें क्या आईना दिखाऊंगी,
मैं तुम्हारी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
जो भीतर से है खोखले और
बहुत छोटे हैं सोच में इस क़दर।
जिक्र कर उनका, वक्त क़ीमती,
मैं अपना बर्बाद नहीं करूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
है ईमान मेरी रूह का आईना,
इंसानियत ही मेरी पहचान है।
ज़िंदा हूं आपकी दोस्ती से,
आपको दिल से दुआ दूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।
दिलोदिमाग मेरा बिखर कर,
कब का टूट चुका होता, दोस्तो।
आपकी सोहबत में ज़िंदा हूं,
यह बात दिल से कहूंगी,
मैं आपकी सोच में ज़िंदा रहूंगी।

