‘हिन्दू संस्कृति का विकास (कब, क्यों और कैसे)’ प्रस्तुत पुस्तक के लेखक एडवोकेट सुरेंद्र माथुर ‘किट्टू’ ने सनातन धर्म के देवी-देवताओं, रीति-रिवाजों, पूजा-अर्चना तथा चतुर्थ युगों का विस्तार, सृष्टि उत्पत्ति संबंधित प्रश्न-उत्तर और विचार-विमर्श करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास किया है कि सृष्टि की शुरुआत और विकासक्रम क्या रहा होगा, और आगे कैसा होगा? सृष्टि की रचना क्यों, कब और कैसे हुई? लेखक इस प्रश्न को अबूझ पहेली मानते हैं।
इतिहास के विभिन्न चरणों में वैदिककाल, महाकाव्य काल, मध्यकाल, वेद-पुराण, भक्ति, देवता पूजा, विष्णु और देवी पूजन की शुरुआत मानी जाती है। कलियुग के संदर्भ में लेखक बेबाकी से लिखते हैं कि वर्तमान युग में केवल स्वार्थ और धोखा प्रमुख हैं।
विषय सूची में लेखक ने विभिन्न 47 विषयों पर प्रकाश डाला है, जिनमें शिव, विष्णु, ब्रह्मा, वेद-पुराण, हनुमान व पंचमुखी हनुमान की विशेषताएं आदि शामिल हैं। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले जनमानस के लिए पूजा कार्य में किस देवी-देवता को क्या चढ़ाएं और क्या न चढ़ाएं, इस पर भी प्रकाश डाला गया है। जैसे, गणेश जी पर तुलसी नहीं चढ़ती, दूर्बा चढ़ती है। इसी प्रकार, किस देवता को कौन सा दीपक-बत्ती जलानी चाहिए, इसके बारे में भी उल्लेख किया गया है।
महिलाओं के सुहाग चिन्ह, सिंदूर, करवाचौथ, प्राण वायु, तीज-त्योहार, हिन्दू सनातन में पूजा-पाठ के शुभ प्रतीक चिन्हों की जानकारी, दीपावली पूजन में लक्ष्मी-अलक्ष्मी, कुबेरादि पूजन-मुहूर्त का उल्लेख किया गया है। मानव और पशु-पक्षियों के बीच का संबंध, 12 राशियां और प्रतीक चिन्ह, देवी-देवताओं के वाहन, पुनर्जन्म, मानव जीवन का सार, पितृदोष, सनातनी 12 माह, सप्तऋषि, सप्तपुरी आदि के साथ पौराणिक देवों के धनुष (गांडीव) के नाम, हनुमान जी के 12 नाम, रुद्र के 11 अवतार, चार स्थानों पर महाकुंभ का आयोजन तथा अन्य विभिन्न जानकारियां दी गई हैं।
इसी कारण, सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के लिए यह पुस्तक पठनीय और जानकारी से भरपूर बन गई है।
पुस्तक : हिंदू संस्कृति का विकास लेखक : एडवोकेट सुरेंद्र माथुर ‘किट्टू’ प्रकाशक : साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 198 मूल्य : रु. 395.

