पुस्तकें मिलीं

पुस्तकें मिलीं

महकते मन-मणके

अरुण नैथानी

कमलेश शर्मा की पहली पुस्तक ‘मणके-मन के’ दरअसल उन सपनों, आकांक्षाओं और दरकती उम्मीदों का शब्दांकन है जो घर-गृहस्थी के फेर में उलझते रहे हैं। प्रथम काव्य कृति में 57 कविताओं का संकलन हैं। सहज-सरल अभिव्यक्ति इन रचनाओं का गुण है। जिनमें जीवन की सुखद-दुखद अनुभूतियां, स्मृतियां, वर्तमान जीवन, अंतर्विरोध, सामाजिक विद्रूपताओं तथा उद्वेलित करने वाली घटनाओं के शब्द चित्र हैं।

पुस्तक : मणके-मन के कवयित्री : कमलेश शर्मा प्रकाशक : साहित्यागार, जयपुर पृष्ठ : 128 मूल्य : रु. 200.

अनुकरणीय पथ पर

निस्संदेह, जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के उपदेश वक्त की कसौटी पर आज भी खरे हैं। लेखिका ने पुस्तक में बताया है कि आध्यात्मिकता के मार्गदर्शन के अलावा वे एक क्रांतिकारी समाज सुधारक भी थे। नारी समता हेतु अथक प्रयास उन्होंने किये। लेखिका ने सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह आदि सिद्धांतों के आलोक में मानव पथ-प्रदर्शक विचारों से परिपूर्ण लेखों का संकलन इस पुस्तक में किया है।

पुस्तक : भगवान महावीर के पथ पर लेखिका : निर्मला बैद प्रकाशक : दीपक पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रिब्यूटर्स, जयपुर पृष्ठ : 136 मूल्य : रु. 395.

वक्त की नब्ज पर हाथ

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और साहित्य व पत्रकारिता में बराबर दखल रखने वाले रोहित यादव का तीसरा कुंडली संग्रह है ‘कालदर्शन’। देश के राजनीतिक परिदृश्य की विद्रूपताओं ने रचनाकार के मन को उद्वेलित किया है। उन्हीं अहसासों को बिना लागलपेट व सीधे-सपाट शब्दों में कुंडलियों में रचनाकार ने गूंथा है। साथ ही कुंडली विधा को भी समृद्ध किया है।

पुस्तक : कालदर्शन लेखक : रोहित यादव प्रकाशक : अभिव्यक्ति प्रकाशन, मंडी अटेली पृष्ठ : 112 मूल्य : रु. 300.

सतसई परंपरा का विस्तार

राजस्थानी में देवनागरी लिपि में लिखी गई ‘सार सतसई’ डॉ. शंकरलाल गुप्ता की पठनीय रचना है। सतसई लेखन की प्राचीन राजस्थानी परंपरा काे समृद्ध करते हुए रचनाकार ने सात सौ से अधिक दोहे रच कर अपनी काव्य मेधा को अभिव्यक्त किया है। जिज्ञासा, सृष्टि, परमात्मा, आत्मा, माया, जीव, जगत, निराकार, साकार, भक्ति, साधक, गीतासार, धर्म, पाहन पूजा, अर्थ काम, वाणी, सदाचार, मोक्ष आदि शीर्षक रचनाओं में आध्यात्मिक दृष्टि का बोध होता है।

पुस्तक : सार सतसई लेखक : डॉ. शंकरलाल गुप्त प्रकाशक : साहित्यागार, जयपुर पृष्ठ : 108 मूल्य : रु. 200.

ज्ञानवर्धक सृजन

विपुल साहित्य की रचना करने वाली शिक्षाविद् और बाल साहित्यकार बानो सरताज की मान्यता रही है कि बच्चे नयी बातें उतनी तेजी से सीखते हैं, जितनी तेजी से भूखे कबूतर दाना चुगते हैं। बचपन से बड़ी कोई पाठशाला नहीं है। इसी मकसद से उन्होंने ‘ज्ञानवर्द्धक रोचक कहानियां’ पुस्तक लिखी है। पुस्तक में ओलंपिक खेलों की कहानी, पुलों की कहानी, रोबोट की कहानी, मोमबत्ती की कहानी व मोगली की कहानी शीर्षक रचनाएं संकलित हैं।

पुस्तक : ज्ञानवर्द्धक रोचक कहानियां लेखिका : डॉ. बानो सरताज प्रकाशक : साहित्यागार,जयपुर पृष्ठ : 104 मूल्य : रु. 200.

