आपकी राय

आपकी राय Other

Oct 31, 2020

हकीकत से साक्षात्कार

28 अक्तूबर के ‘दैनिक ट्रिब्यून’ में प्रकाशित राजकुमार सिंह का ‘सुशासन बाबू को शीर्षासन कराती भाजपा’ लेख राजनीति के स्याह पक्ष का खुलासा करने वाला रहा। लेख राजनेताओं की कथनी और करनी की हकीकत से भी पर्दा उठाता है। कहने को तो भाजपा फिर चुनाव में दोहरा खेल खेल रही है, लेकिन कुल्हाड़ी उसके पैर पर भी चल सकती है, जिसका फायदा महागठबंधन को मिल सकता है। लेखक ने बेबाक लेख के जरिये बिहार की राजनीति के एक सच से साक्षात्कार कराया है। समय के सवालों से मंथन करते लेख के लिए साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

सब जुटें

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली वायु प्रदूषण की चपेट में है। देश में जिस रफ्तार से प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है, उसके लिए सख्त नीति गंभीरता से लागू करने की जरूरत है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण के लिए सत्ताधारियों, राजनेताओं और आम लोगों को अपनी सेहत की परवाह करते हुए, इसके लिए नि:स्वार्थ भाव से काम करना होगा।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

ट्रंप की राह

25 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में पुष्परंजन का लेख ‘आसान नहीं रही ट्रंप की राह’ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सोच का राजनीतिक धरातल पर खुलासा करने वाला रहा। अमेरिका में रहने वाले भारतवासियों को आगामी चुनावों में वोट देने से पूर्व भारत की महानता का हिसाब चुकता अवश्य करना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

बेटियों की सुरक्षा

आये दिन देश की बेटियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं आम हो गई हैं। आखिर बेटियां कब सुरक्षित होंगी? बेशक समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच आई है, लेकिन बेटियों के प्रति बढ़ते अपराध ने उनके मनोबल को थोड़ा कम किया है। बेटियों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।

संदीप कुमार, चंडीगढ़

बिहार में आंख-मिचौली Other

Oct 30, 2020

28 अक्तूबर को दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘सुशासन...’ लेख ने दर्शाया की राजग और महागठबंधन के बीच बिहार में रणनीति की जो बिसात बिछी हुई है उसमें नये नवेले चिराग़ ने पूरी चौपड़ पर स्याही-सी बिखेर दी है। नीतीश कहां टिकेंगे और चिराग़ किस पासे की उलटफेर में आत्मविश्वास के साथ दांव चल रहे हैं, इसका रहस्य गहराता जा रहा है। सुशासन को तीन बातों का सामना करना पड़ेगा। पहली विरोधी लहर, दूसरी कोरोना से पैदा हुई अस्तव्यस्तता और तीसरी भाजपा की गूढ़नीति के साथ-साथ चिराग़ की आंख-मिचौली। लेख के अन्त में नीतीश के लिये दो बातें कही गयी हैं कि चुनाव परिणामों के बाद या तो वह दिल्ली की शीर्ष सत्ता की तरफ़ रुख़ करेंगे अथवा महागठबंधन के दरवाज़े पर दस्तक देंगे। हवा में उनके दिल्ली जाने की बातें तो पहले से ही तैर रही हैं।

मीरा गौतम, जीरकपुर

प्रदूषण संकट

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 114 शहरों में धारूहेड़ा के बाद फरीदाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में सूचीबद्ध है। वैसे फरीदाबाद प्रशासन द्वारा प्रदूषण के मद्देनजर दशहरा पर्व पर रावण के पुतले दहन का कार्यक्रम रद्द करना वातावरण के शुद्धीकरण में बड़ा योगदान दे गया है। हवा के शुद्धीकरण के लिए पौधरोपण को बढ़ाना, वाहनों से धुआं उत्सर्जन रोकने के नियमों को कड़ा बनाना समय की मांग है। इसके अतिरिक्त औद्योगिक प्रतिष्ठानों से नियमों का पालन करवाना जरूरी है, ताकि जहरीली गैसों के उत्सर्जन को काबू में रखा जा सके।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

सामरिक मजबूती

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच आयोजित वार्ता से संबंधों में और मजबूती आएगी। अमेरिका ने ड्रोन के सौदे की पेशकश की है। अमेरिका और भारत ने अंतिम संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें आधुनिक तकनीक का आदान-प्रदान और सहयोग शामिल है। चीन के साथ तनावभरे माहौल में दोनों देशों के बीच सहयोग एक सकारात्मक पक्ष है।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदरनगर

आपकी राय Other

Oct 29, 2020

भूख के सवाल

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हर साल भूख की वजह से 90 लाख लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे में उन लोगों को शर्म आनी चाहिए जो भोजन की बर्बादी करते हैं। रिसर्च में पता चला है कि भारत के गांवों में 63 प्रतिशत लोग ऐसे भी हंै जो पौष्टिक भोजन खरीद ही नहीं सकते। इसका मतलब यह है कि एक तरफ भारत में जहां करोड़ों लोग आज भी हर रोज भूखे सोने के लिए मजबूर हैं वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों को भरपेट खाना मिलता है, उन्हें यह भी नहीं पता है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद


चीन को जवाब

सरकार ने सीमा से सटी हुई दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी को विकसित कर, 37 प्रीफैब्रिकेटिड पुलों को लेह से जोड़ कर सराहनीय कार्य किया है। सरकार के इस कार्य से चीन के इरादों पर पानी फिरा है। समाचार के अनुसार असम के ब्रह्मपुत्र नदी में बोगीबिल से भी चीन परेशान है। बोगीबील ब्रिज भारत के असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना एक पुल है। इस पर रेलपथ तथा सड़कपथ दोनों बने हुए हैं। इन कार्यों को देखते हुए ऐसा लगता है कि भारत चीन का मुकाबला करने में पीछे नहीं है। सीमा की सुरक्षा सही सरकार के हाथों में है।

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी, असम


नेता लापरवाह

प्रधानमंत्री ने देश के नाम संबोधन में लोगों से मास्क पहनने की अपील की। साथ ही डिस्टेंसिंग का पालन करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह मानने की ज़रूरत नहीं कि कोरोना से कोई ख़तरा नहीं है, अगर आप लापरवाही बरत रहे हैं, बिना मास्क के बाहर निकल रहे हैं तो आप अपने आपको और परिवार को संकट में डाल रहे हैं! ऐसा ही सम्बोधन प्रधानमंत्री को देश के नेताओं के नाम भी करना चाहिए। आज इस वैश्विक महामारी में जनता से ज्यादा नेता लापरवाह हैं।

प्रदीप कुमार दुबे, नगर देवास, म.प्र.

अन्नदाता की सुध Other

Oct 28, 2020

22 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय ‘पंजाब में कृषि सुधार’ किसानों के हकों की लड़ाई का खुलासा करने वाला रहा। सारे देश का पेट भरने वाले धरतीपुत्र की खुशियों का बलिदान स्वार्थ की अग्नि में करना न्यायसंगत नहीं है। राष्ट्र के पूर्ण विकास में कृषि की भूमिका को अनदेखा किया भी नहीं जा सकता। विपक्ष के सहयोग से आंदोलन को मिली मजबूती इसकी सफलता का प्रतीक है। न्याय की इस जंग में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह का समर्थन प्रशंसनीय रहा है। केंद्र सरकार को अन्नदाता की मुश्किलों पर पुनः विचार करना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

टीआरपी की फूहड़ता

आजकल कुछ चैनल टीआरपी के चलते मनोरंजन के नाम फूहड़ता परोस रहे हैं, जिसका समाज से कोई लेना-देना नहीं होता। इन चैनलों पर वही पुराने घिसे-पिटे सीरियल आ रहे हैं और टीआरपी अधिक दिखाकर वर्षों से खींच रहे हैं। इसका खमियाजा अच्छे धारावाहिक भुगत रहे हैं। वहीं कुछ न्यूज़ चैनल टीआरपी के लिए बेसिर-पैर की डिबेट रख देते हैं, जिनमें प्रवक्ता डिबेट के नाम पर केवल शोर मचाना जानते हैं।

मनोज सिंह, मेरठ

मन का रावण

बुराई के प्रतीक रावण को मारा जाता है। लेकिन असली रावण तो हम सब के अंदर बुराई के रूप में बैठा है। केवल बुराई रूपी पुतले को मार कर हम असली विजय नहीं पा सकते। असली विजय तभी हासिल होगी जब हम सब अपने मन व आत्मा से इन बुराइयों को त्याग कर मान-मर्यादा, संस्कार, नैतिकता, चरित्रवान व जियो और जीने दो के मूल मंत्र को आत्मसात कर मेहनत से काम करें।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, म.प्र.

