Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

दस साल बाद शुरू हुआ मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का निर्माण, पहले ही फेज में ग्रामीणों ने जताया विरोध

पीएमओ की सीधी निगरानी, आधारभूत सुविधाएं पहले से तैयार, मुआवजे को लेकर विवाद करीब दस वर्ष पहले घोषित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है। यह परियोजना फरवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement
पीएमओ की सीधी निगरानी, आधारभूत सुविधाएं पहले से तैयार, मुआवजे को लेकर विवाद

करीब दस वर्ष पहले घोषित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है। यह परियोजना फरवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा घोषित की गई थी। पहले चरण के निर्माण कार्य के साथ ही क्षेत्र में विकास की उम्मीद जगी है, लेकिन भूमि मुआवजे को लेकर ग्रामीणों का विरोध भी सामने आया है।

Advertisement

यह लॉजिस्टिक हब नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र के गांव बसीरपुर, घाटाशेर और तलोट की भूमि पर विकसित किया जा रहा है। परियोजना के पहले चरण में 408 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है, जबकि पूरी परियोजना 865 एकड़ क्षेत्र में दो चरणों में पूरी की जाएगी। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 765 करोड़ रुपये है।

Advertisement

प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में परियोजना का कार्य चल रहा है और प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से पीएमओ को भेजी जाती है। हब को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे का अधिकांश कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। न्यू डाबला रेलवे स्टेशन से हब तक रेल लाइन बिछाई जा चुकी है।

इसके अलावा 220 केवी क्षमता की बिजली लाइन, नारनौल से नहरी पानी की पाइपलाइन और नेशनल हाईवे से सीधा संपर्क भी स्थापित किया गया है। वर्तमान में आंतरिक रेल लाइन और रेलवे प्लेटफॉर्म का निर्माण कार्य जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां प्रतिवर्ष 20 लाख कंटेनर हैंडल करने की क्षमता विकसित होगी। साथ ही एक लाख कंटेनरों के भंडारण हेतु वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध होगी।

मुआवजे को लेकर तीन गांवों के लोगों का विरोध

हालांकि, परियोजना शुरू होते ही तीनों गांवों के ग्रामीणों ने विरोध जताया। उनका आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के समय दिया गया 30 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा अपर्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार मुआवजा दिया जाता, तो उन्हें प्रति एकड़ करीब 65 लाख रुपये मिलते। उन्होंने सरकार से मुआवजा बढ़ाने और उचित प्रक्रिया अपनाने की मांग की है।

Advertisement
×