नमता बहुत परेशान थी। अंशिका अभी तक स्कूल से नहीं लौटी थी, जबकि रोज़ाना ठीक तीन बजे उसकी बस उसे घर पर छोड़ जाती थी। तरह-तरह की आशंकाएं उसके दिमाग में उमड़-घुमड़ रही थीं। वह स्कूल के रिसेप्शन पर लगातार कॉल कर रही थी, पर फोन व्यस्त बता रहा था। बेचैनी से अंदर-बाहर होते हुए उसकी जान में जान आ गई। सामने से अंशिका की बस आ रही थी। दोस्तों को बाय-बाय करती, हंसती हुई अंशिका बस से उतरी।
‘इतनी देर कैसे हुई? मैं तो बहुत चिंता में पड़ गई थी,’ उसने पूछा।
‘मम्मी, आप बेवजह चिंता करते हो। अभी देर ही कितनी हुई है? आज फेमस सोशल वर्कर रंगनाथन मैम हमारे स्कूल में गेस्ट थीं। उनका लेक्चर था। बहुत अच्छी और काम की बातें उन्होंने हमको बताईं। इसी वजह से थोड़ी देर हो गई।’
‘चलो, हाथ-मुंह धो लो। तुम्हें भूख लगी होगी।’
‘मम्मा! पता है, और बहुत-सी बातों के साथ-साथ उन्होंने हमें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में भी बहुत अच्छे से बताया। आपने भी बताया तो था, पर जिस तरह उन्होंने समझाया, वो तो कमाल ही था।’
‘अरे वाह! तू तो उनकी फैन हो गई।’
‘उन्होंने एक बात और समझाई, जो आप लोगों ने कभी नहीं बताई।’
‘ऐसी कौन-सी बात है? ज़रा हम भी तो सुनें...’
‘उन्होंने हमें ‘अलर्ट’ करते हुए समझाया कि किस तरह ‘बैड टच’ करने वालों से बचना चाहिए, ताकि उनकी हमारे साथ ‘गंदी बात’ करने की हिम्मत ही न हो।’
‘क्या?’ नमता चौंक पड़ी। दिल घबरा गया। कैसे-क्या बताया होगा? हमसे तो बताया न गया आज तक। कितना समझी होगी नादान? कुछ गलत न समझी हो। उसने पूछ लिया, ‘तुम्हारी समझ में आ गया सब कुछ?’
‘हां, मम्मी! ‘गंदी बात’ का मतलब समझ में आ गया। पर स्कूल से लौटते हुए बस में एक बात सोचती रही, जो मुझे तंग कर रही है। सोचा था, घर जाकर आपसे पूछूंगी।’
‘पूछो, अंशिका,’ कहते हुए उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। इसी बात से घबरा रही थी कि इतने नाज़ुक विषय पर कैसे अपनी बच्ची से बात कर पाएगी।
‘मम्मा! कल शाम भैया के जन्मदिन की पार्टी थी। भैया के दोस्तों ने खूब मज़े किए। डीजे वाले भैया से ये लोग बार-बार यही गाना चलवा रहे थे—
‘अच्छी बातें बहुत कर ली तेरे साथ,
अब करूंगा तेरे साथ गंदी बात...
गंदी बात... गंदी बात...’
मम्मी! मेरी समझ में नहीं आ रहा कि ये कैसी ‘गंदी बात’ है, जिस पर मस्त होकर भैया और उनके दोस्त नाच रहे थे और आप सब तालियां बजाते हुए खुश हो रहे थे?’