विवादित बयान Other

Oct 27, 2020

महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक धारा 370 बहाल नहीं होती, वह न तो तिरंगे को छुएंगी और न ही चुनाव लड़ेंगी। यह बयान एक ऐसे नेता द्वारा दिया गया है, जिनकी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में कई वर्षों तक राज किया। जब वह सत्ता में होती हैं, तब वह राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करती हैं। यह उनका दोहरा चेहरा दिखाता है। जब वे सत्ता में होते हैं तो वे भारत से प्यार करते हैं और सत्ता से बाहर होते ही वे पाकिस्तानी भाषा बोलते हैं। जनता उन्हें सबक सिखाएगी।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजडू, जोगिंदर नगर

संस्थाएं गठित हों

लॉकडाउन के पूर्व इस तरह की घटनाएं पढ़ने में आती रहीं कि स्कूल-कॉलेज जाती बेटियों के साथ छेड़खानी, तानाकशी, आदि होने से वे भयभीत रहती हैं। बेटियों को सुरक्षा प्रदान करने हेतु गांव, शहर में संस्थाएं गठित की जानी चाहिए ताकि आवारा लोगों को सुधारा जा सके। नजदीकी पुलिस स्टेशन पर ऐसी हरकतों की शिकायत करना, साथ ही अपने माता-पिता को भी ऐसी घटना की जानकारी अवश्य देनी चाहिए।

संजय वर्मा ‘दृष्टि’, मनावर ,धार, म. प्र.

पराली से खतरा और समाधान Other

Oct 26, 2020

जवाबदेही तय हो

पराली जलाने से पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का वातावरण खतरनाक सीमा तक दूषित हो गया है। ऐसे में कोरोना का कहर भी ज्यादा बरप सकता है। इसके लिए जहां किसानों की नादानी जिम्मेदार है, वहां पराली से निजात पाने के तरीके की जानकारी का अभाव भी जिम्मेदार है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को सख्ती बरतनी पड़ेगी, वहीं किसानों को जागरूक भी करना पड़ेगा। पराली से निजात पाने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी किसानों को देनी पड़ेगी, जिसमें अभी तक केंद्र और राज्य सरकारें असफल रही हैं।

अनिल कुमार शर्मा, चंडीगढ़

किफायती विकल्प दें

सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली, हरियाणा और पंजाब व समीप के राज्यों में पराली के जलने से भी प्रदूषण में इजाफा होने लगा है। इस कोरोना काल में इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं। इसे नियंत्रित नहीं किया तो कोरोना का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। सरकार नियम तो बना देती है, मगर इन नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं करती। किसानों को पराली के निस्तारण का उचित समाधान भी नहीं दिया जाता। राज्य और केंद्र सरकार दोनों को अपने सर्वश्रेष्ठ संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए किफायती तकनीक और विकल्प देने होंगे।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

जैविक प्रावधान हो

सर्द ऋतु के आगमन के साथ प्रदूषण एक स्थायी समस्या बन गया है। प्रदूष्ाण के कारणों में पराली जलाना प्रमुख है। बढ़ा हुआ प्रदूषण सांस सम्बंधी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को अत्यधिक परेशान करता है। केंद्र और राज्य सरकारें प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने में विफल रही हैं। अब ऐसे में कोरोना भी अपना प्रभाव दिखायेगा। राज्य सरकारों द्वारा बनाये गये कानून पराली जलाने की समस्या से निजात नहीं दिला सकते। सरकार किसानों को जागरूक करके उनकी सोच परिवर्तित करे। पराली को भूसे के रूप में प्रयोग को बढ़ावा दे। पराली के अवशेष का नवीनतम यांत्रिकी और तकनीक से निम्नतम लागत पर जैविक प्रबंधन करे।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां, गुरुग्राम

कारगर समाधान हो

दिल्ली एनसीआर में हर साल सर्दी आते-आते ही प्रदूषण की समस्या खतरनाक रूप ले लेती है। वायुमंडल में धुएं की मोटी चादर बन जाती है जो अनेक भयंकर बीमारियों को आमंत्रण देती है। समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जाता। वैज्ञानिक तरीके से पराली का बहुत ही कारगर उपयोग किया जा सकता है। किसान पराली को अपने खेत में इकट्ठा करके छोड़ दे तो कुछ अरसे बाद यह प्राकृतिक रूप से उत्तम खाद बन जायेगी। वहीं पराली को काटकर पशु चारे के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। सरकार इस प्रकार के कार्यक्रम बनाकर किसान को जागरूक करे।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुग्राम

उपयोग में समाधान

पराली को जलाया जाना एक बड़ी समस्या है। कोरोना काल में यह और भी घातक हो सकती है। खेती किसानी में बढ़ते मशीनीकरण, पशुधन में कमी, कम्पोस्ट बनाने हेतु दीर्घ-अवधि आवश्यकता तथा अवशेषों का कोई वैकल्पिक उपयोग नहीं होने के कारण खेतों में फसलों के अवशेष जलाए जा रहे हैं। यदि किसान हाथों से धान की कटाई करे तो खेतों में पराली नहीं के बराबर बचती है। किसान इस पराली को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। सरकार इसके लिए किसानों को राहत प्रदान करे।

सुनील महला, पटियाला, पंजाब

सक्षम बनायें

किसान की हालत बहुत अच्छी न होने से पराली जलाना उसकी मजबूरी है वरना तो वह ऐसा करता ही नहीं। कोरोना काल में पराली जलाने से सांस और चमड़ी के रोग फैलने का और खतरा है। ऐसे में सरकार द्वारा किसानों को सही प्रशिक्षण, सहायता और सही रसायन से पराली को खाद में परिवर्तित करने का सही विकल्प देना ही उचित होगा ताकि वह खुद अपने स्तर पर भी इसे रोक सके। इसके साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, निर्माण कार्यों पर भी सामयिक रोक जरूरी है। पौधरोपण के लिए उल्लेखनीय कार्य में लगे लोगों और संगठनों को सम्मानित करना भी जरूरी है।

वेद मामूरपुर, नरेला

पुरस्कृत पत्र

गंभीर पहल हो

सर्दियों की शुरुआत होते ही प्रदूषण का सारा दोष किसानों के सिर मढ दिया जाता है। जबकि प्रदूषण का मुख्य कारण कारखानों और वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं भी है। वातावरण को शुद्ध रखने का पहला काम सरकार का है। बढ़ते प्रदूषण से होने वाली बीमारियों और खतरों से लोगों को जागरूक करे। एनजीटी जैसे संगठनों को इस पर भी काम करना चाहिए। जहां धान की फसल ज्यादा होती है उस क्षेत्र में कागज बनाने, प्लाईवुड के छोटे कारखाने तथा ऐसी तकनीक पर काम करना चाहिए कि पराली को विभिन्न रूप में प्रयोग किया जा सके। इसके अलावा बिजली बनाने के संयंत्रों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। यह असरदार उपाय केवल सरकार ही करवा सकती है।

जगदीश श्योराण, हिसार

आपकी राय Other

Oct 24, 2020

असली परीक्षा खट्टर की

22 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘खट्टर-हुड्डा की परीक्षा भी है बरोदा उपचुनाव’ लेख समय के सवालों से बात करता लगा। सही मायनों में यह उपचुनाव सत्तारूढ़ भाजपा की असली परीक्षा है। यह चुनाव तय करेगा कि क्या जाट बहुल बरोदा ने भाजपा-जजपा गठबंधन को स्वीकार किया? भाजपा सरकार की दूसरी पारी तक क्या खट्टर के नेतृत्व में शासन-प्रशासन बरोदा की उम्मीदों पर खरा उतरा है। इसमें दो राय नहीं, सरकारी तंत्र व संसाधन भाजपा के पास ज्यादा है, लेकिन चुनाव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की लोकप्रियता भी नापेंगे।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, उत्तराखंड

