लेखिका शोभा चन्दर की नई कृति ‘ओ! मेरे मनमीत’ शीर्षक से सद्य: प्रकाशित दोहा संग्रह अनेक रंगों के पुष्पों से सजा एक गुलदस्ता है। प्रथम पूज्य गणपति व मां शारदा की वंदना से प्रारंभ कर चंद्रमा की श्रेष्ठता का वर्णन करते हुए लिखा है :-
‘चंदा तेरी चांदनी, करती भाव विभोर।
ज्यों फैलाया रात ने, गोरस चारों ओर।’
संग्रह के दोहे जिंदगी के विभिन्न बिंदुओं को कभी सकारात्मक ढंग से समाधान तो कभी प्रश्न बनकर पाठकों को सोचने पर विवश कर देते हैं। शब्दों और अर्थों के बीच कबीर की तरह सच कहने का भी लेखिका ने प्रयास किया है, बानगी देखिए :-‘देखो जरा किसान की कैसी है तस्वीर
बाल-बाल है कर्ज में, आंखों में है नीर।’
जैसे-जैसे पाठक दोहों के भाव जगत में डूबता जाता है, तो स्वयं को भी उसी स्थिति में पाता है। सभी दोहे रोचक, प्रवाहपूर्ण एवं जीवन का सार हैं, या यूं कहें कि सभी दोहे बेजोड़ हैं। संग्रह की खूबी कहें या विशेषता है जीवन के साथ जुड़ाव, जीवन का दृष्टिकोण, जीवन की कमजोरियां, ज़िन्दगी के सपने, वे तमाम पहलू जिन्हें हम जीते हैं, महसूस करते हैं, ऐसे सपनों को यथार्थ के धरातल पर सुख-दुख, संयोग-वियोग के साथ अन्य विषयों को दोहों में लिपिबद्ध किया गया है।
कहा जाता है कि सरल लिखना बहुत कठिन होता है। सरल शब्दों में, सरल भाषा में अपनी अनुभूतियों को वही शब्द दे पाता है जो हृदय से कवि होता है, केवल कवि। लेखिका ने दोहों में जिंदगी से कहीं शिकायत, कहीं समाज के दमघोंटू नियम-कानून के प्रति तीखा विरोध किया है।
संयोग-वियोग रस के दोहे भी पाठक के मन को अनायास ही भिगो देते हैं। दर्द को भी लेखिका ने अपने दोहों में स्थान दिया है। दोहों में सामाजिक सरोकारों का तारतम्य देखा जा सकता है। दम तोड़ते संस्कार, गिरते मानवीय मूल्यों को लेखिका ने दृढ़ता से दोहों में गूंथा है।
संगृहीत दोहे सहज, सरल होने के साथ-साथ सामाजिक, पारिवारिक, राजनीतिक समकालीन अव्यवस्था को उजागर करते हुए पाठक को अपने साथ जोड़ लेते हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की ओर सभी का ध्यान है, तो लेखिका की दृष्टि से कैसे इस विषय पर लेखनी न चलती।
संग्रह का हर दोहा अपना स्वतंत्र अस्तित्व रखता है। एक विशेष विचार हर दोहे में है। यह कृति मानवीय संवेदनाओं का ऐसा दर्पण है, जिसमें हर पाठक सीख-शब्द ले सकता है।
पुस्तक : ओ! मेरे मनमीत (दोहा संग्रह) लेखिका : शोभा चन्दर प्रकाशक : दीपक प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 119 मूल्य : रु. 375.

