24 घंटे के लिए गांव सील, नहीं जलेगा चूल्हा

पशुओं एवं ग्रामीणों को बीमारियों से बचाने के लिए गांव भैणी चंद्रपाल में लगाया ‘बंद’

24 घंटे के लिए गांव सील, नहीं जलेगा चूल्हा

महम के गांव भैणी चंद्रपाल स्थित मंदिर में हवन सामग्री का कुंड हाथ में लेकर धूमणी देने की तैयारी में खड़े युवा। -हप्र

हरीश भारद्वाज/हप्र

रोहतक, 19 अक्तूबर

कोरोना काल में लगे लॉकडाउन जैसा दृश्य एक बार फिर जिले के गांव भैणी चंद्रपाल में देखने को मिला। हमारी प्राचीन सामाजिक व्यवस्था में पहले भी लॉकडाउन जैसी व्यवस्थाएं थी। ऐसा ही एक आयोजन मंगलवार शाम महम के गांव भैणी चंद्रपाल में देखने को मिला। शाम 6 बजते ही गांव के मंदिर का शंख बजने के साथ ही गांव की सीमाएं सील कर दी गई, हवन शुरू हो गया और गांव के युवा हवन सामग्री का कुंड हाथ में लेकर घर-घर धूमणी देने के लिए निकल पड़े। इसके साथ ही 24 घंटे के लिए गांव भैणी चंद्रपाल पूरी तरह से सील हो गया। गांव में कोई आ नहीं सकेगा और न कोई जा सकेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछलेेेे 70 साल से ग्रामीणोंं एवं पशु पक्षियों को बीमारियो से बचाने के लिए बंद का आयोजन किया जाता है। पशु में बीमारियां फैलने के खतरे के चलते 3 या 4 वर्ष बाद गांव में ऐसा आयोजन कर दिया जाता है। ग्रामीण पिछले 2 दिन से बंद की तैयारियों में जुटे हैं। ग्रामीणों ने मंगलवार दोपहर तक पशु चारे की पूरी व्यवस्था कर ली थी। गांव का बच्चा हो, बूढ़ा हो, महिला हो या पुरुष हो सभी 5:00 बजे से पहले खा पीकर पूरी तरह तैयार हो गए थे। ज्यादातर ग्रामीण बंद की तैयारियों की व्यवस्था के लिए दोपहर को ही गांव स्थित मंदिर में पहुंच गए थे। गांव के पूर्व सरपंच ज्ञान सिंह, नरेश बड़ा भैण ने बताया कि शाम 6:00 बजे के बाद गांव में चूल्हा नहीं जलेगा, यहां तक कि किसी के घर पर चाय तक भी नहीं बनेगी। जो कुछ भी खाना-पीना है मंगलवार शाम 6:00 बजे से पहले खाएंगे। शाम 6:00 बजे गांव की सीमाएं सील कर पूरे गांव में युवाओं ने घर घर जाकर धूमणी दी। गांव में धूमणी के लिए 19 टीमें बनाई गई। हर टीम में चार-चार युवक शामिल किये। बुधवार को भी पूरे गांव में धूमनी दी जाएगी। कुछ युवाओं को गांव की सीमाओं पर पहरे पर बैठा दिया गया है। गांव की सीमाओं पर पानी से भरे मटके रख दिए गए हैं। सुबह पूरे गांव का सारा दूध मंदिर में पहुंच जाएगा, जहां सामूहिक रूप से खीर बनेगी। अन्य किसी व्यंजन एवं चाय नाश्ता की बजाय सभी ग्रामीण मंदिर में जाकर खीर ही खाएंगे। सभी को मंदिर में ही खाना होगा। नरेश बड़ा भैण ने बताया कि गांव के हर घर से बराबर चंदा लिया गया है। इस चंदे से खीर में डालने के लिए चावल, चीनी व पिस्ता आदि खरीदा गया है। सुबह गांव के हर घर का दूध मंदिर में पहुंचेगा। टेंट भी गांव में फ्री का है। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार शाम 6:00 बजे तक गांव का कोई भी व्यक्ति खेत में पानी देने भी नहीं जाएगा। किसी भी औजार का प्रयोग नहीं किया जाएगा। रात भर सभी पशु अपने खूंटे से बंधे रहेंगे। सुबह पशुओं को मंदिर के पास स्थित तालाब पर ले जाया जाएगा जहां दूब से बना रस्सा उनके गले में बांधा जाएगा।

बीमारी का प्रसार रोकने का तरीका

पीजीआईएमएस के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर ध्रुव चौधरी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए कॉविड के दौरान किए गए लॉकडाउन की तरह है। ऐसे आयोजनों से आपसी भाईचारा भी बढ़ता है। 

महम-जुलाना सड़क भी बंद 

नरेश बड़ा भैण ने बताया कि बंद के दिन का फैसला गांव की पंचायत बैठकर करती है।  जिस दिन बंद लगना होता है उस दिन मलेरकोटला से गंडा मंगवाया जाता है और गांव के मंदिर में रख दिया जाता है।  अगर कोई रिश्तेदार आ भी गया तो उसके रहने की व्यवस्था महम में कर दी गई है। बंद के चलते गांव की सीमा से गुजरने वाले महम जुलाना सड़क को भी 24 घंटे के लिए बंद किया जाएगा। इस मार्ग से कोई वाहन चालक आ जा भी नहीं सकेगा। रास्ता बंद होने के कारण महम से जुलाना जाने वाले वाहन चालकों को सैमाण, बेडवा, फरमाणा से होकर जाना पड़ेगा। महम से लाखनमाजरा होते हुए भी वाहन चालक जींद जुलाना पहुंच सकते हैं।

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