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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हमारे अभियान की जीत : जागलान

जींद के बीबीपुर गांव से शुरू हुए 16 साल पुराने अभियान को मिली राष्ट्रीय पहचान मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जींद जिले के बीबीपुर गांव से 16 साल पहले शुरू हुई एक छोटी सामाजिक पहल को अब...

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जींद के बीबीपुर गांव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर महिलाओं के साथ खुशी मनाते के पूर्व सरपंच सुनील जागलान। -हप्र
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जींद के बीबीपुर गांव से शुरू हुए 16 साल पुराने अभियान को मिली राष्ट्रीय पहचान

मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जींद जिले के बीबीपुर गांव से 16 साल पहले शुरू हुई एक छोटी सामाजिक पहल को अब सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा घोषित किया है।

यह उपलब्धि बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच, सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के संस्थापक और माहवारी स्वच्छता अभियान के प्रमुख चेहरे प्रो. सुनील जागलान के लंबे सामाजिक संघर्ष का परिणाम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं।

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसकी अनुपलब्धता छात्राओं की गरिमा, निजता और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। आदेश की अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। साल 2010 के आसपास बीबीपुर गांव से तत्कालीन सरपंच सुनील जागलान ने माहवारी जैसे संवेदनशील विषय पर समाज में जागरूकता की शुरुआत की थी।

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‘पैडमित्र’, ‘पीरियड चार्ट’ अंतरराष्ट्रीय अभियान, ‘लाडो पंचायत’, ‘पीरियड लीव’ और ‘फर्स्ट पीरियड किट फॉर विमेन’ जैसे अभियानों के जरिए उन्होंने पंचायतों, स्कूलों और गांवों में माहवारी पर खुलकर बातचीत का माहौल बनाया।

शुरुआती वर्षों में विरोध और आलोचना के बावजूद उनके प्रयासों ने लाखों लड़कियों और महिलाओं की सोच बदली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील जागलान ने कहा कि यह 15 साल के संघर्ष की सामूहिक जीत है। अब चुनौती इस फैसले के प्रभावी क्रियान्वयन की है, ताकि कोई भी बच्ची माहवारी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।

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