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अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता में आठ रचनाएं चयनित

कहानी लेखन में अब महिलाओं का वर्चस्व : अतुल कुमार

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नयी दिल्ली में आयोजित समारोह में मौजूद साहित्यकार। -ट्रिन्यू
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विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान द्वारा पिछले तीन साल से आयोजित अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता न सिर्फ हिंदी कहानी विधा में परिवर्तन ला रही है बल्कि नए कहानीकारों खासकर महिला रचनाकारों के लिए सृजन उत्सव साबित हो रही है। यह बात अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए साहित्य अकादमी सभागार में लेखक पंडित सुरेश नीरव की अध्यक्षता में आयोजित पुरस्कार समारोह में साहित्यकारों ने कही। अनीता प्रभाकर विख्यात लेखक विष्णु प्रभाकर की पुत्री थीं। उनकी कई किताबें प्रकाशित हुई हैं और अनेक सम्मानों से भी नवाजा गया है। समारोह में जिन आठ कहानीकारों की कहानियां पुरस्कार के लिए चुनी गईं, उनमें छह महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। उनमें वीना श्रीवास्तव, इंद्रजीत कौर, अरुण कुमार, वेद स्मृति कृति, रेनू श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुमार अरोड़ा, सुधा जुगरान और रंजना जायसवाल के नाम शामिल हैं। इस बार की प्रतियोगिता में 73 पुरुषों सहित 102 महिलाओं की कुल 175 रचनाएं प्राप्त हुईं। इन सभी को पंडित सुरेश नीरव, नारायण कुमार, कथानक पत्रिका के संपादक अनुज कुमार, आचार्य निर्मल और डॉ. वेद मित्र शुक्ल ने पुरस्कृत किया।

उमा शर्मा के सरस्वती वंदना से शुरू हुए इस आयोजन में स्वागत भाषण के दौरान विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री और लेखक अतुल कुमार प्रभाकर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से आयोजित अनीता प्रभाकर स्मृति कहानी प्रतियोगिता के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण ऐसा संकेत देता है कि कहानी लेखन के क्षेत्र में कभी पुरुषों का वर्चस्व होता था, आज वह वर्चस्व आधी आबादी के नियंत्रण में चला गया है। सपने देखने की मिली अधिक स्वतंत्रता अब अपना प्रभाव दिखा रही है। कहानी प्रतियोगिता में भागीदारी और नतीजा महिलाओं को उत्साहित करने वाले हैं। समारोह का संचालन वरिष्ठ पत्रकार और समाज कर्मी प्रसून लतांत ने किया। प्रतिष्ठान के अध्यक्ष नवीन कुमार गोयल ने सभी के प्रति आभार जताया और विभूति ने अपनी दादी अनीता प्रभाकर के मार्मिक संस्मरण सुनाए।

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कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेई की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में इन कहानीकारों ने अपनी पुरस्कृत कहानियों का पाठ भी किया। इस मौके पर एक पुस्तिका का लोकार्पण भी किया गया, जिसमें अनीता प्रभाकर के व्यक्तित्व और उनके योगदान से संबंधित आलेखों सहित विजेता कहानीकारों के पूर्ण परिचय के साथ उनकी पुरस्कृत कहानियां और निर्णायकों की प्रखर टिप्पणियां और प्रतियोगिता का इतिहास भी समाहित हैं।

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