Punjab Power Tariff : पंजाब में बिजली हुई सस्ती, चुनाव से पहले जनता को बड़ी राहत, 1.50 रुपये प्रति यूनिट तक घटी दरें
अप्रैल से लागू होगा नया टैरिफ ऑर्डर, उपभोक्ताओं को मिलेगा 7,851 करोड़ का सीधा फायदा
Punjab Power Tariff : पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच राज्य सरकार ने आम आदमी की जेब को बड़ी राहत दी है। पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग (PSERC) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दरों का ऐलान कर दिया है। नए टैरिफ ऑर्डर के मुताबिक, राज्य के सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में 50 पैसे से लेकर 1.50 रुपये प्रति यूनिट तक की भारी कटौती की गई है। चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले लिया गया यह फैसला प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था, दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
चुनावी साल में 'पावर' मास्टरस्ट्रोक
राज्य में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बिजली की दरों में कमी करना सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। आयोग द्वारा घोषित यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। इस ऐतिहासिक कटौती से पंजाब के करोड़ों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को कुल 7,851.91 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी। जानकारों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बिजली बिलों में कमी आने से आम जनता को बड़ी राहत महसूस होगी।
बिजली आपूर्ति की लागत में आई बड़ी गिरावट
बिजली की दरों में इस कटौती का आधार तकनीकी सुधारों और बिजली आपूर्ति की लागत में आई कमी को बताया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बिजली आपूर्ति की औसत लागत (Average Cost of Supply) पहले 7.15 रुपये प्रति किलोवाट घंटा (kWh) थी, जो अब घटकर 6.15 रुपये प्रति किलोवाट घंटा रह गई है।
टैरिफ ऑर्डर के मुख्य बिंदु :
- बड़ी कटौती : सभी श्रेणियों के लिए 50 पैसे से 1.50 रुपये प्रति यूनिट तक के दाम घटे।
- सरकार को फायदा : दरें कम होने से पंजाब सरकार पर बिजली सब्सिडी का आर्थिक बोझ भी कम होगा।
- बचत का आंकड़ा : उपभोक्ताओं की जेब में वापस जाएंगे करीब 7,851 करोड़ रुपये।
आम आदमी और उद्योगों को बराबर लाभ
नियामक आयोग का यह फैसला न केवल मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उद्योगों के लिए भी संजीवनी का काम करेगा। दरें कम होने से उत्पादन लागत घटेगी, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दल इस बड़ी घोषणा का मुकाबला किन चुनावी वादों के साथ करते हैं।