स्मृतियों के अक्स

रोहित यादव के संपादन में प्रकाशित स्मृति-ग्रंथ ‘साक्षात देवी : पुष्पा परमार’ में एक ऐसी स्त्री का भावपूर्ण स्मरण है, जिन्होंने शैक्षिक व सामाजिक जीवन में रचनात्मक योगदान दिया है। समाज के प्रतिष्ठित, शुभचिंतकों व परिजनों ने स्व. पुष्पा परमार के रूढ़िवादिता के खिलाफ जनजागरण तथा समाज को सचेत करने वाले प्रयासों का जिक्र किया है। शिक्षा की ज्योति जलाने की सराहना की है।

पुस्तक : साक्षात देवी : पुष्पा परमार संपादक : रोहित यादव प्रकाशक : अभिव्यक्ति प्रकाशन, मण्डी अटेली पृष्ठ : 253

लोकजीवन के रंग

शिक्षक और काव्य मंचों पर सक्रिय रहने वाले त्रिलोक चंद फतेहपुरी के बहुआयामी लेखन में शामिल पुस्तक ‘घंटू के कारनामे’ में हरियाणवी लोकजीवन के बिम्ब उभरते हैं। लेखक की इस पांचवीं पुस्तक में रचनाकार ने एक पात्र के माध्यम से जहां लोकजीवन अक्स उकेरा है, वहीं समाज की विसंगतियों पर भी तंज किया है। कथाओं में हरियाणवी हास-परिहास गहरे निहितार्थों के साथ मौजूद है।

पुस्तक : घंटू के कारनामे संपादक : त्रिलोक ‘फतेहपुरी’ प्रकाशक : शब्दांकुर प्रकाशन, नई दिल्ली पृष्ठ : 118 मूल्य : रु. 200.

गहरे अहसासों का काव्य

पेशे से चिकित्सक डॉ. उमा गर्ग की पुस्तक ‘काव्य कृतिका’ में जीवन यात्रा के गहरे अहसासों के शब्दचित्र विद्यमान हैं। संकलन में शामिल 49 कविताओं में छात्र जीवन से लेकर परिपक्व जीवन के अनुभवों की बानगी है। वे अपनी कल्पनाओं को मूर्त रूप देती हैं और पाठकों को जीवन की हकीकत से रूबरू करने का प्रयास करती हैं। कविता की बुनावट व भाषा सहज व सरल है।

पुस्तक : काव्य कृतिका कवयित्री : डॉ. उमा गर्ग प्रकाशक : सप्तऋषि पब्लिकेशन्ज, चंडीगढ़ पृष्ठ : 78 मूल्य : रु. 175.

मौन की मुखर अभिव्यक्ति

विभिन्न विधाओं में विपुल साहित्य रचने वाले और समाज सुधारक मधुकांत की पुस्तक ‘मौन उपद्रव’ की काव्य रचनाएं जीवन के यथार्थ व गूढ़ सत्यों से रूबरू कराती हैं। कुछ रचनाएं व्यक्ति के अंत:करण की जीवनपर्यंत अनवरत रूप से चलने वाली यात्रा के महत्व को रेखांकित करती हैं। रचनाओं में आम आदमी से जुड़े सामान्य विषयों पर केंद्रित कविताएं भी शामिल हैं।

पुस्तक : मौन उपद्रव लेखक : मधुकांत प्रकाशक : मोनिका प्रकाशन, दिल्ली पृष्ठ : 112 मूल्य : रु. 400.

काव्य में जीवनधारा

प्रो. हरदीप सिंह रूपवाल की हिंदी में दूसरी और साहित्य की पांचवीं काव्य रचना है- ‘रक्त बूंद का गारा।’ विज्ञान विषय का अध्येता यदि साहित्य सृजन करता है तो नयी दृष्टि देता है। उनकी रचनाधर्मिता में जहां जीवन संघर्ष का कठोर यथार्थ है, वहीं मानवीय संवेदनाओं की गहरी कसक भी। भले ही रचनाएं अनघड़ अभिव्यक्ति हों, लेकिन उनमें भावनात्मक आवेग विद्यमान है।

पुस्तक : रक्त बूंद का गारा लेखक : प्रो. हरदीप सिंह रूपवाल प्रकाशक :सप्तऋषि पब्लिकेशन्ज, चंडीगढ़ पृष्ठ : 130 मूल्य : रु. 250.

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