वृंदावन में नाव हादस : जगरांव में एक साथ जली पांच चिताएं, सीएम मान ने बंधाया ढांढस
बठिंडा में शनिवार शाम ‘द ट्रिब्यून पंजाब अचीवर्स अवार्ड-2026’ में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्योग और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वालों को सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और...
बठिंडा में शनिवार शाम ‘द ट्रिब्यून पंजाब अचीवर्स अवार्ड-2026’ में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्योग और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वालों को सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और गेस्ट ऑफ ऑनर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा थे। ‘द ट्रिब्यून’ की प्रधान संपादक ज्योति मल्होत्रा, महाप्रबंधक अमित शर्मा, दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल और पंजाबी ट्रिब्यून की संपादक अरविंदर पाल कौर जौहल भी इस मौके पर
उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य प्रायोजक ‘आदेश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, बठिंडा’ ने अहम भूमिका निभाई। सह-प्रायोजक ‘महंत गुरबंता दास मेमोरियल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स बठिंडा’ ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उपहार साझेदार ‘अल-बसीर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज’ रही।
कार्यक्रम को ‘मंडेर ब्रदर्स’ की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति ने और भी खास बना दिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे माहौल में उत्सव जैसा उत्साह भर दिया।
मुख्य अतिथि हरपाल सिंह चीमा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, ‘द ट्रिब्यून समूह लंबे समय से लोगों की आवाज़ बना हुआ है। इसने कभी भी किसी मुद्दे से मुंह नहीं मोड़ा, बल्कि कई मामलों को बड़े ही ज़ोरदार तरीके से उठाया है। ‘द ट्रिब्यून’ के पाठकों की संख्या बहुत बड़ी है। मैंने पहली बार यह अखबार तब खरीदा था, जब मैं पांचवीं कक्षा में पढ़ता था।... अगर आप दुनिया से जुड़े रहना चाहते हैं तो अखबार पढ़ना बहुत जरूरी है। यह आपको बताता है कि दुनिया में क्या चल रहा है और कभी-कभी सरकार के सामने मुद्दों को उठाने में भी मदद करता है। इस पहल को शुरू करके ‘द ट्रिब्यून’ समूह ने वाकई सराहनीय काम किया है।’
अमन अरोड़ा ने कहा, ‘द ट्रिब्यून ने एक पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से उपलब्धि हासिल करने वालों का चयन किया है। द ट्रिब्यून को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। डेढ़ दशक से भी अधिक समय से इस समूह ने खुद को इतनी मजबूती से स्थापित किया है कि इसका नाम ही काफी है। इसने हर उतार-चढ़ाव में काम किया है और यह स्वतंत्रता संग्राम, विभाजन, उग्रवाद और हरित क्रांति का साक्षी रहा है। इन सबके बीच, पत्रकारिता एक कठिन पेशा बन गई है। हम राजनेता अकसर सोचते हैं कि अखबारों को हमारी मर्जी के अनुसार लिखना चाहिए। हालांकि, द ट्रिब्यून ने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखी है और यह इसकी बहुत बड़ी उपलब्धि है। मैं इसे सलाम करता हूं। जिस दिन हम यह अखबार नहीं पढ़ते, वह दिन अधूरा सा लगता है।’ उन्होंने कहा कि ‘द ट्रिब्यून’ ने कभी भी सनसनीखेज खबरों का सहारा नहीं लिया है। जब हमें विपक्ष में रहते हुए विधानसभा में मुद्दे उठाने होते थे, तो हम ‘द ट्रिब्यून’ की रिपोर्टों पर ही भरोसा करते थे। यदि कोई खबर ‘द ट्रिब्यून’ में छपती है तो वह अपने आप में एक प्रमाण होती है। मैं मालवा क्षेत्र में इस कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए ‘द ट्रिब्यून’ समूह को बधाई देता हूं।’
अपने धन्यवाद ज्ञापन में, ‘द ट्रिब्यून’ के महाप्रबंधक अमित शर्मा ने इस पहल के पीछे की सोच पर जोर देते हुए कहा, ‘द ट्रिब्यून हमेशा से विश्वसनीयता और उत्कृष्टता के लिए खड़ा रहा है। इन पुरस्कारों के माध्यम से हमारा उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है, जो बदलाव ला रहे हैं, नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं और समाज में सार्थक योगदान दे रहे हैं।’