चूक न हो

सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अनलॉक की नीति को लागू करती जा रही है। अनलॉक में ढील देने की बात को अधिकांश लोग इस महामारी के खत्म होने की बात ही समझ रहे हैं। सरकार ने सिनेमाघर, शॉपिंग मॉल, मंदिर आदि कुछ शर्तों के साथ खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन लोग सोशल डिस्टेंसिंग की पालना बिल्कुल नहीं कर रहे। बाजारों में भीड़ को देखकर ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस समाप्त हो चुका है। सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

शामलाल कौशल, रोहतक

हरित बुनियादी ढांचा

ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि मानव बस्तियां अक्सर पानी के साथ, झीलों या नदियों के पास विकसित होती हैं। शहर से गुजरने वाली नदी पारिस्थितिकी तंत्र को सेवाएं प्रदान करती है। यह तंत्र न केवल पानी की आपूर्ति के स्रोत के रूप में कार्य करता है, बल्कि बाढ़ नियंत्रण और परिदृश्य पारिस्थितिकी को संतुलित करने में भी मदद करता है। लेकिन फिर भी, शहरीकरण के कारण नदियां लगातार प्रदूषित और गंभीर पर्यावरणीय गिरावट का सामना कर रही हैं। भविष्य के लिए हरित बुनियादी ढांचे को बहु-आयामी तथा समग्र बनाना चाहिए।

खुशबू वेद, आलोट, म.प्र.

आपकी राय Other

Oct 23, 2020

जमीनी हालत से रूबरू

22 अक्तूबर को दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘खट्टर-हुड्डा की परीक्षा भी है बरोदा उपचुनाव’ लेख में बरोदा सीट को लेकर जो महत्पूर्ण बातें सामने आयीं हैं उनमें पार्टी की बजाय व्यक्ति के प्रति निष्ठा का प्रदर्शन, राजनीतिक नेताओं का जातीय आधार पर उम्मीदवारों का चयन, नेताओं की व्यक्तिगत पसंद के उम्मीदवार पर चुनावी दांव खेलने की प्रवृत्ति जैसे मुद्दे राजनीतिक दलों के दिग्भ्रम का ही परिचय दे रहे हैं। कोरोना महामारी का परिप्रेक्ष्य चुनावों को प्रभावित करेगा। जातिवाद और गोत्रों के कंधों पर टिका भारतीय लोकतंत्र भारतीय संविधान की शपथबद्धता पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है। जजपा-भाजपा और कांग्रेस के लिये नयी स्थितियां चुनौतीपेश कर रही है। बेहतर होता कि राजनीतिक दल जातीय और व्यक्तिगत समीकरण बैठाने की बजाय बदले हुए ज़मीनी हालात से रूबरू होते।

मीरा गौतम, जीरकपुर

युद्ध क्षमता बढ़ी

इंडियन नेवी एवं डीआरडीओ के तत्वावधान में निर्मित हुई ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण के लिए समूचे देश को गर्व है। चीन के साथ लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक सीमा को सुरक्षित करने के लिए देश ने पहले ही ब्रह्मोस मिसाइलों की एक बड़ी संख्या तैनात कर दी है। आधुनिक ब्रह्मोस ‘प्राइम स्ट्राइक हथियार’ है, जो नौसेना की सतह के लक्ष्यों को पूरा करके युद्धपोत की अजेयता सुनिश्चित करेगी। नौसेना के बेड़े में ब्रह्मोस का शामिल होना नौसेना की युद्ध क्षमता में गुणात्मक वृद्धि सुनिश्चित होगी।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

देश के खिलाफ

दुख की बात है कि कांग्रेस के कुछ नेता प्रधानमंत्री के विरोध में इतने अंधे हो जाते हैं कि वे जाने-अनजाने देश का विरोध कर बैठते हैं। पाकिस्तान में जाकर देश की बुराई करने वाले सिर्फ शशि थरूर ही नहीं हैं, इसके पहले मणिशंकर अय्यर ने भी ऐसा ही किया था। कांग्रेस की आज जो दुर्गति हो रही है, उसका प्रमुख कारण है देश विरोधी बयान, जो चाहे देश में दिया गया हो या देश के बाहर।

राम मूरत ‘राही’, इंदौर, म.प्र.

बुजुर्गों को राहत दें Other

Oct 22, 2020

कोरोना संक्रमण के चलते सार्वजनिक परिवहन की अनुपलब्धता के कारण वरिष्ठ नागरिक अपने जरूरी कार्य समय पर कराने से वंचित हुए हैं। वरिष्ठ नागरिकों ने दिल्ली परिवहन निगम के वार्षिक और अर्धवार्षिक आल रूट बस पास बनवाये हुए हैं। सरकार वरिष्ठ नागरिकों के बस पासों की वैधता आगामी एक वर्ष और छह मास तक उनके हिसाब से बढ़ाकर उन्हें कुछ राहत प्रदान करे। कोरोना संक्रमण के दौरान अस्पतालों में ओपीडी बंद होने से बीमारियों के इलाज का भार भी बुजुर्गों को स्वयं उठाना पड़ा है। इसलिए सरकार बुजुर्गों को कुछ राहत प्रदान करे।

महेंद्र मान, अलीपुर, दिल्ली

बसों का संकट

वर्तमान में दिल्ली को करीब 11 हजार बसों की आवश्यकता है ताकि सार्वजनिक परिवहन को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके। इस हिसाब से दिल्ली में डीटीसी के पास 5500 बसों की आवश्यकता है और डीटीसी इस समय 3762 बसों का संचालन कर रहा है। सरकार खुद मान रही है कि पिछले छह सालों में डीटीसी ने एक भी बस नहीं खरीदी। गौरतलब है कि बसों की संख्या में कमी होने के कारण मध्य वर्गीय परिवार और कमजोर वर्ग के लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

प्रतिबंध लगे

भारतीय रिजर्व बैंक के असली और भारतीय मनोरंजन बैंक के नकली नोटों में महज कुछ ही फर्क मालूम पड़ता है। हूबहू दिखने वाले नोट व्यस्तता के चलते बड़ी आसानी से बाजार में चल रहे हैं। लेकिन बच्चों के मनोरंजन के चक्कर में आम नागरिकों को दंश झेलना पड़ रहा है। वर्तमान में नवरात्रि और आने वाली दीपावली के चलते बाजारों में भीड़ के कारण यह नोट चलना या चलाना कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसे में मनोरंजन बैंक के नोट पर पाबंदी लागू होनी चाहिए।

विभाष अमृतलालजी जैन, पारा, म.प्र.

कौशल विकास जरूरी Other

Oct 21, 2020

आज जिस तरह शिक्षा को महत्व दिया जा रहा है, उसी प्रकार कौशल विकास को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिकीकरण, आधुनिकीकरण तथा वैश्वीकरण को बढ़ावा देना होगा, जिससे आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संरचना का विकास होगा। सरकार को कृषि का विविधीकरण, सस्ता ऋण, मूलभूत सुविधाओं की अभिपूर्ति, स्थानीय उद्योगों का उत्थान, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में सुधार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। सरकार को मनरेगा तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी अनेक योजनाओं को प्रोत्साहन देना होगा।

खुशबू वेद, आलोट, म.प्र.

