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Hawara Parole: पंजाब के राज्यपाल ने मानवीय आधार पर हवारा को पैरोल देने की सिफारिश की

Hawara Parole: पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की सिफारिश की है, ताकि वह...

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पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ।-फाइल फोटो।
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Hawara Parole: पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की सिफारिश की है, ताकि वह अपनी बीमार मां से मिल सके।

कटारिया का यह बयान मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा हवारा को पैरोल दिलाने के लिए उनसे हस्तक्षेप की मांग करने के एक दिन बाद आया है। राज्यपाल ने यहां 'हर घर तिरंगा-वॉकथॉन' के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ''उसकी (हवारा) मां बीमार है। हमने मानवीय आधार उसके मामले में सिफारिश की है।''

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मान ने बुधवार को मानवीय आधार पर हवारा की पैरोल का समर्थन करते हुए कहा कि उसकी बीमार मां को 31 साल बाद अपने बेटे से मिलने की 'नयी उम्मीद' जगी है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कटारिया चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह इस मामले को केंद्रीय गृह सचिव के सामने उठाएंगे।

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मान ने इससे पहले कटारिया को पत्र लिखकर मानवीय आधार पर हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी मानवीय आधार पर पैरोल की अर्जी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हवारा की बुज़ुर्ग और बीमार मां को अपने बेटे के कृत्यों की सज़ा नहीं मिलनी चाहिए।

बिट्टू, बेअंत सिंह के पोते हैं जिनकी हत्या के मामले में हवारा को दोषी करार दिया गया है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पिछले महीने दिल्ली की मंडोली जेल  के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चंडीगढ़ प्रशासन की सिफारिशें लेने के बाद हवारा की पैरोल अर्जी पर एक तय समय-सीमा के भीतर फ़ैसला लें।

हवारा को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। वह 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस हमले में बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।

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