एडवांस स्टेज कैंसर मरीजों का अब सर्जरी से इलाज : The Dainik Tribune

एडवांस स्टेज कैंसर मरीजों का अब सर्जरी से इलाज

पीजीआई चंडीगढ़ की सुपर स्पेशलिस्ट टीम ने संभाला जिम्मा

एडवांस स्टेज कैंसर मरीजों का अब सर्जरी से इलाज

विवेक शर्मा/ट्रिन्यू

चंडीगढ़, 24 नवंबर

पहले कैंसर के एडवांस स्टेज-4 के मरीजों को केवल दवाई ही दी जाती थी, लेकिन पीजीआई चंडीगढ़ में इन मरीजों की सर्जरी शुरू हो चुकी है। देशभर में पीजीआई चंडीगढ़ इसे लीड कर रहा है। पेनक्रियाज कैंसर, लिवर कैंसर और गॉल ब्‍लैडर कैंसर के मरीजों को ठीक करने का जिम्मा पीजीआई चंडीगढ़ के सुपर स्पेशलिस्ट टीम ने संभाल रखा है। टीम में सर्जरी, गेस्ट्रोलॉजी, कीमोथेरेपी, मेडिसन, न्यूकिलर मेडिसन, रेडियोलॉजी समेत कई विभाग शामिल हैं, जो कदम से कदम मिलाकर कैंसर के मरीजों को ठीक करने में जुटे हैं। इन कैंसर के मरीजों का हेपाटो-पैनक्रियाटो सर्जरी द्वारा इलाज किया जा रहा है। इसके लिए हाइपेक इक्यूपमेंट मशीन का सहारा लिया जा रहा है। देशभर में ऐसी दो या तीन ही मशीनें हैं।

पीजीआई चंडीगढ़ में गॉल ब्‍लैडर कैंसर और पेनक्रियाज कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इस समय पीजीआई में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली और बिहार के मरीज कैंसर का इलाज कराने पहुंच रहे हैं।

रेफरल सिस्टम से बढ़ा दबाव : प्रो. राजेश गुप्ता ने बताया कि उत्तर भारत में कैंसर के एडवांस स्टेज-4 का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। दूसरे प्रदेशों से यहां मरीज रेफर हो आते हैं। इसी वजह से यहां के डॉक्टरों पर ज्यादा दबाव हैं, लेकिन पूरी टीम मिलकर ऐसे मरीजों की सर्जरी कर रही है। अभी तक टीम लिवर के 15, पेनक्रियाज कैंसर के 100 और गॉल ब्‍लैडर कैंसर के 70-80 मरीजों की सर्जरी कर चुकी है।

पंजाब के मालवा क्षेत्र के लोग ज्यादा चपेट में

पीजीआई के सर्जरी एवं गेस्ट्रो के विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश गुप्ता और डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि उत्तर भारत में लोग गॉल ब्लैडर कैंसर और पेनक्रियाज कैंसर से ज्यादा ग्रसित हैं। एक लाख लोगों में से 10 से 11 लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। पीजीआई में पंजाब के मालवा क्षेत्र के सबसे ज्यादा लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसका कारण खानपान है। मोटापे और डायबिटीज के मरीजों को कैंसर होने का ज्यादा खतरा रहता है। यह अनुवांशिक भी हो सकता है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, जो सामने नहीं आए हैं।

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