उत्सव हैं बेटियां

18 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में क्षमा शर्मा का ‘क्योंकि उत्सव हैं बेटियां’ लेख नवरात्रि पर्व की सार्थकता का सारगर्भित खुलासा रहा। दूसरी ओर नास्तिक लोग गर्भ में पल रहे कन्या भ्रूण को संसार में आने से पहले ही गर्भपात करवाते हैं। राज्य सरकारों ने लिंग भ्रूण जांच व गर्भपात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है, फिर भी इस व्यवसाय की आड़ में लोभी ऐसा शर्मनाक धंधा चलाते हैं। ऐसे अपराधियों के लिए दंड विधान की कठोर सजा का होना भी नितांत आवश्यक है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

विसंगतियों की भूख

सरकार ने दावा किया है कि 7-8 महीनों के लिए भारत में 800 मिलियन लोगों को भोजन प्रदान किया है। वहीं ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर आया है। सरकार का यह भी दावा है कि लॉकडाउन के दौरान एक भी व्यक्ति भुखमरी से नहीं मरा। सच्चाई यह है कि अभी भी लोग भुखमरी से प्रभावित हैं। वहीं देश में लाखों टन अनाज वितरण व भंडारण व्यवस्था की खामियों के चलते सड़ रहा है।

नेहा जमाल, मोहाली, पंजाब

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Oct 20, 2020

राजस्व की क्षति

राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी तरह से पंजाब प्रदेश का माहौल खराब होने से बचाएं। विदित हो कि 24 सितंबर से ट्रेनों का परिचालन ठप होने से लुधियाना जालंधर अमृतसर आने वाले ट्रेन यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की राजस्व में कमी हो रही है। कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ पंजाब के किसानों का आंदोलन अपनी जगह है लेकिन किसी को कानून को हाथ में लेने की अनुमति नहीं है। वे अपनी बातें शांतिपूर्वक आंदोलन के माध्यम से भी कह सकते हैं।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

सड़क पर अतिक्रमण

अम्बाला शहर में जीटी रोड पर मंजी साहिब गुरुद्वारा से कालका चौक तक व गीता नगरी रोड पर अवैध कब्जा किये गये हैं। किसी-किसी स्थान पर तो आधी से ज्यादा सड़क तक गाड़ियां खड़ी होती हैं या सामान पड़ा रहता है, जिससे पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों के लिए दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है। क्या प्रशासन स्थाई समाधान निकाल पायेगा।

श्रीकृष्ण सैनी, अम्बाला शहर

यौन अपराध से सुरक्षा का प्रश्न Other

Oct 19, 2020

सख्ती जरूरी

हाथरस की बेटी को अपराधियों ने बेरहमी से अपना शिकार बनाया और मौत के घाट उतारा। एक तरफ तो देश में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा और दूसरी तरफ ऐसी स्थिति कि देश की बेटी घर से बाहर भी न निकल सके, अगर निकले तो उसका हाल भी हाथरस की बेटी जैसा हो, आखिर क्यों? इस तरह के अपराध तब तक नहीं रुकेंगे जब तक कानून का पालन सख्ती से न किया जाये। आमतौर पर अपराधी अपराध करके कुछ ही समय बाद छूट जाता है। इसी कारण अपराधी के हौसले बुलंद होते चले जाते हैं। अपराधी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि देश का हर इनसान अपराध करने से डरे।

सतपाल सिंह, करनाल

सोच बदले

यौन अपराध केवल सख्त कानून बना कर नहीं रोके जा सकते। संस्कारहीन और मर्यादाहीन परिस्थितियां युवा वर्ग के अन्दर तक बैठ गई हैं। बेकारी और एकाकीपन में अपने परिवार से दूर रहना भी इसका एक कारण हो सकता है। आधी आबादी को लेकर मानसिकता बदलनी जरूरी है। यह मान लेना चाहिए कि बेटियां और औरतें भी इस समाज का अंग हैं और उन्हें भी चारदीवारी के बाहर आने-जाने की उतनी ही आजादी है, जितनी पुरुष समाज को। रामराज्य की कल्पना साकार करने के लिए कानून के भय के साथ ही युवा वर्ग को शिक्षा से संस्कारित किये जाने की भी आवश्यकता है। तभी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रुकेगी।

जगदीश श्योराण, हिसार

नैतिकता का पाठ

देश में बढ़ती यौन हिंसा के समाधान के लिए सख्त कानून बनाने चाहिए। सख्त कानून के साथ-साथ जब तक लोगों में नैतिकता की भावना का प्रचार-प्रसार नहीं होगा तब तक शायद ऐसी घिनौनी घटनाओं पर रोक लगना मुश्किल है। अगर बच्चों को बचपन से ही नैतिकता का सबक पढ़ाया जाए तो समाज में बढ़ रही गलत प्रवृत्ति पर लगाम लग सकती है। इन पर नकेल कसने के लिए अभी गंभीरता से प्रयास हों। यदि इसको रोकने के लिए प्रयास सरकार और समाज ने मिल-जुलकर नहीं किए तो आने वाला समय विकट हो सकता है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

जीवन शैली बदलें

निर्भया कांड में अपराधियों की जघन्यता व उनके कानूनी दांवपेचों से जनमानस लम्बे समय तक विचलित रहा तो हैदराबाद के अपराधियों के शीघ्र अंजाम तक पहुंचने पर खुश हुआ। आज हाथरस पीड़िता के घर पुलिस व सीसीटीवी की लाइन लगा देने से भी रात्रि में शवदहन व परिवार दमन की सच्चाई को नहीं बदला जा सकता। लेकिन न्याय त्वरित गति के साथ होता हुआ भी दिखे। फिल्में समाज का आईना हैं, उनमें प्रदर्शित यौनहिंसा, बेटियों की अस्मिता के समाचार तथा गिरते नैतिक मूल्य भटके युवाओं को अपराधोन्मुखी बना रहे हैं। खेल, योग, सादगी, सदाचार व नैतिक मूल्यों का सम्मान इसे रोकने में सहायक होंगे।

आचार्य रामतीर्थ, रेवाड़ी

कानून का भय हो

यौन हिंसा को रोकने के लिए केन्द्र ने बेशक सख्त कानून बना दिए हों, पर जब तक हैवानों के मन में मौत की सजा का भय नहीं होगा, तब तक ये कानून बेअसर रहेंगे। देश की न्यायिक व्यवस्था इतनी लचीली है कि आरोपित पक्ष पूरी व्यवस्था को धन बल से प्रभावित करने में सक्षम रहता है। फास्ट ट्रैक अदालतों तक मामले जा ही नहीं पाते। जेलों में अपराधियों को पैसों के बलबूते सारी सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। जेल जाने का भय समाप्त होता जा रहा है। यदि पुलिस ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करे, तो संभव है।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

संकीर्णता से संघर्ष

बेटियों की अस्मिता की रक्षा के लिए आरोपियों के खिलाफ त्वरित कोर्ट में सजा सुनाकर सार्वजनिक तौर पर मृत्युदंड दिया जाये। इसके अलावा समाज और देश में जातिगत आधार पर भेदभाव न हो। ऊंच-नीच, अस्पृश्यता, छूआछूत, जातिवाद, गरीबी आदि बुराइयों का अन्त हो। धार्मिक पाखंडों, अंधविश्वासों की जगह वैज्ञानिक, तार्किक, न्यायोचित्त, मानवीय, दया, करुणा, परोपकार, भाईचारे आदि दृष्टिकोण से बच्चों को शिक्षा व संस्कार दिये जायें। समाज से धार्मिक व जातीय वैमनस्यता को प्रचारित-प्रसारित करने वाले कथित ठेकेदारों को कठोरतम दंड देना सुनिश्चित हो।

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उ.प्र.

