bathinda mein kisan mela : पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की ओर से शुक्रवार को बठिंडा के रीजनल रिसर्च सेंटर में रबी (हाड़ी) की फसलों के लिए किसान मेला आयोजित किया गया है। इस बार मेले में शुगर (डायबिटीज) से पीड़ित मरीजों को ध्यान में रखकर तैयार की गई विशेष शुगर-फ्री गेहूं की किस्म को प्रदर्शित किया गया है, जो काफी चर्चा में रही। मेले में किसानों को पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। विभिन्न कृषि विभागों और निजी कंपनियों द्वारा आधुनिक खेती, पानी की बचत करने वाली तकनीकों और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनियां लगाई गईं। डायबिटीज से पीड़ित लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए, गेहूं की एक शुगर-फ्री किस्म भी बनाई गई है। बठिंडा में कृषि विभाग की तरफ से लगाए गए किसान मेले में कई किसानों ने हिस्सा लिया। मेले में कई किसान अपनी फसल और उससे बने खास उत्पाद बेचते दिखे। लोगों ने इन चीजों को खूब पसंद किया और जैविक (ऑर्गेनिक) भोजन के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। कृषि मंत्री ने दिया किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोरमेले के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ-साथ उससे जुड़े काम अपनाने पर भी जोर दिया। खुडियां ने कहा कि किसानों को अपनी इनकम बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग के साथ-साथ खुद मार्केटिंग के क्षेत्र में भी आना होगा। उन्होंने पंजाब के किसानों से अपील की कि वे गेहूं और धान के साथ-साथ कपास जैसी फसलें भी बोएं। देश के अनाज में पंजाब के योगदान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य देश के कुल धान का लगभग 40 परसेंट और गेहूं का 25 परसेंट सेंट्रल पूल में देता है। यह कामयाबी पंजाब के किसानों की मेहनत और साइंटिस्ट्स की रिसर्च की वजह से ही मुमकिन हो पाई है। किसानों को सहायक धंधों को बढ़ावा देने के लिए महिला किसानों और युवाओं द्वारा घर पर बने उत्पाद जैसे अचार, मुरब्बा, जैविक शहद और गुड़ बेचने के लिए भी विशेष स्टॉल लगाए गए। मेले में कई कंपनियों और विभागों ने किसानों को जानकारी देने के लिए स्टॉल लगाए। किसानों का मानना था कि उत्पादन के साथ-साथ खुद मार्केटिंग करने से बेहतर फायदा हुआ।इस अवसर पर पीएयू के वाइस चांसलर सुखजीत पाल सिंह, विधायक जगरूप सिंह गिल, मोहन सिंह जाखड़, मेंबर मैनेजमेंट बोर्ड पीएयू, डायरेक्टर रिसर्च डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट, डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर, एडिशनल डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन डॉ. तरसेम सिंह ढिल्लों, यूनिवर्सिटी के सीनियर अधिकारी और अलग-अलग डिपार्टमेंट के मुखी भी स्टेज पर मौजूद थे।