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Six Bills Discussion: पंजाब विधानसभा का सत्र बढ़ाने की मांग, खैरा बोले- छह विधेयकों पर हो चर्चा

Six Bills Discussion: कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब सरकार और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से सदन के सत्र की अवधि बढ़ाने का रविवार को आग्रह किया ताकि विचार के लिए सूचीबद्ध छह विधेयकों पर पर्याप्त...

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सुखपाल सिंह खैरा।फ़ाइल फ़ोटो
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Six Bills Discussion: कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब सरकार और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से सदन के सत्र की अवधि बढ़ाने का रविवार को आग्रह किया ताकि विचार के लिए सूचीबद्ध छह विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा हो सके।

खैरा ने कहा कि तीन डिजिटल विश्वविद्यालयों, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), 'आउटसोर्स' और संविदा कर्मचारियों तथा साझा बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्तावों वाले इन विधेयकों को सत्र के अंतिम चरण में पेश किया गया है।

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उन्होंने ने एक बयान में कहा, ''पंजाब पर दूरगामी असर डालने वाले छह नए कानूनों की सत्र के आखिरी कार्यदिवस पर ठीक से समीक्षा और चर्चा कर उन्हें पारित करना कैसे संभव है? इसे सार्थक संसदीय लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता।'' विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को समाप्त होना है।

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कांग्रेस विधायक ने कहा कि विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने, संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने, विभागों से स्पष्टीकरण मांगने और व्यापक जनहित में संशोधन सुझाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। भुलथ से विधायक खैरा ने कहा, ''विधानसभा मंत्रिमंडल के फैसलों पर केवल मुहर लगाने वाली संस्था नहीं है।

विधायिका का उद्देश्य कानून के प्रत्येक प्रावधान की समीक्षा करना, उसके गुण-दोष पर चर्चा करना और पंजाब के लोगों के हितों की रक्षा करना है।'' खैरा ने सत्र के अंत में विशेष रूप से तीन अलग-अलग डिजिटल विश्वविद्यालय विधेयक पेश करने की जरूरत पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा, ''सरकार को बताना चाहिए कि इन विषयों को पर्याप्त चर्चा के लिए सदन के सामने पहले क्यों नहीं रखा गया।'' खैरा ने कहा, ''अगर सरकार वास्तव में मानती है कि ये विधेयक पंजाब के हित में हैं, तो उसे सत्र की अवधि बढ़ाने और उन पर पूरी तथा सार्थक चर्चा कराने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।''

खैरा ने कहा, ''मैं सरकार और विधानसभा अध्यक्ष से अपील करता हूं कि सत्र की अवधि बढ़ाई जाए और विधायकों को इन विधेयकों को पढ़ने, समझने, उन पर चर्चा करने और संशोधन सुझाने का समय दिया जाए। अंतिम दिन जल्दबाजी में छह नए कानून पारित करना पंजाब के भविष्य के साथ क्रूर मजाक के अलावा कुछ नहीं है।''

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