पुरस्कृत पत्र

जांच में पारदर्शिता हो

देश में यौन अपराध से बेटियों की सुरक्षा का प्रश्न गंभीर होता जा रहा है। यौन हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानून भी बनाए गए परन्तु फिर भी यह सिलसिला जारी है। इसका कारण है—जांच अधिकारियों का राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त न होना और दूसरा युवा पीढ़ी का भटकाव। भारतीय संस्कृति व सामाजिक मूल्यों से युवाओं का विमुख होते जाना व इंटरनेट द्वारा गलत सामग्री का परोसा जाना ऐसे कारक हैं जो युवाओं को इस प्रकार के अपराधों की ओर उन्मुख कर रहे हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए जांच में पारदर्शिता की जरूरत है।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

विरोध की भाषा Other

Oct 17, 2020

नजरबंदी से रिहा होने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने भारत विरोधी भाषा बोलनी शुरू कर दी है। पीओके को लेकर भी वह कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। महबूबा मुफ्ती ने अपनी रिहाई के बाद कहा कि धारा-370 की बहाली के लिए उनकी पार्टी संघर्ष करेगी। यह क्या तमाशा है? फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती जैसे लोग जब सत्ता में होते हैं तो वह संविधान की कसम खाकर उसके अनुरूप काम करने की बात कहते हैं लेकिन जब सत्ता से बाहर हो जाते हैं तो उनकी गतिविधियां राष्ट्र विरोधी हो जाती है। ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें सलाखों के पीछे करना चाहिए।
शामलाल कौशल, रोहतक

साख पर सवाल

इन दिनों न्यूज़ चैनल वाले टीआरपी के लिए अपना चरित्र दिखा रहे हैं। हाल ही में मुंबई पुलिस ने टीवी चैनलों की टीआरपी के खेल का जोरदार खुलासा किया है, जिसे देखते हुए सारी दुनिया को सच और हकीकत मालूम होने लगी है। हकीकत का दावा करने वाले न्यूज़ चैनल क्यों टीआरपी के लिए अपना नाम खुद ही डुबा रहे हैं। न्यूज़ चैनल वाले टीआरपी के पीछे नहीं बल्कि सच्चाई के पीछे भागें तो शायद आने वाले दिनों में आम जनता का उनके ऊपर विश्वास बढ़ेगा।
चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी

प्रतिबंधों की मार

वेनेज़ुएला दुनिया में अच्छी गुणवत्ता का तेल उत्पादित करता हैै। अमेरिका ने इस पर कई प्रतिबंधों को लागू किया है। इन प्रतिबंधों के कारण इसे अपने कच्चे तेल को बेचने के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या ने इस देश को कंगाल बना दिया है। खाने की दरें आसमान छू रही हैं। नब्बे फीसदी जनसंख्या बहुत गरीब है। जल्द ही स्थिति में सुधार होने की कोई उम्मीद नहीं है।
नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजडू, जोगिंदरनगर

जैविक खेती Other

Oct 16, 2020

फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक से कृषि करना जरूरी है, क्योंकि इससे किसानों को ज्यादा फायदा हो सकता है। किसान फल, सब्जियों की पैदावार या इनकी संभाल करने के लिए भी जो रासायनिक खादों और अन्य कैमिकल का प्रयोग कर रहे हैं, वह भी शरीर के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। जैविक खाद का प्रयोग बढ़े, इसके लिए सरकारों को किसानों के लिए विशेष योजनाओं की सौगात देनी होगी। किसानों को इस कार्य के लिए तकनीकी और आर्थिक सहायता देनी होगी। किसानों को पशु पालन के लिए जागरूक करना चाहिए ताकि किसान जैविक खाद तैयार कर सकें।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर

किसानों की अनदेखी

किसानों के संयुक्त मंच को नई दिल्ली में तवज्जो नहीं मिली, क्योंकि कुछ नौकरशाहों को छोड़कर किसी भी केंद्रीय मंत्री को बात करने के लिए प्रतिनियुक्त नहीं किया गया था। फलत: किसानों के नेताओं को मीटिंग से बाहर निकलने के लिए बाध्य होना पड़ा। जाहिर है, अगर चीजें पंजाब में और कहीं और खराब होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी भारत सरकार पर होगी। पंजाब पहले ही काले दिन देख चुका है और अभी भी उबर रहा है। आंदोलन को किसानों के हाथ से फिसलने की स्थिति न आने दें।
बृज बी. गोयल, लुधियाना

बेतुका बयान

धारा 370 को लेकर फारूक अब्दुल्ला का दिया बयान व्यथित करने वाला है। उनसे इस प्रकार के अनाड़ीपन वाले बयान की उम्मीद नहीं थी। अब उन्हें इस नई व्यवस्था में न केवल जीने की आदत डालनी होगी बल्कि अपनी राजनीतिक भूमिका की जमीन भी बनानी होगी। इस नये भारत में पाकिस्तान तथा चीन की कोई दाल नहीं गलने वाली है। फारूक अब्दुल्ला को अपनी देशभक्ति का परिचय देना चाहिए। ऐसे बयानों से अपना मजाक न उड़वाएं तो बेहतर होगा।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.

आपकी राय Other

Oct 15, 2020

प्रशासन की विफलता

14 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित गुरबचन जगत का लेख ‘जब असफल हो जाये पूरा ही तंत्र’ हाथरस में घटित सामूहिक बलात्कार और हत्या तथा प्रदेश सरकार की संवेदनहीन भूमिका और प्रशासन की विफलता का सटीक चित्रण है। चूंकि लेखक महानिदेशक स्तर के पूर्व पुलिस अधिकारी और पूर्व राज्यपाल हैं, जिन्हें कानून व्यवस्था और शासन प्रणाली का व्यापक अनुभव है। उपरोक्त प्रकरण में शासकीय विफलता के दृष्टिगत उच्चतम न्यायालय को स्वत: संज्ञान लेना चाहिये।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां (गुरुग्राम)


भ्रष्टाचार दूर करें

13 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘स्वावलंबन की राह में नौकरशाही बाधा’ लेख नौकरशाहों की भ्रष्ट मानसिकता का पर्दाफाश करने वाला था। चीन से पलायन करने वाली विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए ना केवल प्रेरित ही करना चाहिए बल्कि थाईलैंड तथा वियतनाम का भी मुकाबला करें जो हमारे प्रतिद्वंद्वी हैं। नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करने की जरूरत है। लेखक की इस बात से सहमत हुआ जा सकता है कि आयात कर में वृद्धि कर देनी चाहिए, इससे देश में उत्पादन तो बढ़ेगा ही, साथ ही विकास का रास्ता साफ होगा।

शामलाल कौशल, रोहतक


मौकापरस्त राजनीति

अक्सर यह देखकर दुख होता है जब अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाले राजनीतिक दल किसी अल्पसंख्यक द्वारा बहुसंख्यक की हत्या करने पर चुप रहते हैं। यदि इसके विपरीत होता है तो अल्पसंख्यक के पक्ष में खड़े नजर आते हैं। इन राजनीतिक दलों के पतन का यह एक प्रमुख कारण है। इन दलों को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि दोहरी नीतियों से कोई भी दल देश पर शासन नहीं कर सकता।

राम मूरत ‘राही’, इंदौर, म.प्र.

पासवान-रघुवंश के बिना Other

Oct 14, 2020

दस अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘रघुवंश-रामविलास बिना बिहार चुनाव’ लेख ने इनके जाने के बाद बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को उकेरा है। सही मायने में यह क्षति राजग की भी है, जिसके पास राष्ट्रीय स्तर का दलित नेता नहीं है। चिराग पासवान उस कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। वैसे भी वह राजग से अलग होकर चुनाव लड़ रहे हैं। निश्चित रूप से रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे खांटी नेता की कमी राष्ट्रीय जनता दल को भी खलेगी। लालू के जेल जाने और बेटों की लड़ाई से पहले ही पार्टी का बंटाधार हो रखा है। बहरहाल, बिहार की राजनीतिक अस्थिरता के बीच मार्गदर्शक लेख के लिए साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

प्रेरणादायक जीवन

11 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून लहरें अंक में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का लेख ‘जेपी और उनकी जन्मभूमि’ लोकनायक जयप्रकाश नारायण का राजनीतिक-सामाजिक, जीवन का जीवंत चित्रण करने में कामयाब रहा। त्याग- बलिदान की कसौटी पर खरा उतरने वाले उनके आदर्श सदा ही अनुकरणीय रहेंगे। उनमें कूट-कूट भरी देशहित की नि:स्वार्थ भावना जन कल्याण के रूप में इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में स्थान पाने की क्षमता रखती है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

जांच जरूरी

आजकल प्राइवेट न्यूज चैनलों ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए पैसे का खेल खेला। हालांकि, चैनल इस तथ्य को नकार रहे हैं। सरकार को इस मामले की निष्पक्ष और उचित जांच अवश्य करनी चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसी कोई खबर सामने न आए जो मीडिया जगत को दागदार करने वाली हो, इसके लिए सरकार और ट्राई को कुछ कठोर कदम उठाने होंगे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

