संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन... चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पंजाब सरकार ने उठाए सवाल, राष्ट्रपति-PM से की ये अपील; कैबिनेट में पास हुआ प्रस्ताव
चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पंजाब कैबिनेट का बड़ा ऐतराज
Punjab Cabinet : पंजाब कैबिनेट ने रविवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए एक प्रस्ताव पास किया। कैबिनेट ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पंजाब के गवर्नर से अपील की है कि नए चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्त जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को तब तक पद की शपथ न दिलाई जाए, जब तक राज्य सरकार अपनी सहमति न दे दे।
पंजाब सरकार ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार राज्य से जुड़े मामलों पर एकतरफ़ा फ़ैसले लेकर "पंजाब के साथ अन्याय" कर रही है। कैबिनेट के प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य के संवैधानिक और प्रशासनिक हितों से जुड़े मामलों पर राज्य सरकार से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "केंद्र सरकार पंजाब के अधिकारों से इनकार करती रही है। राज्य सरकार के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वसम्मति से एक अहम प्रस्ताव पास किया गया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति बिना सहमति लिए और तय प्रक्रियाओं का पालन किए बिना की गई है। यह 'मेमोरेंडम ऑफ़ प्रोसीजर' और संवैधानिक नियमों का सीधा उल्लंघन है।"
मान ने कहा कि केंद्र ने RDF फंड के तौर पर 9,000 करोड़ रुपये रोक रखे हैं; केंद्र से बाढ़ राहत नहीं मिली है, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के नियम बदल दिए गए हैं और अब जजों की नियुक्ति में सीधे दखल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, "इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम मांग करते हैं कि नियुक्ति तुरंत रोकी जाए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की जाए।"
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति की पुष्टि करने वाले नोटिफिकेशन के बाद कैबिनेट की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई। जस्टिस मिश्रा पिछले कुछ महीनों से हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे।
यह मीटिंग वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। चूंकि ज़्यादातर मंत्री चंडीगढ़ में नहीं थे, इसलिए उनसे कहा गया कि वे अपने-अपने जिलों में डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस से मीटिंग में शामिल हों। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा, "चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए अलग-अलग चिट्ठियों में बताई गई सभी प्रक्रियाओं को उनकी नियुक्ति के नोटिफिकेशन के समय नज़रअंदाज़ किया गया। बीजेपी पंजाब में अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए संविधान को नजरअंदाज कर रही है।"
पिछले महीने जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने DA (महंगाई भत्ता) मामले में फ़ैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार को अपने कर्मचारियों का बकाया DA जारी करने का निर्देश दिया था। इस फैसले से आर्थिक तंगी से जूझ रहे राज्य पर 14,100 करोड़ रुपए का बोझ पड़ा है और सरकारी कर्मचारियों ने जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
पंजाब सरकार ने जस्टिस मिश्रा को रेगुलर चीफ जस्टिस बनाने के लिए अपनी मंजूरी नहीं दी थी। इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जस्टिस मिश्रा को रेगुलर चीफ़ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश के बाद, 9 अगस्त को AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि वरिष्ठता को नजरअंदाज किया जा रहा है।

