सुनो! अपना अखिल बेटा अपनी पसंद की लड़की से शादी करना चाह रहा है।’
‘कहां मिला वो उस लड़की से?’ पापा ने मां से पूछताछ शुरू कर दी।
‘उसने बताया है सब... फ़ेसबुक पर पहली बार चैटिंग में ही दोनों एक-दूसरे को लाइक करने लगे थे।’
पिछले सात महीनों से दोनों की दोस्ती और प्यार चल रहा था।’
‘अच्छा...?’
पापा का स्वर अविश्वास से भरा था।
‘बड़ा हो गया है हमारा बेटा, इसका मतलब।’
‘जब बेटा खुश है तो हम भी खुश। आखिर हमें बुढ़ापे में उसी के साथ रहना है।’
माता-पिता ने खुद को बेटे के साथ पूरी तरह से एडजस्ट करने की ठान रखी थी। परंतु बेटे की उदासी वे नहीं देख सकते थे। शादी तो करनी ही थी आखिर, आज नहीं तो कल।
आज सारा दिन वो अपनी आभासी दुनिया की प्यारी दोस्त, जो अब उसकी मंगेतर भी थी, के साथ शहर के बड़े मालों और बाज़ारों में घूमता रहा। दोनों ने एक साथ मूवी देखी, लंच किया, शॉपिंग की और...।
शाम को जब बेटा लौटा तो वो उदास दिखा। कुछ देर बाद उसने स्वयं चुप्पी तोड़ी।
‘मां ... आपसे कुछ कहना था।’
‘कहो?’ मां का दिल धड़क उठा।
‘वो वैसी नहीं, जैसी अब तक पेश आती रही थी...।’
‘तुझे कैसे पता? इतनी जल्दी किसी को जज नहीं कर सकते। वक्त लगता है बेटा।’
‘वो सिर्फ़ अपने लिये ही सोचती है।’
‘रात-दिन फेसबुक पर ही किसी न किसी से चैटिंग करती रहती है। उसका मानना है कि ‘एफबी’ का परिवार ही उसका असली परिवार था और है।’
‘वो क्रेज़ी है मां, अपने आभासी जगत के दोस्तों के लिये। इसलिये मेरे लिए भी वो हमेशा ऑन लाइन रहती।’ बेटा दुखी होकर बोला।
‘पहले तो मैं समझा था मेरे कारण ही वो ऑनलाइन बैठती थी... अब पता चला उसे नशा था सोशल साइट का।
‘वो बीमार है मां, आजकल के किशोरों और युवाओं की तरह ही...।’
‘फिर... अब...।’ मां का गंभीर स्वर गूंजा।
‘अब मां ...आप ढूंढ़ सकती हैं अपनी मनचाही बहू।
बेटा अपने कान पकड़कर बोला, ‘प्लीज़ मां-पापा, सॉरी...।’
मां मन ही मन में मुस्कुरा दीं, जान बची और...।
अब मां अपने गुमराह बेटे के लिए, ढूंढ़कर लाएंगी एक हीरा...।