राजनीतिक शून्यता Other

Oct 13, 2020

10 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय पृष्ठ पर राजकुमार सिंह के ‘रघुवंश-रामविलास...’ लेख में लेखक ने ठीक ही कहा है कि बिहार में होने वाले चुनाव राजनीतिक समीकरणों को बदल देंगे। बिहार के दो बड़े नेताओं के दिवंगत हो जाने से शोक में डूबे उनके समर्थक अन्ततः किसे वोट देंगे। यह तो तय ही लग रहा है कि चिराग पासवान को सहानुभूति वोट मिलेंगे। यह चुनावों के बाद साफ हो जायेगा कि चिराग पासवान कितनी सीटें जीतकर सत्ता की बिसात पर उभरते हैं। नीतीश कुमार की जटिलता भी बढ़ गयी है। अभी असमंजस की स्थिति तो है ही।

मीरा गौतम, जीरकपु

न्याय मिले

पहले दिल्ली की निर्भया और अब हाथरस में दलित परिवार की निर्भया, का रातोंरात दाह-संस्कार कर दिया गया। आखिर प्रशासन और पुलिस विभाग की ऐसी क्या मजबूरी थी। ऐसे अनेक सवाल हैं। प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए।

दिवाकर तिवारी, भोपाल

बिखरता कुनबा राजग का Other

Oct 12, 2020

सत्ता का दंभ

शिवसेना और शिअद राजग के पुराने साथी थे, परंतु जब से भाजपा को केंद्र में अपने बहुमत से सत्ता मिली है तब से राजग के सहयोगी दल न तीन में हैं और न तेरह में। बहुमत का अहंकार भाजपा के सिर चढ़ कर बोल रहा है। अब भाजपा न तो किसी सहयोगी दल को महत्वपूर्ण पद देना चाहती हैं और न ही किसी विषय पर पक्ष-विपक्ष से विचार-विमर्श की जरूरत समझती है। इसीलिए शिवसेना ने राजग से अलग होकर मुख्यमंत्री का पद हासिल कर लिया तो अकाली दल ने सरकार के कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ खड़े किसानों के साथ खड़े होकर राजग छोड़ दिया है।

देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद

साख पर आंच

गठबंधन धर्म की उपेक्षा कभी उचित नहीं हो सकती क्योंकि यह कर्त्तव्यविमुखता के साथ उसकी ताकत, अहंकार और तानाशाही को भी दर्शाता है। भाजपा शक्तिशाली होने से ही ऐसा कर रही है जो स्वाभाविक है। असल में उसके लिए अपने सभी सहयोगियों, विपक्ष और किसान संगठनों के साथ ही आगे बढ़ना ठीक था। यह स्वस्थ राजनीति में स्वस्थ कदम नहीं हो सकता। इससे भविष्य में आपसी एकता और विश्वास को बड़ा झटका लगाना भी स्वाभाविक है। ऐसे ही तो राष्ट्रीय जनाधार की क्षति के साथ पार्टियों की साख पर भी आंच आती है।

वेद मामूरपुर, नरेला

भाजपा के हित में

शिव सेना व अकाली दल या और छोटे-मोटे वनमैन राजनीतिक दलों का राजग छोड़कर चले जाना राजग का बिखराव नहीं अपितु राजग का सफाई अभियान चल रहा है। इन राजनीतिक दलों का भाजपा से वैचारिक सामंजस्य नहीं था। केवल सत्ता पाने का लालच इनको राजग में लाया था। कांग्रेस का ह्रास देख कर ये दल राजग में आ मिले थे। उस समय भाजपा भी कमजोर थी। अब हालात बदल गए हैं। मोदी की विकासोन्मुखी नीतियों के कारण जनसाधारण राजग के साथ है। महाराष्ट्र एवं पंजाब में अकेले चुनाव लड़ना भाजपा को लाभ देगा।

अनिल शर्मा, चंडीगढ़

मुश्किल होती राह

भाजपा की तरफ से शिअद को मनाने के कुछ खास प्रयास भी नहीं हुए। पिछले विधानसभा चुनावों के बाद दोनों दलों के रिश्तों में पहले जैसे गर्मजोशी भी नहीं रही थी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इस अलगाव का असर दिखाई देगा और दोनों ही पार्टियों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। कृषि प्रधान पंजाब में ग्रामीण पृष्ठभूमि में दखल रखने वाले शिअद का मुख्य वोट बैंक किसान ही है। ऐसे में पंजाब में किसान संगठनों के तल्ख विरोध को देखते हुए शिअद के लिए कोई और चारा भी नहीं था। अगला चुनाव भाजपा के लिए बेहद मुश्किल होने वाला है।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

गठबंधन धर्म निभाएं

वैसे तो लोकतंत्र की सुन्दरता किसी देश में दो दलीय व्यवस्था से ही होती है, परन्तु देश में तो कई वर्षों से जनता ने इस प्रणाली को नकार दिया है, जिसकी वजह से राष्ट्रीय दलों को बहुमत प्राप्त करने के लिए अनेक सत्ता सुख, स्वार्थ सिद्ध क्षेत्रीय दलों के साथ न्यूनतम साझे कार्यक्रम के तहत गठबंधन करना पड़ता है। सत्ता में भागीदार होते ही कई दल अपने स्वार्थ एवं वर्चस्व के लिए स्वच्छन्दचारी बन जाते हैं, जिसकी वजह से बिखराव होना स्वाभाविक है। अत: सभी घटकों को गठबंधन धर्म का सच्ची निष्ठा से पालन करना चाहिए ताकि बिखराव की नौबत न आए। इसी में सबकी भलाई है।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

कुनबा संभालें

कटु सत्य है कि परिवार में सभी सदस्यों को खुश नहीं रखा जा सकता। मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार संसदीय चुनाव जीतने तथा कुछ और राज्यों में सत्ता पर कब्जा करने के कारण भाजपा के व्यवहार में निरंकुशता आ गई है। पिछले चुनावों में उसकी भारी जीत के पीछे उसकी सहयोगी पार्टियों द्वारा बनाया गया अनुकूल माहौल था। भाजपा राष्ट्रीय हित में फैसले लेने से पहले अपने सहयोगी दलों तथा जनता की राय को जरूर ध्यान में रखे। सभी दल सत्तापक्ष के साथ चिपक कर लाभ उठाना चाहते हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को अपने कुनबे को संभालना चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

निरंकुश व्यवहार

शिअद का केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन से अलगाव असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम है। इसका राष्ट्रीय राजनीति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ना तय है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटों पर प्रचंड विजय के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया। पूर्ण बहुमत के बाद निरंकुशता एक स्वाभाविक परिवर्तन है। अनेक विषयों पर भाजपा अपने सहयोगियों की अनदेखी कर रही है। गठबंधन सहयोगियों की अनदेखी, शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल के अलगाव से भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह पैदा हो गया है।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां, गुरुग्राम

आपकी राय Other

Oct 10, 2020

भावनाओं से खिलवाड़

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के गिरते स्तर से देश में हर कोई चिंतित है। टीआरपी घोटाले में देश के न्यूज़ चैनलों का नाम आना शर्मनाक घटना है। देश की जनता की भावनाओं से ऐसे खिलवाड़ करना किसी भी तरीके से जायज नहीं है। ऐसे तमाम चैनलों के लिए कोई ठोस कानून बनना चाहिए। प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता बने रहने का कारण, उनका लक्ष्मण रेखा को पार न करना ही है। अब हालात ये है कि प्रिंट मीडिया में खबर न आये तब तक किसी भी खबर पर विश्वास करना मुश्किल होता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो ब्रेकिंग न्यूज़ के चक्कर में सारे नियम कानूनों को ताक पर रख देता है।

सुनील सहारण, फ़तेहाबाद

स्वावलंबी बने भारत

6 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘विश्व आय में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति’ लेख चर्चा करने वाला था। विडंबना है कि विश्व आय में भारत का योगदान मात्र 4 प्रतिशत रह गया है। लेखक ने वैश्विक आय में वृद्धि के लिए अमेरिका तथा चीन से तकनीक हासिल करने का विश्लेषण किया है। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि चीन विस्तारवादी देश है। वह भारत को हर क्षेत्र में नीचा दिखाना चाहता है। अगर तकनीक का विकास करने में चीन या अमेरिका का हमारे अभिमान पर चोट पहुंचाए बिना मदद मिल जाती है तब इसका स्वागत करना चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

सही कदम

सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों पर आंदोलन को लेकर जो टिप्पणी की है, वह आज की विशेष जरूरत थी। दिल्ली के शाहीन बाग पर चले लंबे धरने से आम लोगों को जिस तरह से परेशानियों से गुजरना पड़ा, वह वाकई ध्यान देने वाली बात थी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं करने पर भी टिप्पणी की है जो सही है। अगर पुलिस शुरू में ही सख्त हो जाती तो आम लोगों को परेशानी न होती। कोर्ट द्वारा देर से सही, दुरुस्त कदम उठाया गया है।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार म.प्र.

