Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

पंजाब में बेअदबी के खिलाफ कानून : मान ने कहा- समीक्षा करेगी समिति, पर मुख्य प्रावधान बने रहेंगे 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार की ओर से गठित समिति 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' की समीक्षा करेगी, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य प्रावधानों, जिसमें...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
चंडीगढ़ में रविवार को उच्चस्तरीय तालमेल कमेटी सदस्यों के साथ बैठक करते पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। -ट्रिन्यू
Advertisement
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार की ओर से गठित समिति 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' की समीक्षा करेगी, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य प्रावधानों, जिसमें धार्मिक अपमान के लिए आजीवन कारावास और भारी जुर्माना शामिल है, को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने सात सदस्यीय समिति को अकाल तख्त द्वारा गठित कमेटी के साथ विस्तृत बातचीत करने का निर्देश दिया।

रविवार को नवगठित समिति के साथ लगभग दो घंटे चली बैठक में मान ने कहा कि अकाल तख्त हम सभी के लिए सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक अपमान के खिलाफ सबसे मजबूत कानूनी ढांचे के माध्यम से गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता और गरिमा की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

Advertisement

बैठक में संशोधित कानून के कुछ प्रावधानों पर जताई गई चिंताओं पर बातचीत व आम सहमति के जरिए आगे बढ़ने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया। मान ने समिति को निर्देश दिया कि वह पहले अपने सदस्यों से विचार-विमर्श करे और उसके बाद प्रस्तावित संशोधनों की जांच के लिए एसजीपीसी द्वारा गठित कमेटी के साथ बैठकें करे।

Advertisement

बैठक के बाद, अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि आज की बैठक सदस्यों के एक-दूसरे से परिचित होने के लिए बुलाई गई थी। समिति की आधिकारिक बैठक अगले महीने बुलाई जाएगी।

सीएम ने कहा, 'अकाल तख्त द्वारा गठित पैनल के साथ कानून के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए और आम सहमति बनाने की दिशा में काम करते हुए, कानून की भावना और मुख्य उद्देश्य से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।' मान ने कहा कि सरकार विशिष्ट प्रावधानों पर जताई गई चिंताओं की पूरी तरह से जांच करने को तैयार है, साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि कानून का निवारक स्वरूप (अपराध रोकने वाला असर) बना रहे। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरी तरह से नया कानून लाने के बजाय मौजूदा कानून में संशोधन करने का फैसला किया है, ताकि संशोधित कानून को मंज़ूरी के लिए गवर्नर के पास भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार के कोई फैसला लेने से पहले प्रस्तावित संशोधनों की कानूनी, संवैधानिक और अन्य संबंधित पहलुओं से जांच की जाएगी।

सात सदस्यों वाली कमेटी में ज्ञानी रघुबीर सिंह, दमदमी टकसाल के प्रतिनिधि बाबा साहिब सिंह, रामपुर खेड़ा के संत बाबा सेवा सिंह, जस्टिस जसपाल सिंह (रिटायर्ड), जस्टिस गुरबीर सिंह (रिटायर्ड), पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन जतिंदर सिंह औलख और एडवोकेट प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं। दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा मीटिंग में ऑनलाइन शामिल हुए।

यह बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि एसजीपीसी और अकाल तख्त ने संशोधित एक्ट के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। उम्मीद है कि एसजीपीसी की बनाई पांच सदस्यों वाली कमेटी बातचीत के दौरान अपनी चिंताएं और सुझाव रखेगी। कमेटी के सदस्य संत बाबा सेवा सिंह ने कहा कि यह कानून पुराने कानून को ध्यान में रखकर बनाया गया है और सभी प्रस्तावित संशोधनों की विस्तार से जांच की जाएगी।

Advertisement
×