Money Laundering Case : पर्ल ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी का शिकंजा और कसा, 10,021 करोड़ की 247 प्रॉपर्टीज अटैच
पंजाब के कई शहरों में छापामार कार्रवाई
Money Laundering Case : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय ने पीएसीएल (पर्ल ग्रुप) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10,021.46 करोड़ मूल्य की 247 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ये संपत्तियां पंजाब के एसएएस नगर, रूपनगर, जीरकपुर और मोहाली में स्थित हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, मैसर्ज पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं ने एक अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए देशभर के लाखों निवेशकों से करीब 48 हजार करोड़ की भारी रकम जुटाई। निवेशकों को कृषि भूमि बेचने और विकसित करने का झांसा देकर ‘कैश डाउन पेमेंट’ और ‘किस्त योजना’ के तहत पैसे लिए गए।
आरोप है कि निवेशकों से एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए, लेकिन अधिकांश मामलों में जमीन कभी सौंपी ही नहीं गई। आज भी लगभग 48 हजार करोड़ निवेशकों को वापस नहीं मिल पाए हैं। यह जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर (आरसीबीडी1/2014/ई/0004) के आधार पर शुरू हुई थी, जो 19 फरवरी 2014 को दर्ज की गई थी।
यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B और 420 के तहत सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 33 आरोपियों के खिलाफ अवैध निवेश योजना चलाने के आरोप लगाए थे। इनमें निजी व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं।
जस्टिस लोढ़ा कमेटी का हो चुका गठन
2 फरवरी, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को निर्देश दिया था कि वह पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करे। इस कमेटी को पीएसीएल द्वारा खरीदी गई जमीनों को बेचकर निवेशकों को भुगतान करने का दायित्व सौंपा गया था। हालांकि, आगे की जांच में सामने आया कि पीएसीएल की संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने और हड़पने की कोशिशें जारी थीं।
तीन और एफआईआर, कई राज्यों में छापे
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो, जयपुर के जवाहर सर्किल थाना और बेंगलुरु के अटिबेले थाना में तीन अतिरिक्त एफआईआर दर्ज की गईं। इन मामलों में जमीन की अवैध बिक्री, अतिक्रमण और निवेशकों के पैसों से खरीदी गई संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप हैं। छापेमारी के दौरान खाली साइन किए गए सेल डीड, हस्ताक्षरित चेक बुक और पहचान पत्र जैसे कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए, जो मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति हस्तांतरण के संगठित प्रयासों की ओर इशारा करते हैं।
2018 से अब तक चार प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट
ईडी ने 2016 में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करने के बाद 2018 में पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की। इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में तीन सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दायर की गईं। विशेष पीएमएलए अदालत इन सभी शिकायतों पर संज्ञान ले चुकी है।
अब तक 17,610 करोड़ की संपत्ति अटैच
ताजा कार्रवाई के साथ ईडी अब तक कुल 17 हजार 610 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां अटैच कर चुकी है, जिनमें देश और विदेश में स्थित संपत्तियां शामिल हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में और बड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

