पेड़ों के नीचे
खामोशी से बैठें,
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अकेले में अपनी
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जड़ों से बात
करते हैं पेड़।
पेड़ सुनते हैं जड़ों से,
उनकी खामोशी की आवाज़,
ज़िम्मेदारी संभालना,
आसान नहीं होता।
जड़ों को शायद
धन्यवाद भी
देते होंगे पेड़, पत्तियां,
फूल और बहुत से पंछी।
पेड़ों की डालियां
क्या जानें,
कैसे रहा जाता है,
सबसे नीचे, सबसे दूर।
अंधेरे में, चुपचाप।
जड़ें नींव हैं,
जीवन के उत्सव की।
जड़ें हैं, तब ही
पेड़ों को हवा में,
बारिश में,
झूमने की आज़ादी रहती है,
जड़ें संभालती हैं,
संबंध, विश्वास और
घर-परिवार,
उनका आदर करें।
पेड़ों और बुज़ुर्गों के साथ,
प्यार के साथ बैठें,
क्या पता
वो बात ही करने लगें।
बहुत देर तक चुप रहना
किसको अच्छा लगता है।
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