नशे की दुनिया की स्याह तस्वीर

पुस्तक समीक्षा

नशे की दुनिया की स्याह तस्वीर

यश गोयल

वरिष्ठ अंग्रेजी पत्रकारिता से जुड़े पत्रकार और लेखक आदित्य कांत का पहला उपन्यास ‘हाई ऑन कसोल’, जो मादक पदार्थों की तस्करी की पृष्ठभूमि में एक क्राइम थ्रिलर है, जो इन दिनों बहुत चर्चा में है।

अपने पहले अंंग्रेजी उपन्यास की चर्चा करते हुए, कांत कहते हैं--उनकी पुस्तक युवाओं के बीच मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है। ‘हाई ऑन कसोल’, कुल्लू घाटी में छोटे से गांव, कसोल की पृष्ठभूमि पर आधारित थ्रिलर है, जिसे मिनी इस्राइल भी कहा जाता है। एक ओर जहां यह किताब स्थानीय और बाहरी लोगों के बीच संघर्ष के बारे में बात करती है, वहीं दूसरी ओर यह ड्रग्स संबंधी मुद्दों को भी छूती है जो हिमाचल, पंजाब और हरियाणा के युवाओं के बीच एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।

कसोल और पार्वती घाटी को आम तौर पर सोशल मीडिया और समाचारों में पढ़ने या देखने की तुलना में और भी बहुत कुछ है। स्थानीय लोग और बाहरी लोग आमतौर पर घाटी को विश्वस्तरीय हैश की उपलब्धता, रेव पार्टियों की संस्कृति और विदेशियों की भरमार वाली घाटी से जोड़ते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि यह घाटी के वास्तविक जीवन की सही तस्वीर नहीं है। छोटे शहर के विश्व मानचित्र पर उभरने से बहुत पहले घाटी का एक जीवन और अपनी संस्कृति थी और इसके सौंदर्य और शांतिप्रिय स्थान होने से कई इस्राइली और अन्य विदेशी इस घाटी के दीवाने थे।

आदित्य कहते हैं कि अपने आगामी उपन्यास हाई ऑन कसोल, मर्डर मिस्ट्री, के माध्यम से, उन्हें मादक पदार्थों की तस्करी और मादक द्रव्यों के सेवन, विशेष रूप से आर्टिफिशियल ड्रग्स के संबंध में उन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनका सामना युवा वर्ग और उनके परिवार वाले कर रहे हैं। कहानी घाटी में रहने वाले लोगों की जीवनशैली दर्शाती है, जो अब अपनी परंपराओं और संस्कृति को बाहरी लोगों से बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

उपन्यास में घाटी के बारे में मिथक प्रचलित है कि यह घाटी शीर्ष श्रेणी के हैश के उत्पादन के लिए जानी जाती है- कि आसपास का हर ग्रामीण एक भांग उत्पादक है और मीडिया के हवाले से बताया जाता है कि कई विदेशी नागरिक इस घाटी से पिछले कुछ दशकों से विभिन्न कारणों से लापता हो गए हैं जो कि लोगों में काफी उत्सुकता पैदा कर रहा है।

‘हाई ऑन कसोल’ एक काल्पनिक कृति है, लेकिन वास्तविक पात्रों से प्रेरित है और युवाओं और उनके परिवारों के संघर्षों और दुविधाओं का चित्र उकेरती है, जो मादक द्रव्यों के सेवन, खास तौर से बाहरी लोगों की कृत्रिम दवाओं की बढ़ती संस्कृति से प्रभावित हो रहे हैं।

आदित्य कहते हैं कि यह पहाड़ों के मूल निवासियों को सम्मान देने का मेरा तरीका है, जिनके लिए मेरे मन में हमेशा से सम्मान और गहरा स्नेह रहा है। उपन्यास की भाषा पठनीय है और कई रहस्यों को बहुत ही मार्मिक और भावनात्मक स्तर तक ले जाती है। कई डरावनी घटनाएं सजीव जान पड़ती है।

पुस्तक : हाई ऑन कसोल लेखक : आदित्य कांत प्रकाशक : व्हाइट फल्कोन पब्लिशिंग, चंडीगढ़ पृष्ठ : 220 मूल्य : रु. 299.

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