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77th Republic Day : निस्वार्थ भावना का अनूठा संगम, पंजाब की झांकी में गुरु तेग बहादुर की शहादत को किया गया याद

अगले भाग में घूमते हुए स्वरूप में 'इक ओंकार' (ईश्वर एक है) को दिखाया गया

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गणतंत्र दिवस परेड में सोमवार को पंजाब की झांकी नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर को समर्पित थी, जिसमें उनकी शहादत के 350वें साल को याद किया गया। साथ ही इंसानी जमीर, आस्था और आजादी के रक्षक माने जाने वाले गुरु को श्रद्धांजलि दी गई।

कर्तव्य पथ पर पंजाब की झांकी ने आध्यात्मिकता और मानवता, करुणा तथा धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए बलिदान की निस्वार्थ भावना का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। झांकी दो हिस्सों में थी जिसके अगले भाग में 'हाथ' का प्रतीक दर्शाया गया था जो आध्यात्मिक आभा के साथ मानवीय और करुणामय दृष्टिकोण को दर्शाता है। अगले भाग में घूमते हुए स्वरूप में 'इक ओंकार' (ईश्वर एक है) को दिखाया गया।

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साथ ही 'हिंद दी चादर' अंकित कपड़े का टुकड़ा भी दर्शाया गया, जो अत्याचार के पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करने का प्रतीक है। झांकी के पिछले हिस्से में 'शबद कीर्तन' की झलक मिली, जिसकी पृष्ठभूमि में 'खंडा साहिब' का स्मारक था, जो पूरे परिवेश को आध्यात्मिक रंग प्रदान कर रहा था। झांकी के पिछले हिस्से के एक ओर गुरुद्वारा श्री शीश गंज साहिब का चित्रण था, जो नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के शहादत स्थल के रूप में जाना जाता है।

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