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तीन सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिए गौरव : डॉ. अरविंद शर्मा

शाहाबाद, करनाल और पानीपत मिलों को राष्ट्रीय पुरस्कार; तकनीकी दक्षता व गन्ना विकास में हासिल किया प्रथम स्थान हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रदर्शन का परचम लहराया है। शाहाबाद,...

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शाहाबाद, करनाल और पानीपत मिलों को राष्ट्रीय पुरस्कार; तकनीकी दक्षता व गन्ना विकास में हासिल किया प्रथम स्थान

हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रदर्शन का परचम लहराया है। शाहाबाद, करनाल और पानीपत सहकारी चीनी मिलों को विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिलने पर सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने इसे प्रदेश के लिए गौरव की उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसानों, मिल कर्मचारियों, इंजीनियरों और प्रबंधन की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।

डॉ. अरविंद शर्मा
डॉ. अरविंद शर्मा

डॉ. शर्मा ने बताया कि नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज की ओर से आयोजित नेशनल शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्क्लेव में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में पुरस्कार प्रदान किए गए। शाहाबाद मिल को पेराई सत्र 2024-25 में ‘अन्य रिकवरी क्षेत्र’ में तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला।

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करनाल मिल ने तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि पानीपत के डाहर स्थित मिल को तकनीकी दक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला। मंत्री ने कहा कि पानीपत मिल ने 2025-26 में 94.61 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई और 5.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। बिजली उत्पादन से करीब 29 करोड़ रुपये की आय अर्जित हुई।

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उन्होंने कहा कि सरकार सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक बायो-एनर्जी हब के रूप में विकसित कर रही है। एथेनॉल, बिजली, शीरा, बैगास और बायो-सीबीजी जैसे उत्पादों पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में करीब 690 केएलपीडी क्षमता की एथेनॉल परियोजनाओं के लिए लगभग 1200 करोड़ रुपये के निवेश की दिशा में काम चल रहा है। उद्देश्य मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत कर इसका सीधा लाभ गन्ना उत्पादक किसानों तक पहुंचाना है।

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