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ज्ञान-हौसले की बाल कविताएं

पुस्तकें मिलीं

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पहली बालकृति ‘हंसने दो मुस्काने दो’ के बाद ‘सूरज दादा कूल बनो’ लेकर आए नरेंद्र सिंह नीहार की रचनाओं में जहां ज्ञान का ओज है, वहीं व्यावहारिक जीवन की सीख भी है। रचनाकार की बाल सरोकारों की प्रतिबद्धता और बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ रचनाओं को पठनीय और अनुकरणीय बनाती है। तपिश के दौर में बालमन ‘सूरज दादा कूल बनो’ की गुहार लगाता है। रचनाएं बालसुलभ सहजता, चपलता और हास्य-व्यंग्य से भरपूर हैं। रचनाएं बालमन की सहज अभिव्यक्ति हैं।

पुस्तक : सूरज दादा कूल बनो सृजनकार : नरेंद्र सिंह नीहार प्रकाशक : स्वान बुक्स, नयी दिल्ली पृष्ठ : 64 मूल्य : रु. 250.

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महानायक का जीवन-मर्म

सुविख्यात उपन्यासकार डॉ. राजेंद्र मोहन भटनागर ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन का व्यापक अध्ययन किया। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर-जीवन मर्म पुस्तक में उन्होंने एक स्कॉलर और व्यावहारिक इंसान के जीवन संघर्ष के विभिन्न आयामों को समेटा है। जाति की बेड़ियों को तोड़कर विविधता के भारतीय समाज को एकता के सूत्र में पिरोने के उनके महामानवीय प्रयासों की झलक पुस्तक में मिलती है। समतामूलक समाज की स्थापना में उनके योगदान का स्मरण किया गया है।

पुस्तक : भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर - जीवन मर्म लेखक : डॉ. राजेंद्र मोहन भटनागर प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स, नयी दिल्ली पृष्ठ : 232 मूल्य : रु. 250.

सामाजिक बदलाव की आकांक्षा

कुल 51 बाल कविताएं, बीस अन्य कविताएं, चार कहानियां, दो निबंध और तीन नाटकों सहित कुल अस्सी रचनाओं वाले गद्य-पद्य संग्रह वाली रचना पुष्पाजलि रचनाकार सुषमा शर्मा का पहला गद्य-पद्य संग्रह है। रचनाओं के केंद्र में समाज से जुड़े विभिन्न विषयों का विमर्श है। सकारात्मक सोच के साथ समाज में बदलाव की गहरी आकांक्षा रचनाओं में मुखरित होती है। एक शिक्षक के रूप में साढ़े तीन दशकों के व्यापक अनुभवों के जरिए लेखिका ने रचनाओं को समृद्ध किया है। रचनाओं की भाषा-शैली सरल और सहज है।

पुस्तक : पुष्पांजलि सृजनकार : सुषमा शर्मा प्रकाशक : अयन प्रकाशन, नयी दिल्ली पृष्ठ : 187 मूल्य : रु. 550.

बिन पंख ऊंची उड़ान

शिक्षक मिट्ठू राम मंडल के पहले कविता ‘संग्रह बिन पर परिदें’ का सार यही है कि अभिव्यक्ति की आजादी के बिना इंसान वैसे ही जैसे बिना पंख के परिंदा होता है। गहन विचारों के जरिए रचनाकार एक ऐसे समाज का आकांक्षी है जहां जाति, धर्म, लिंग, भाषा व क्षेत्र के आधार पर किसी तरह का भेदभाव न हो। उनका मानना है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर व महात्मा बुद्ध के जीवन-दर्शन में दुनिया के संकटों का समाधान निहित है।

पुस्तक : बिन पर परिदें सृजनकार : मिट्ठू राम मंडल प्रकाशक : मंडल पब्लिशर पृष्ठ : 102 मूल्य : रु. 249.

पंछी होता बाल मन

‘हम पंछी नील गगन के’ बालगीत संग्रह के प्रकाशन के बाद ओमप्रकाश कादियान अपना नया रचनासंग्रह ‘अगर हम पंछी होते’ बाल पाठकों के लिए लेकर आए हैं। अनेक विधाओं पर पुस्तकें रचने वाले और छायाकार कादियान बाल पाठकों के लिए लगातार लिखते रहे हैं। उनकी मान्यता है कि बाल आकांक्षाओं के अनुरूप रचनाओं से ही उन्हें अच्छा इंसान बनाया जा सकता है। निस्संदेह, संकलन में शामिल तीस रचनाओं में उन्होंने बच्चा बनकर बालमन में झांका है।

पुस्तक : अगर हम पंछी होते सृजनकार : ओमप्रकाश कादियान प्रकाशक : नीलाभ पब्लिकेशन, मुंबई पृष्ठ : 63 मूल्य : रु. 250.

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