साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक संजीव का कहानी संग्रह ‘दिन बनने के लिए’ विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए है। इन कहानियों के माध्यम से लेखक ने समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, कुरीतियों और रूढ़िवादी परंपराओं की निरर्थकता पर प्रकाश डालते हुए संदेश देने का प्रयास किया है कि रूढ़िवादी सोच का खंडन कैसे किया जा सकता है। भिड़ंत, चोर, अमेरिकी कुत्ता, तीसरी नाक, कोकिला व्रत जैसी कहानियों से सबक सीखने को मिलता है।
संग्रह में कुल अठारह छोटी-छोटी कहानियां हैं, जो चुटीली और व्यंग्यात्मक होने के साथ-साथ मनोरंजक भी हैं। बुद्धि न हाट, बुद्धि न चोर चुराय, बुद्धि चढ़े सब सान, चमके सकल जहान, बुद्धि न बांधो भैया, नहीं तो बूढ़ी नैया कहने का मतलब है कि बुद्धि के मामले में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता।
संग्रह की पहली कहानी ‘भिड़ंत’ एक गुरु और एक चेला यानी मास्टर बुद्धिप्रसाद और छात्र बुद्धूराम की है। कहानी में एक कहानी प्रतियोगिता होती है, जिसमें छात्रों को एक फ़िल्म देखकर कहानी पूरी करनी है। सभी छात्रों ने वही घिसी-पिटी कहानी बनाई, लेकिन अपनी बारी आने पर बुद्धूराम ने सबकी कहानी को एकतरफा बताते हुए अपनी कहानी पूरी की तो सभी हैरान-परेशान हो गए। बुद्धिप्रसाद बुद्धूराम को डांटते हैं, तभी हैडमास्टर सीख देते हुए कहते हैं कि ‘लकीर के फ़क़ीर न बनो। ज़रूरी नहीं जो प्रथा बरसों से चली आ रही है, वह शत-प्रतिशत सही हो।’ इसलिए अपने रूढ़िवादी परंपराओं को लेकर बच्चों में जो भी जिज्ञासा है, उसे उठने दिया जाए। ये आज के बच्चे प्रकृति की प्रत्यंचा से छूटे तीर हैं, इन्हें रोका न जाए, ये ख़ुद अपना रास्ता तय कर लेंगे।
अमेरिकी कुत्ता, तीसरी नाक, हिप-हिप हुर्रे, कोकिला व्रत, अपशकुनी, शिलानाथ देव, रोशनी के पेड़, पूर्ण कुंभ की अपूर्ण कथा, आइडिया जैसी कहानियां पूरी तरह से रूढ़िवादी परंपराओं और अंधविश्वासों पर प्रहार करती हैं। वहीं मृत्यु के विरुद्ध, हमें दया नहीं स्वावलंबन चाहिए, रोशनी का मसीहा, मैडम क्यूरी आदि कहानियां समाज के वास्तविक नायकों से परिचित कराती हुई स्पष्ट संदेश देती हैं कि समाज में व्याप्त कुरीतियों का खंडन करना कठिन है, मगर नामुमकिन नहीं। महान व्यक्तित्व ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के प्रबल विरोध के आगे ब्रिटिश सरकार को घुटने टेकने पड़े थे।
पुस्तक की कहानियां बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक, विचारपरक के साथ-साथ मनोरंजक भी हैं।
पुस्तक : दिन बनने के लिए लेखक : संजीव प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली पृष्ठ : 143 मूल्य : रु. 250.