मजबूत बुनियादी ढांचा Other

Oct 08, 2020

रोहतांग में अटल सुरंग भारत की रक्षा और क्षेत्रीय समृद्धि के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। यह पूरे साल खुली रहेगी। इसके साथ ही यह सुरंग प्रदेश में और विशेष रूप से लद्दाख में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ाएगी। वहीं चीन इस सुरंग के खुलने के बाद असहज महसूस कर रहा है। इस सुरंग के बनने के बाद भारत की सेना कभी भी सीमा पर पहुंच सकती है और शक्ति का संतुलन हमारी ओर बढ़ रहा है। हमें चीन के छलावे में नहीं आना चाहिए और सीमा क्षेत्रों में अधिक बुनियादी ढांचे बनाने की जरूरत है।

नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंदर नगर, हि.प्र.

सर्जिकल स्ट्राइक हो

आतंकियों द्वारा श्रीनगर एवं आसपास के इलाकों में सेना पर कायराना हमले जारी हैं। जम्मू-कश्मीर सीमा पर लगातार पाकिस्तान समर्थित आतंकी सक्रिय हैं और आये दिन सेना पर हमले करते रहे हैं। इस तरह की घटनाओं के मद्देनजर सरकार को एक बार फिर पाक क्षेत्रों में स्थापित आतंकी अड्डों को नष्ट करना चाहिए।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, म.प्र.

सिर्फ राजनीति

राजस्थान में बलात्कार की घटना पर मौन कांग्रेस पार्टी हाथरस में विरोध प्रदर्शन सिर्फ राजनीति चमकाने के लिए कर रही है। अगर वाकई राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा को बलात्कार की घटना से दुःख है तो वह सिर्फ हाथरस ही नहीं राजस्थान भी जाएं। जनता सब देख रही है। राजनीतिक फायदा कुछ भी नहीं मिलने वाला।

प्रदीप कुमार दुबे, देवास, म.प्र.

नशे का नासूर

आजकल फिल्म जगत में ड्रग्स का मामला सुर्खियों में छाया है। सवाल है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ही क्यों ड्रग्स का मामला फिल्म जगत में गर्म हुआ? आखिर क्यों सुशांत की मौत को लेकर हर रोज नया मोड़ आ रहा है?

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

फोन बना फांस Other

Oct 07, 2020

कोरोना महामारी के चलते बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई अब अभिभावकों के लिए गले की फ़ांस बनती जा रही है। ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर बच्चे सारा दिन फोन का प्रयोग करते हैं। वैसे भी ज्यादा फोन का प्रयोग करने से बच्चों में क्रोध, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता जा रहा है। अब अभिभावकों की मजबूरी है कि क्लास ऑनलाइन होती है। उम्मीद करते हैं कि जल्दी से कोरोना की वैक्सीन बन जाए और बच्चे फिर से स्कूलों में जाने लगें क्योंकि स्कूल में जाने से ही बच्चों का सम्पूर्ण विकास होता है।

सुनील कुमार, फ़तेहाबाद

तार्किकता तलाशें

सोशल मीडिया पर कोविड-19 को लेकर भयानक अफवाहें फैल रही हैं। लोग लिखते हैं कि कोरोना वायरस के पीछे राजनीति का खेल छुपा है। आखिर क्यों कोरोना वायरस को लेकर झूठी अफवाह फैला रहे हैं? क्यों लोगों को अंधेरे में धकेल देना चाहते हैं? किसी भी न्यूज़ को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले उसकी जांच-पड़ताल करना बहुत ही जरूरी है।

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी

समृद्धि की सुरंग

‘अटल सुरंग’ विश्वास का प्रतीक है और यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर हमारा पहला कदम है। अटल सुरंग भारत की सीमा संरचना को मजबूत करने में मदद करेगी। सरकार की भी रक्षा जरूरतों को पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उम्मीद है कि इस रणनीतिक रोहतांग सुरंग परियोजना से परिवहन लागत में करोड़ों रुपये की बचत होगी।

नेहा जमाल, मोहाली, पंजाब

दंड उदाहरण बने

बलात्कार हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है। बलात्कार के परिप्रेक्ष्य में यह जरूरी है कि कुकर्मी को मृत्युदंड से बढ़कर दण्ड मिले, जिससे कोई और ऐसा अपराध करने की हिम्मत न कर सके। समुचित दण्ड के अभाव में इस जघन्य अपराध पर अंकुश लगाना असंभव है। अर्थात‍् दण्ड ऐसा मिले जो उदाहरण बने।

लाडो कटारिया, गुरुग्राम

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Oct 06, 2020

नशे का नश्तर

सीमा पर नशीले पदार्थों का लेन-देन चोरी-छिपे होता है, फिर घुसपैठ करवा कर भारत में इसे भेज दिया जाता है। यही वजह है कि पिछले 10 सालों में देश में ड्रग्स की उपलब्धता बढ़ गई है। हाल-फिलहाल देश में लोगों को अब ड्रग्स आसानी से मिल रहे हैं। ड्रग्स की ज्यादातर खेप पाकिस्तान से यहां आ रही है। इस चक्कर में आज की युवा पीढ़ी नशेबाज होती जा रही है। सरकार नशे के कारोबार को सख्ती से रोके और पालक बच्चों पर कड़ी निगाह रखे।

अमृतलाल मार, धार, म.प्र.

रोजगार हो प्राथमिकता

5 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का लेख ‘दरकते सपनों से उद्वेलित युवा पीढ़ी’ बढ़ती बेरोजगारी की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने वाला रहा। सत्तारूढ़ सरकार की बेरोजगारी खत्म करने की दुहाई घोषणा मात्र प्रतीत हो रही है। पात्रता परीक्षाओं में स्वच्छता, पारदर्शिता की कमी है। स्वरोजगार हेतु लघु उद्योगों की स्थापना ग्रामीण स्तर पर करनी चाहिए। पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण युवक-युवतियों का योग्यता आकलन करना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

कृषि सुधारों के प्रश्न Other

Oct 05, 2020

व्यापारियों के हवाले

कृषि सुधार बिल किसानों की आय को दोगुना करेंगे अथवा शोषण को, यह तो भविष्य के गर्भ में है। मगर केन्द्र सरकार का किसानों के प्रति रवैया सही नहीं है। मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसान आशंकित हैं। सरकार मौखिक रूप से आश्वासन दे रही है कि मंडियां और समर्थन मूल्य समाप्त नहीं होंगे। बड़े व्यापारिक घरानों द्वारा मनमाफिक भावों से खरीदारी की जाएगी और सरकार मंडियों में कुछ खरीदेगी नहीं तो समर्थन मूल्यों का क्या महत्व रह जाएगा? कंपनियों द्वारा जमाखोरी बढ़ेगी। किसान को व्यापारियों के हवाले किया जा रहा है।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

