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साहित्य सभा माछीवाड़ा में ग़ज़ल विधा पर विमर्श

“अंदर मेरे कोई नित पूछता मुझसे/ कुछ तो है विपरीत मेरे चल रहा जो साथ-साथ”

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साहित्य सभा माच्छीवाड़ा की मासिक बैठक में उपस्थित लेखक। -निस
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प्रसिद्ध ग़ज़लगो एस. नसीम की अध्यक्षता में माच्छीवाड़ा में आयोजित साहित्य सभा माछीवाड़ा की मासिक बैठक में जहाँ रचनाओं का दौर चला, वहीं विशेष रूप से ग़ज़ल विधा पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ। उपस्थित लेखकों द्वारा प्रस्तुत ग़ज़लों पर एस. नसीम, निरंजन सूखम, बलजिंदर सिंह माछीवाड़ा और हरनाम सिंह डल्ला ने अपने विचार रखे। एस.नसीम ने ग़ज़ल विधा पर बोलते हुए कहा कि ग़ज़ल के दो प्रमुख स्कूल—‘दिल्ली’ और ‘लखनऊ’—माने जाते हैं। ग़ज़ल शायरी की दो प्रकार की अभिव्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करती है, जिनमें ‘ख़ारिज़ियात’ महबूब के नख़-शिख (बाहरी सौंदर्य) का वर्णन करती है, जबकि ‘दाख़िलियात’ महबूब के आंतरिक गुणों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ग़ज़ल में बहु-परतीय भाव निहित होते हैं, जिन्हें गहराई से समझने की आवश्यकता है।

गीत विधा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्यिक गीतों और आम गीतों की गहराई को समझना ज़रूरी है। गीतकार को गीत की सूक्ष्मताओं को समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के प्रति चिंतित होना एक लेखक का कर्तव्य है। रचनाओं के दौर में एस. नसीम, निरंजन सूखम और बलजिंदर सिंह ने अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत कर उपस्थित लेखकों से खूब वाहवाही लूटी। एस. नसीम ने ग़ज़ल— “बड़ा कुछ और भी था इसमें पछताने से पहले/ ज़रा अगर सोच लेते ज़िंदगी ठुकराने से पहले” प्रस्तुत की।

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इसी तरह बलजिंदर सिंह ने—“अंदर मेरे कोई नित पूछता मुझसे/ कुछ तो है विपरीत मेरे चल रहा जो साथ-साथ” और निरंजन सूखम ने—“इरादे के बहाव आगे बला हर ढह जाती है” शीर्षक ग़ज़ल सुनाई। ग़ज़लगो हरनाम सिंह डल्ला ने—“बहुत ही ढूंढे हैं बंदे सिदक परखने वास्ते” ग़ज़ल प्रस्तुत की। प्रस्तुत ग़ज़लों पर ग़ज़लगो नसीम, सूखम, बलजिंदर, डल्ला और मलकीयत सिंह सहित अन्य लेखकों ने अपने विचार साझा किए। इसी क्रम में नवदीप ने कविता और गीत, नछत्तर सिंह गिल ने समकालीन पंजाब के हालात पर कविता, जबकि कश्मीर सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्म पर “नूर ख़ुदा का परगटिया होई पटने विच रौशनाई” कविता सुनाई। लेखक एवं इतिहासकार रघबीर सिंह भरत ने नवाब कपूर सिंह के जीवन पर प्रकाश डालता एक शोध-पत्र पढ़कर सुनाया। डॉ. अमरजीत सहगल ने बैठक में विशेष रूप से शिरकत की। प्रस्तुत रचनाओं पर सार्थक और रचनात्मक बहस हुई। इससे पहले सभा के अध्यक्ष एस. नसीम ने आए हुए लेखकों का स्वागत किया। मंच संचालन सभा के सचिव प्रिंसिपल निरंजन सूखम ने कुशलता से किया।

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