गवर्नर ने पूछा बिजनेस बताओ, सीएम बोले-औपचारिकता निभाएं, मंज़ूरी ज़रूरी नहीं : The Dainik Tribune

गवर्नर ने पूछा बिजनेस बताओ, सीएम बोले-औपचारिकता निभाएं, मंज़ूरी ज़रूरी नहीं

सत्र आयोजन पर पंजाब के राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने

गवर्नर ने पूछा बिजनेस बताओ, सीएम बोले-औपचारिकता निभाएं, मंज़ूरी ज़रूरी नहीं

चंडीगढ़, 24 सितंबर (ट्रिन्यू)

पंजाब सरकार द्वारा 27 सितंबर को बुलाए गए विधानसभा सत्र पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित द्वारा सत्र बुलाए जाने का कारण पूछने के बाद आप सरकार तथा संगठन के नेता एकजुट हो गए हैं। शनिवार को इस मुद्दे पर दिन भर बयानबाजी का दौर चलता रहा। मुख्यमंत्री के बयान पर राज्यपाल ने भी उन्हें कानून का पाठ पढ़ा दिया। इस खींचतान में सत्र के आयोजन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

27 के सत्र पर खींचतान

पंजाब सरकार ने विश्वास मत साबित करने के लिए 22 सितंबर को एक दिवसीय सत्र बुलाया था। जिस पर राज्यपाल ने रोक लगा दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर 27 सितंबर को विधानसभा सत्र बुलाने का ऐलान किया था। पंजाब सरकार ने शुक्रवार को सत्र के आयोजन को लेकर राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को एक पत्र भेजा। जिस पर राज्यपाल ने देर रात पूछा कि सत्र के लिए बिजनेस क्या है। इस प्रतिक्रम के बाद भड़के मुख्यमंत्री मान ने कहा कि अब हद हो चुकी है।

सरकार को सदन चलाने के लिए राज्यपाल की स्वीकृति की जरूरत नहीं है। यह महज औपचारिकता है। शनिवार को आप नेताओं की बयानबाजी शुरू हो गई। इस बीच पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब विधानसभा का स्पेशल सेशन रद्द किए जाने के बाद भगवंत मान को संविधान का पाठ पढ़ाया है। जिसमें उन्हें बताया गया कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री का काम क्या होता है। सीएम यह समझ सकें कि स्पेशल सेशन रद्द क्यों किया गया और संविधान के अनुसार सेशन बुलाने की सही प्रक्रिया क्या होती है।

‘भाजपा के इशारे पर काम कर रहे राज्यपाल’

पंजाब सरकार तथा राज्यपाल के बीच छिड़े विवाद को पंजाब के उर्जा मंत्री अमन अरोड़ा ने दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया है। शनिवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमन अरोड़ा ने राज्यपाल पर ऑपरेशन लोट्स को लागू करने के लिए भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। अरोड़ा ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में किसी भी राष्ट्रपति या गवर्नर ने सेशन बुलाने से पूर्व विधायी कार्यों की सूची नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल स्पष्ट रूप से भाजपा और कांग्रेस के साथ मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करके सरकार को काम करने से रोक रहे हैं। अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली में भाजपा के एलजी आप सरकार को काम करने से रोक रहे थे। अब पंजाब में यही काम राज्यपाल को सौंपा गया है।

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