पंजाब में कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, लागू होगा 'नो वर्क, नो पे' नियम
कर्मचारियों ने हड़ताल को शुक्रवार तक जारी रखने का ऐलान किया है
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने आज विरोध कर रहे कर्मचारियों पर 'काम नहीं, तो वेतन नहीं' का नियम लागू करने का फैसला लिया। सरकार के साथ बातचीत विफल रहने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल को शुक्रवार तक जारी रखने का ऐलान किया है।
मंगलवार को पंजाब सरकार के कई दफ्तरों में कामकाज प्रभावित रहा। चंडीगढ़ और मोहाली स्थित सरकारी कार्यालयों में मिनिस्टीरियल स्टाफ ने पेन-डाउन हड़ताल की, जबकि जिलों में कर्मचारियों ने सामूहिक कैजुअल लीव लेकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि, बस सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं और स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र भी खुले रहे।
दफ्तरों के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन
चंडीगढ़ व मोहाली के सेक्रेटेरिएट, मिनी-सेक्रेटेरिएट और विभिन्न डायरेक्टरेट में कर्मचारियों ने काम करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यालयों के बाहर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई कर्मचारी विरोध के तौर पर रोष बैज लगाए नजर आए। कर्मचारियों का मुख्य विरोध 27 अगस्त को ली गई सामूहिक कैजुअल लीव को लेकर है।
उनका आरोप है कि सरकार ने उस दिन छुट्टी पर रहने वाले कर्मचारियों की गैरहाजिरी को 'अनधिकृत छुट्टी' करार दिया है। कर्मचारी इस आदेश को वापस लेने के साथ अपने नेता सुशील कुमार फौजी के तबादले को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कर्मचारियों की मांग है कि 27 अगस्त की सामूहिक छुट्टी को लेकर किसी भी कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी न किया जाए।
सरकार के साथ बैठक रही बेनतीजा
विरोध के बीच कर्मचारी संगठनों के नेताओं को आज दोपहर सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव के.के. यादव के साथ बैठक के लिए बुलाया गया। बैठक के बाद यूनियन नेताओं ने दावा किया कि सरकार की ओर से उनसे केवल हड़ताल वापस लेने को कहा गया, जबकि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर सरकार ने ठोस आश्वासन नहीं दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ कर्मचारियों ने एक दिन की भूख हड़ताल भी की। यह भूख हड़ताल मोहनजीत सिंह के समर्थन में की गई, जिन्हें कर्मचारियों के मुताबिक संगरूर के शेल्टन गांव में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान सरकार का विरोध करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

