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बड्स एक्ट-2019 लागू करने की मांग को लेकर निवेशकों ने किया, प्रदर्शन सौंपा ज्ञापन

लाखों निवेशकों को जमा राशि नहीं मिली, प्रशासन और मंत्रालयों की लापरवाही पर नाराजगी बड्स एक्ट-2019 को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर पीड़ित निवेशकों ने बुधवार को भिवानी में प्रदर्शन किया और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन...

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भिवानी में प्रदर्शन करते हुए पीड़ित निवेशक। -हप्र
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लाखों निवेशकों को जमा राशि नहीं मिली, प्रशासन और मंत्रालयों की लापरवाही पर नाराजगी

बड्स एक्ट-2019 को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर पीड़ित निवेशकों ने बुधवार को भिवानी में प्रदर्शन किया और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में पीड़ित जमाकर्ता परिवार संगठन के सदस्य शामिल थे। राज्य प्रधान रामजस ने कहा कि पीएसीएल और अन्य चीटफंड कंपनियों द्वारा लाखों भारतीय नागरिकों को ठगा गया है।

इन पीड़ितों ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने मांग की कि अनियमित जमा योजनाओं पर बड्स एक्ट-2019 के प्रावधान धरातल पर लागू किए जाएं। रामजस ने आरोप लगाया कि प्रशासन और संबंधित मंत्रालयों की घोर लापरवाही के कारण आज भी लाखों निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिली है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक क्षति झेलनी पड़ रही है।

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उन्होंने बताया कि संगठन ने अब सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। उन्होंने कहा कि बड्स एक्ट-2019 का उद्देश्य आम नागरिकों को पोंजी स्कीम और ठगी करने वाली कंपनियों से बचाना था। कानून के तहत, आवेदन प्राप्त होने के 180 दिनों के भीतर ठगी गई राशि का दो से तीन गुना भुगतान सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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निवेशक मांग कर रहे हैं कि बड्स एक्ट-2019 के तहत उनकी जमा राशि का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए और दोषी अधिकारियों एवं संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट से भी अनुरोध है कि संबंधित मंत्रालयों और राज्य प्रशासन को निर्देश दे कि निवेशकों के हित में तत्काल कदम उठाए जाएं। इस मौके पर राजेश कुमार बडाला, पवन कुमार सिरसा घोघड़ा, सुखबीर सिंह, रमेश तंवर, रामजस और सुरेश कुमार सहित अन्य पीड़ित निवेशक मौजूद थे।

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