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वेंटिलेटर के अभाव में नवजात की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, छह प्राधिकरणों से तलब की रिपोर्ट

हिसार से रोहतक तक भटकते रहे परिजन, स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर स्वत: संज्ञान हिसार के सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात की कथित मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान (सुओ-मोटो)...

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हिसार से रोहतक तक भटकते रहे परिजन, स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर स्वत: संज्ञान

हिसार के सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात की कथित मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान (सुओ-मोटो) लेते हुए इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता माना है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग समेत 6 संबंधित प्राधिकरणों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर कार्रवाई की। आयोग ने कहा कि यदि प्रकाशित तथ्य सही हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार तथा राज्य की स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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जानकारी के अनुसार, हिसार सिविल अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन से जन्मे नवजात को जन्म के तुरंत बाद वेंटिलेटर की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल का एकमात्र नवजात वेंटिलेटर पहले से उपयोग में था। इसके बाद शिशु को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और फिर पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया, जहां भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं मिला।

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अंततः निजी अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आयोग ने कहा कि मरीज को रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल में आवश्यक सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित करना चिकित्सकीय दायित्व है। बिना पुष्टि के रेफर करना आपातकालीन चिकित्सा प्रणाली की गंभीर कमी है।

आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, पीजीआईएमएस रोहतक, महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा, सिविल सर्जन हिसार और जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड से वेंटिलेटरों की स्थिति, रेफरल नीति, घटना की जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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