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फ्रांसीसी चैनल ने सुनील जागलान के सामाजिक कार्यों पर बनाई डॉक्यूमेंट्री

भारत-चीन के लिंगानुपात की तुलनात्मक पड़ताल बनी मुख्य विषय जींद जिले के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच, सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सेल्फी विद डॉटर’ अंतरराष्ट्रीय अभियान के जनक प्रोफेसर सुनील जागलान के जीवन और सामाजिक प्रयासों पर फ्रांस के प्रतिष्ठित...

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जींद के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच प्रो सुनील जागलान पर डॉक्यूमेंट्री के दौरान शूटिंग करते फ्रांसीसी चैनल के मेंबर। हप्र
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भारत-चीन के लिंगानुपात की तुलनात्मक पड़ताल बनी मुख्य विषय

जींद जिले के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच, सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सेल्फी विद डॉटर’ अंतरराष्ट्रीय अभियान के जनक प्रोफेसर सुनील जागलान के जीवन और सामाजिक प्रयासों पर फ्रांस के प्रतिष्ठित चैनल आरते (एआरटीई) ने एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। यह डॉक्यूमेंट्री भारत और चीन में लिंगानुपात से जुड़ी चुनौतियों, सामाजिक सोच और सुधार के प्रयासों की तुलनात्मक समीक्षा पर आधारित है।

डॉक्यूमेंट्री में प्रो. सुनील जागलान को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में दर्शाया गया है। फ्रांसीसी टीम ने विस्तृत शोध के बाद निष्कर्ष निकाला कि पिछले 15 वर्षों में भारत में लिंगानुपात सुधार की दिशा में सुनील जागलान का योगदान सबसे प्रभावी और परिणामदायी रहा है। इसी कारण उन्हें इस डॉक्यूमेंट्री का केंद्र बिंदु बनाया गया।

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चैनल की चार सदस्यीय टीम कॉन्स्टेंटाइन सिमोन, एशिया हेड अरुणा पुरी, एक अन्य शोधकर्ता और कैमरामैन राम ने पांच दिनों तक विभिन्न स्थानों पर शूटिंग की। इस दौरान कन्या भ्रूण हत्या रोकने के अभियान, ‘सेल्फी विद डॉटर’, बेटियों के नाम नेमप्लेट, पीरियड चार्ट और बालिका पंचायत जैसे नवाचारों को विस्तार से फिल्माया गया। टीम ने कई गांवों में महिलाओं और किशोरियों से संवाद कर इन अभियानों से आए सामाजिक बदलावों को कैमरे में कैद किया।

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प्रो. सुनील जागलान ने इस अनुभव को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उनके अभियान अब एशिया के साथ-साथ यूरोप तक पहुंचेंगे। उल्लेखनीय है कि सुनील जागलान के प्रयासों पर पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री बन चुकी हैं और उनकी ‘सनराइज डॉक्यूमेंट्री’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है।

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