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कम पानी में ज्यादा उत्पादन वाली खेती को बढ़ावा देना समय की जरूरत : सैनी

एचएयू के कृषि मेले का शुभारंभ, 45 प्रगतिशील किसान सम्मानित बदलती जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन देने वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।...

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हिसार में कृषि मेले में प्रदर्शनी का अवलोकन करते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व अन्य। -हप्र
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एचएयू के कृषि मेले का शुभारंभ, 45 प्रगतिशील किसान सम्मानित

बदलती जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन देने वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। सतत कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण और जल संरक्षण भविष्य की सुरक्षित कृषि व्यवस्था के लिए जरूरी हैं। यह बात मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बृहस्पतिवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में दो दिवसीय कृषि मेले (रबी) के शुभारंभ अवसर पर कही।

मुख्यमंत्री ने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन कर उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, मशीनरी और कृषि उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कृषि मेला किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। मेले में प्रदर्शित कपास चुगाई मशीन एक घंटे में करीब एक एकड़ कपास की चुगाई कर सकती है। सरकार ऐसी मशीनों को बढ़ावा दे रही है, ताकि श्रमिकों की कमी के कारण कपास और गन्ने का क्षेत्र प्रभावित न हो।

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कपास को बताया ‘सफेद सोना’

सैनी ने कहा कि हिसार, सिरसा और फतेहाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों में लाखों किसान परिवारों की आजीविका कपास से जुड़ी है। बदलते मौसम और कीटों की चुनौतियों से निपटने के लिए मौसम अनुकूल बीज और तकनीक विकसित करना जरूरी है। प्रदेश में 257 कपास किसान खेत पाठशालाओं के माध्यम से सात हजार से अधिक किसानों को बिजाई से चुगाई तक वैज्ञानिक जानकारी दी गई है।

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भूजल बचाने को फसल विविधीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं-धान की लगातार खेती से पानी और मिट्टी पर दबाव बढ़ रहा है। ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत वैकल्पिक फसल अपनाने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को आठ हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता दी जा रही है। अब तक 2.34 लाख एकड़ में वैकल्पिक फसल अपनाने पर 1.59 लाख किसानों को 166.34 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

1.06 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड जारी

सैनी ने बताया कि प्रदेश में एक करोड़ छह लाख सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं और मिट्टी एवं जल परीक्षण के लिए 17 नई प्रयोगशालाएं स्थापित हुई हैं। प्राकृतिक खेती के लिए करीब दो लाख किसानों ने तीन लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। कृषि मेले में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मधुमक्खी पालन समेत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। उन्होंने एचएयू परिसर में 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया।

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