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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की बड़ी चूक : आठवीं के विज्ञान पेपर से 15 अंकों के प्रश्न गायब

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से शुक्रवार को आयोजित कक्षा आठवीं की विज्ञान परीक्षा में गंभीर गड़बड़ी सामने आई। पंजाबी माध्यम के एक सेट में पांच पांच अंकों के तीन प्रश्न छपने से रह गए, जिससे 15 अंकों का...

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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से शुक्रवार को आयोजित कक्षा आठवीं की विज्ञान परीक्षा में गंभीर गड़बड़ी सामने आई। पंजाबी माध्यम के एक सेट में पांच पांच अंकों के तीन प्रश्न छपने से रह गए, जिससे 15 अंकों का हिस्सा छात्रों को दिखाई ही नहीं दिया। इस चूक ने राज्यभर के परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों में घबराहट और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी।

परीक्षा 80 अंकों की थी, जिसमें एक, दो और तीन अंकों के लघु प्रश्नों के साथ पांच अंकों के तीन प्रश्न शामिल थे। अमृतसर के एक परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी दे रहे एक पर्यवेक्षक ने बताया कि पंजाबी सेट में पांच अंकों के तीनों प्रश्न गायब थे। इसका अर्थ यह हुआ कि छात्रों को 15 अंकों के प्रश्न हल करने का अवसर ही नहीं मिला। छात्रों ने पूरा प्रश्नपत्र पढ़ने के बाद शिक्षकों को इस त्रुटि की जानकारी दी। कई केंद्रों से तुरंत बोर्ड को सूचित किया गया।

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देरी से मिला समाधान

बोर्ड ने मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्र अधीक्षकों और ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे अंग्रेजी या हिंदी सेट से गायब प्रश्नों का अनुवाद कर छात्रों को उपलब्ध कराएं। हालांकि यह निर्देश दोपहर एक से डेढ़ बजे के बीच पहुंचा, जबकि परीक्षा दो बजकर पंद्रह मिनट पर समाप्त होनी थी।

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जंडियाला गुरु के एक सरकारी स्कूल में तैनात विज्ञान अध्यापिका ने बताया कि अंग्रेजी सेट में भी वर्तनी और प्रिंटिंग की कई त्रुटियां थीं, जिससे छात्रों में भ्रम और बढ़ गया। कई विद्यार्थी तब तक उत्तर पुस्तिका जमा करने की तैयारी कर चुके थे, जब उन्हें ब्लैकबोर्ड पर लिखे गए प्रश्न हल करने के लिए कहा गया।

पूरा पेपर नहीं कर पाए छात्र

अमृतसर की छात्रा चांदनी ने बताया कि उनके केंद्र पर अधिकतर छात्रों को पंजाबी सेट मिला था। सभी को लगा कि केवल वस्तुनिष्ठ और छोटे उत्तर वाले प्रश्न ही हैं। परीक्षा समाप्त होने में करीब दस मिनट शेष रहते शिक्षकों ने अतिरिक्त प्रश्न लिखकर हल करने को कहा, लेकिन अधिकांश छात्र उन्हें पूरा नहीं कर सके।

मामले की जांच जारी : बोर्ड

बोर्ड के प्रवक्ता ने प्रिंटिंग त्रुटि स्वीकार करते हुए कहा कि सीलबंद पैकेट खुलने और प्रश्नपत्र वितरण से पहले ऐसी कमी का पता लगाना संभव नहीं होता। मामले की जांच की जा रही है। घटना के बाद बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय में इस प्रकार की लापरवाही गंभीर है और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। तरनतारन के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने मांग की है कि जिन विद्यार्थियों ने प्रश्न हल नहीं कर पाए, उन्हें ग्रेस अंक दिए जाएं। उनका कहना है कि 15 अंक काफी होते हैं और यह त्रुटि छात्रों के परिणाम को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

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