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Kidney Stone Surgery : 16 एमएम पथरी के ऑपरेशन के बाद भी शरीर में छोड़ी 9.7 एमएम की पथरी, मरीज ने लगाई सीएम से गुहार

डबवाली के राज अस्पताल के डॉक्टर पर लगे फीस ऐंठने और अभद्रता के आरोप, डॉक्टर ने नकारे सभी आरोप

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Kidney Stone Surgery : मंडी किलियांवाली की बादल कॉलोनी स्थित राज अस्पताल पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं। डबवाली के एक मरीज का दावा है कि 16 एमएम की गुर्दे की पथरी के ऑपरेशन के बाद भी डॉक्टर ने उनके शरीर में 9.7 एमएम की पथरी छोड़ दी। पीड़ित ने पंजाब के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य सेवा निदेशक और श्री मुक्तसर साहिब के उपायुक्त को शिकायत भेजकर न्याय व कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई है। शिकायत में अस्पताल संचालक डॉ. मुकेश गोयल पर 85 हजार रुपये वसूलने, बिल के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगने और दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है।

दर्द न रुकने पर सीटी स्कैन में हुआ खुलासा

पीड़ित मरीज
पीड़ित मरीज घनश्याम दास

डबवाली के वार्ड नंबर 11 निवासी घनश्याम दास के अनुसार, गुर्दे में 16 एमएम की पथरी के इलाज के लिए उन्होंने 1 अप्रैल, 2026 को राज अस्पताल में सर्जरी करवाई थी। आरोप है कि डॉक्टर ने ऑपरेशन और दवाइयों के कुल 85 हजार रुपये नकद लिए और कुछ टुकड़े दिखाकर दावा किया कि पथरी पूरी तरह निकाल दी गई है। छुट्टी मिलने के बाद भी दर्द कम नहीं हुआ और अस्पताल से उन्हें केवल दर्द निवारक दवाइयां दी जाती रहीं। परेशान होकर मरीज ने 23 मई, 2026 को लुधियाना के एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से सीटी स्कैन करवाया। इसकी रिपोर्ट में 9.7 एमएम × 7.2 एमएम की पथरी पेशाब की नली के अंतिम हिस्से में फंसी पाई गई, जिसके कारण दाहिने गुर्दे में हल्की सूजन आने का भी जिक्र है।

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डॉक्टर ने दी सफाई, कहा- बदनाम करने की साजिश

पीड़ित का आरोप है कि रिपोर्ट लेकर जाने पर डॉ. मुकेश गोयल ने मेडिकल कागजात फेंक दिए और दोबारा ऑपरेशन के लिए फिर से पूरी फीस मांगी। इलाज का पक्का बिल मांगने पर डॉक्टर व महिला स्टाफ ने 9 हजार रुपये अतिरिक्त जमा करवाने को कहा। दूसरी ओर, डॉ. मुकेश गोयल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अस्पताल को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।

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उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के 85 हजार नहीं, बल्कि सिर्फ 30 हजार रुपये फीस ली गई थी। डॉक्टर के अनुसार, मूत्र नली खराब होने के कारण कुछ बारीक कण अंदर रहने की आशंका ऑपरेशन के समय ही जता दी गई थी। उनका दावा है कि वे मुफ्त में दोबारा इलाज करने को तैयार थे, लेकिन मरीज के परिजनों ने उन पर फर्जी बिल बनाने का दबाव बनाया और मना करने पर फोन पर बदसलूकी की। बिल के लिए 9 हजार रुपये की मांग पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं था, बल्कि डिस्काउंट की राशि थी जिसे पूरा बिल बनाने के लिए वापस मांगा गया था।

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