Punjab Crop Loan Limit : फसली ऋण सीमा में 53 फीसदी बढ़ोतरी पर रोक के पंजाब सरकार के फैसले को किसानों ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
किसानों को लगा झटका, कोऑपरेटिव बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन ने मांगा वित्तीय पैकेज
Punjab Crop Loan Limit : पंजाब सरकार द्वारा फसली ऋण सीमा (स्केल ऑफ फाइनेंस) में की गई 53 प्रतिशत बढ़ोतरी के फैसले को स्थगित करने पर कोऑपरेटिव बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन (पंजाब) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। फेडरेशन का कहना है कि सरकार द्वारा सहकारी बैंकों को बिना कोई वित्तीय सहायता दिए इस फैसले को टालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे जहां किसानों को भारी निराशा हाथ लगी है, वहीं सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
7 साल से ऋण सीमा बढ़ने का इंतजार कर रहे थे किसान
फेडरेशन के महासचिव धीरज शर्मा और प्रधान नितिन कक्कड़ समेत कोर कमेटी द्वारा शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया कि किसानों के लिए ऋण सीमा पिछले सात वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। धान की ऋण सीमा 25,400 रुपये से बढ़ाकर 39,000 रुपये करने से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी। फेडरेशन नेताओं ने स्पष्ट किया कि कृषि ऋण सीमा बढ़ाना किसानों की पुरानी व जायज मांग थी। बैंक कर्मचारी हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा इस फैसले पर अचानक रोक लगाना कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा झटका है।
नाबार्ड की घटी सहायता से बैंकों पर बढ़ा वित्तीय बोझ
फेडरेशन के चेयरमैन महेश सांगड़ और वरिष्ठ उपप्रधान सुखविंदर सिंह ने बताया कि नाबार्ड से मिलने वाली वित्तीय सहायता भी 3,500 करोड़ रुपये से घटकर महज 1,100 करोड़ रुपये रह गई है। इस कारण बैंक किसानों की बढ़ी हुई मांग पूरी करने में असमर्थ हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों को बाजार से अधिक ब्याज दर पर पैसा उठाना पड़ रहा है, जबकि किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण देना होता है। इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार को बैंकों को पर्याप्त फंड उपलब्ध करवाना चाहिए।
सरकार तुरंत करे हस्तक्षेप
फेडरेशन के महासचिव धीरज शर्मा ने सरकार से मांग की है कि वह अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने की बजाय इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे। सहकारी बैंकों को एक विशेष वित्तीय पैकेज दिया जाए ताकि बैंक अन्नदाता की बेहतर ढंग से सेवा कर सकें और किसानों को बढ़ी हुई ऋण राशि का सुचारू रूप से लाभ मिल सके।
