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गांव मुष्काबाद सीबीजी प्लांट का समाधान गतिरोध समाप्त

ग्रामीणों ने किया शुकराना पाठ

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बायो गैस प्लांट झगड़े का समाधान होने पर अखंड पाठ में सम्मिलित हिमांशु जैन डीसी, ज्योति यादव बैंस एसएसपी तथा गांव मुश्काबाद वासी।
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निकटवर्ती गांव मुष्काबाद में प्रस्तावित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद प्रशासन, तकनीकी विशेषज्ञों और स्थानीय समुदाय के बीच कई दौर की चर्चाओं के बाद आखिरकार सुलझ गया है। इस सफल समाधान के उपलक्ष्य में आज अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा आयोजित शुकराना पाठ में भाग लिया।

डिप्टी कमिश्नर लुधियाना हिमांशु जैन की अध्यक्षता में हुई कई बैठकों में एसएसपी खन्ना डॉ. ज्योति यादव बैंस और एसडीएम समराला रजनीश अरोड़ा ने भी अहम भूमिका निभाई और सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित किया। 14 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), आईआईटी रोपड़, आईआईटी दिल्ली, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) लुधियाना और पीजीआई के ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे, ने सभी तकनीकी और स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का विस्तार से समाधान किया। पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए समिति में ग्रामीणों द्वारा सुझाए गए विशेषज्ञ भी शामिल किए गए।

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विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीबीजी प्लांट्स का कैंसर या अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि इसमें मुख्य कच्चे माल के रूप में धान की पराली का उपयोग होता है, जिससे यह प्लांट पराली जलाने का टिकाऊ विकल्प बनता है, जो पंजाब में मौसमी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बायोगैस उत्पादन में प्रयुक्त रसायन कैंसरकारी नहीं हैं और मिट्टी, भूजल या पर्यावरण के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं पैदा करते।

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डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने दोहराया कि सीबीजी प्लांट्स ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों में आते हैं और इन्हें सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होता है। निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए तहसीलदार स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक ग्राम-स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें स्थानीय निवासी शामिल होंगे। यह समिति किसी भी समय औचक निरीक्षण कर प्रदूषण या प्रक्रियागत उल्लंघन की जांच कर सकेगी।

प्रशासन ने मुष्काबाद के लिए एक विकास पैकेज की भी घोषणा की, जिसमें सड़कों को चौड़ा करना, सामुदायिक केंद्र और जिम की स्थापना, सीसीटीवी कैमरे और स्ट्रीट लाइट्स लगाना, तालाब का कायाकल्प और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा कार्य शामिल हैं। प्लांट में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही आवश्यक कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस प्लांट को लेकर गांव वासियों, किसान संगठनों और प्रशासन के बीच लंबे समय से गतिरोध चल रहा था। किसान संगठनों और गांव वासियों का कहना था कि प्लांट से निकलने वाली गैसें कैंसर कारक हैं।

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