Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

सकारात्मक लघुकथाओं का संगम

पुस्तक समीक्षा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

‘दृष्टि’ के समकालीन हिन्दी लघुकथाओं के जनपथ में एक और विशेषांक ‘सकारात्मक लघुकथा अंक’ शामिल हो गया है। दृष्टि पत्रिका का यह 9वां विशेषांक है, जिसका संपादन अशोक जैन ने किया है। ‘दृष्टि’ के ये अंक समकालीन लघुकथा साहित्य को बढ़ावा दे रहे हैं और अपनी निरंतरता से लघुकथा के प्रति लेखकों और पाठकों को जागरूक कर रहे हैं। सकारात्मक लघुकथा अंक एक विशेष संग्रह को संदर्भित करता है, जिसमें ऐसी लघुकथाएं होती हैं, जो सकारात्मक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इनका उद्देश्य पाठकों को आशा, प्रेरणा और सकारात्मकता से भर देना होता है।

इस अंक में विभिन्न लेखकों की लघुकथाओं के अलावा, सकारात्मक लघुकथा पर एक आलोचनात्मक लेख और लघुकथा को परिभाषित करता हुआ साक्षात्कार भी शामिल है, जिनमें लघुकथा के कथ्य, शिल्प और भविष्य पर गहन विश्लेषण किया गया है।

Advertisement

अपने आलेख में माधव नागदा ने हिन्दी लघुकथाओं में सकारात्मकता का खुलकर विवेचन किया है। सकारात्मकता क्या है और साहित्य में इसका क्या महत्व है, पर नागदा कहते हैं कि सकारात्मकता का अर्थ जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण है। जिजीविषा, संघर्ष, चेतना, प्रतिकूल स्थितियों में धैर्य बनाए रखना और किसी भी स्थिति में हार न मानने की भावना ही सकारात्मकता है। उन्होंने अपने आलेख में कई ऐसे लघुकथाकारों का उल्लेख किया है, जिनमें किसी न किसी रूप में संवेदनात्मक छुअन या मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, अर्थात‍् सकारात्मकता के दर्शन होते हैं।

Advertisement

लघुकथा क्या है, लघुकथा का तत्व क्या है, लघुकथा कहानी और उपन्यास के बीच क्या अंतर है, लघुकथा को लेकर बहुत सारी बातें ‘जितने स्कूल उतने पाठ्यक्रम’ वाली स्थिति को परिभाषित करते हुए नेतराम भारती के सवालों का बड़ी बेबाकी से जवाब दिया है वरिष्ठ कथाकार मोहन राजेश ने।

इस बार विशिष्ट लघुकथाकार के तौर पर प्रख्यात कथाकार श्याम सुंदर अग्रवाल की पांच लघुकथाओं को विशिष्ट स्थान दिया है, जिनमें ‘आंगन की धूप’, ‘उत्सव’, ‘गोलियों के निशान’, ‘टूटी हुई ट्रे’ और ‘भिखारी’ हैं। इसके अलावा लगभग 84 लघुकथाकारों की मानवीय संवेदनाएं जगाने वाली तथा सकारात्मक मूल्यों की पक्षधर लघुकथाएं शामिल हैं।

पुस्तक : दृष्टि : सकारात्मक लघुकथा अंक संपादन : अशोक जैन प्रकाशक : एब्रो एंटरप्राइसिस, दिल्ली पृष्ठ : 128 मूल्य : रु. 200.

Advertisement
×