‘भारत की सनातन विरासत’ अश्विनी शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक का गहन विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि भारत का प्राचीन ज्ञान, जिसे ऋषि-मुनियों ने बताया, वही ज्ञान आधुनिक विज्ञान का आधार बना है। ज्ञान मुद्राओं और योग के माध्यम से जो ऊर्जा प्राप्त होती है, उसका वर्णन लेखक ने अत्यंत सटीकता से किया है। ऋषि-मुनियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं रखा, बल्कि चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में भी योगदान दिया है। भारतीय सभ्यता का इतिहास केवल अतीत की स्मृतियों को संजोने का कार्य नहीं करता, बल्कि यह सदियों बाद भी समग्र विश्व को मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है।
लेखक ने पुस्तक में लेखों को चित्रों सहित समझाया है, जो विषय की गहराई को और स्पष्ट करता है। भारत की संस्कृति और सभ्यता न केवल अतीत की धरोहर है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का समाधान भी प्रस्तुत करती है। अश्विनी शर्मा ने प्राचीन विद्या के उदाहरणों और प्रमाणों के माध्यम से इसे और भी प्रभावी रूप से दर्शाया है। मंदिर के घंटे की ऊर्जा का वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व उन्होंने विस्तार से समझाया है। आत्मा और ऊर्जा का संबंध, ग्रहण का रहस्य और भारत की शिक्षा परंपरा—गुरुकुल से लेकर विश्वगुरु बनने तक की गाथाओं का उन्होंने गहरी समीक्षा की है।
प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान इस खोयी हुई धरोहर के मूल्यांकन में सहायक हैं। ऋषि कण्व का कथन यह जीवन संदेश देता है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का मिलाजुला समन्वय विश्व को नई दिशा, ऊर्जा और प्रेरणा दे सकता है। सूर्य की ऊर्जा के विषय में भी उन्होंने विस्तृत जानकारी दी है।
भारत के गौरवमयी अतीत को केवल गौरव का विषय न मानकर, उससे सीख लेकर हमें वर्तमान चुनौतियां जैसे जलवायु संकट, सामाजिक असमानता, और मूल्यहीन शिक्षा के समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। जब हम भारतीय धरोहर को सम्मान सहित प्रस्तुत करेंगे, तो यह न केवल हमारी जड़ों को मजबूत करेगा, बल्कि मानवता को एकता, विज्ञान और दया का मार्ग भी दिखाएगा।
भारतीय सनातन परंपरा को केवल पूजनीय मानकर नहीं छोड़ देना चाहिए, बल्कि उसे विज्ञान और विवेक की दृष्टि से समझकर, उसे सबके सामने लाना चाहिए। भारतीय परंपरा की यह शक्ति है जो भूतकाल से लेकर वर्तमान और भविष्य तक मानवता को प्रेरित करती है।
पुस्तक : भारत की सनातन विरासत लेखक : अश्विनी शर्मा प्रकाशक : एविंसपब पब्लिशिंग, छत्तीसगढ़ पृष्ठ : 301 मूल्य : रु. 425.