विसंगति दूर हो

सरकार कृषि बिल को किसानों के लाभ के लिए क्रान्तिकारी कदम बता रही है। इससे किसान बिचौलियों के चंगुल से बाहर निकल कर फसल बेचने के मामले में आजाद हो गया है। प्रश्न यह है कि जब यह बिल किसानों के हित में है तो फिर किसान संगठन विपक्षी पार्टियां और एनडीए के कुछ सहयोगी भी इन सुधारों का विरोध क्यों कर रहे हैं। सरकारी नुमाइंदे एमएसपी का हवाला देते हैं कि यह कायम रहेगा। लेकिन फसल एमएसपी रेट पर बिकेगी इसकी गारंटी कोई लेने को तैयार नहीं है। कम्पनियां फसल खरीद का काम करने लगेंगी तो किसान उनका गुलाम बनकर रह जाएगा। आम किसान की हैसियत नहीं कि किसान अपना अनाज बेचने के लिए हैदराबाद या चिकमंगलूर जाएगा।

जगदीश श्योराण, हिसार

विश्वास में लें

केन्द्र सरकार ने किसानों के हित ध्यान में रखते हुए बिल पास किये हैं। लेकिन देश में इस बिल को लेकर हंगामा हो रहा है। पंजाब, हरियाणा तथा यूपी आदि राज्यों के किसान सड़कों पर उतर कर विरोध कर रहे हैं। सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसा क्यों? जो चीज हमारे फायदे के लिए होगी, उसका विरोध कैसा? सरकार ने इस बिल को पास करने में जल्दबाजी क्यों की? विपक्ष से व्यापक चर्चा क्यों नहीं की गई? किसान असमंजस की स्थिति में है। उसके लिए कुछ भी साफ नहीं है। ऐसे में यह बिल किसानों को अपने साथ छलावा लग रहा है।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुगाम

विरोध के तर्क

कृषि बिल फायदेमंद हैं क्योंकि विधेयकों के लागू होने से किसानों की आय बढ़ेगी। बाजार से बिचौलिये दूर होंगे और किसानों को उनकी फसल का वाजिब भाव मिल सकेगा। कृषि विधेयकों के अमल में आने से खेती-किसानी के क्षेत्र में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा, लेकिन इसके लिए राज्य सरकारों को भी कृषि क्षेत्र में निवेश का माहौल बनाना होगा। किसानों को चिंता है कि जिन राज्यों में एमएसपी पर खरीद होती है, आने वाले दिनों में यह खरीद बंद हो जाएगी। इसके अलावा किसान मंडियों के बाहर फसल बेचेंगे, जिससे उनका राज्य का राजस्व घटेगा। इसलिए विरोध हो रहा है।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

आशंका दूर हो

हाल ही में कृषि से जुड़े नए कानून के खिलाफ किसानों का सड़कों पर आना बिना वजह तो नहीं हो सकता। सरकार और किसान के अपने-अपने तर्कों के बीच आशंकाओं का पहाड़ है तो वहीं सरकारी आश्वासनों का सैलाब है। बड़े किसान इन बदलावों से चिंतित हैं तो छोटे किसान आश्वासनों पर भरोसा करते हैं। खेतों के बीच आड़ी-तिरछी पगडंडियों पर राजनीति की सरपट से इनकार नहीं किया जा सकता। बहरहाल, कर्जों का बोझ उठाये अन्नदाताओं को बदलती परिस्थितियों में भी अपने अनाजों को बेचने की मजबूरी है। आशंकाओं और आश्वासनों के बीच वक्त तय करेगा कि सुधारों से किसानों की खुशियों में इज़ाफ़ा होगा या सौदा घाटे का रहेगा।

एमके मिश्रा, रांची, झारखंड

संरक्षण का प्रश्न

किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु इन विधेयकों के जरिये किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कई विकल्प केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को आढ़तियों और व्यापारियों से संरक्षण देने के लिए जो कवच संघर्षों से मिला था, अब नहीं रहेगा। अब कृषि विधेयक के समर्थन में किसान खुलकर रैलियां भी करने लगे हैं। निकट भविष्य में इससे सभी राज्यों के किसानों को लाभ मिलेगा। किसान अपनी फसल स्वयं बेचने में स्वतंत्र होगा। कहीं-कही विरोध के स्वर देखने को मिल रहे हैं।

रमेश चन्द्र पुहाल, पानीपत

पुरस्कृत पत्र

संवेदनशीलता की जरूरत

आज किसान, कृषि को कॉरपोरेट हाथों में जाता हुआ देख सड़कों पर है। किसानों का मानना है कि इससे उनका लाभ नहीं होने वाला है। कुछ राज्य सरकारें एमएसपी पर खरीद के अभाव में आय का एक निश्चित भाग बंद होता देख रही हैं। अकाली दल साथ छोड़ गया, जदयू एमएसपी से नीचे की खरीद को दण्डनीय अपराध बनाने की मांग पर डटा है। ऐसे में एमएसपी की कानूनी गारंटी पहले भी नहीं थी, केवल ऐसा कहकर सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती। यह किसी भी तरह से अन्नदाता और देश के हित में नहीं है। सरकार को किसानों को आश्वस्त करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। अन्यथा जनता आईना दिखाने में देर नहीं करती।

आचार्य रामतीर्थ, रेवाड़ी

आपकी राय Other

Oct 03, 2020

बाकी हैं सवाल

29 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘बदलाव की दिशा सही, सावधानी जरूरी’ लेख केंद्र सरकार द्वारा कृषि बिल पास करके किसानों के भले की बात का विश्लेषण करने वाला था। कृषि संबंधी इन कानूनों के पास हो जाने के बाद किसानों के लिए अपनी फसल को दूर-दूर के उन राज्यों में ले जाना मुश्किल हो जाएगा, जहां कीमतें ज्यादा हैं। इन कानूनों के पास होने के बाद मंडी व्यवस्था फेल हो जाएगी। इससे तो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट या कंपनी वालों का ही भला होगा, किसानों का तो नुकसान ही नुकसान है।

शामलाल कौशल, रोहतक

नशे का नश्तर

पिछले 10 सालों में देश में ड्रग्स की उपलब्धता बढ़ गई है। हाल-फिलहाल देश में लोगों को अब ड्रग्स आसानी से मिल रहे हैं। ड्रग्स की ज्यादातर खेप पाकिस्तान से यहां आ रही है। इस चक्कर में आज की युवा पीढ़ी नशेबाज होती जा रही है। सरकार नशे के कारोबार को सख्ती से रोके।

अमृतलाल मार, धार, म.प्र.

जल्दी मिले दंड

हाथरस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है। बेशक निर्भया कांड के बाद कानून सख्त हुए, लेकिन निर्भया जैसी घटनाएं फिर भी कम नहीं हो रही हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि न्याय क्रियान्वयन में कहीं न कहीं देरी है। ऐसे मामलों का फास्ट ट्रैक न्यायालय में तुरंत फैसला होना चाहिए ताकि अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो।

नरेंद्र कुमार, जोगिन्दर नगर, हि.प्र.

सख्ती जरूरी

देश में बलात्कार जैसी घटनाएं भयावह रूप लेती जा रही हैं। लगने लगा था कि निर्भया कांड के बाद ऐसी घिनौनी घटनाओं पर लगाम लगेगी। आज तो छोटे बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे अपराधियों को सिर्फ फांसी ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से दंडित किया जाना चाहिए। केवल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे देने से कुछ फायदा नहीं होने वाला है।

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी

सुरक्षा की टनल Other

Oct 02, 2020

27 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में प्रतिभा ज्योति का लेख ‘बर्फीले मंजर में भी नहीं रुकेगा सफर’ नवनिर्मित अटल टनल का सुखमय मार्ग हिम्मत, लगन, साहस का प्रतीक रहा। यह टनल आवश्यक सहायता राहत सामग्री लाने-ले जाने में जवानों की चुस्त-दुरुस्त सजगता-सुरक्षा एक ऐतिहासिक याद बनकर जन-जन के लिए अविस्मरणीय बनी रहेगी। प्रकृति की बर्फीली ठंडक से सैनिकों को राहत मिलना राष्ट्र का सैन्य बल चीन को पटखनी देने में कामयाब रहेगा।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

टालें चुनाव

बिहार के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी विधानसभा उपचुनाव होने जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कोरोना नगरों, महानगरों, शहरों से लेकर गांवों, कस्बों तक फैलने लगा हैं। ऐसे में आगामी समय में होने वाले चुनाव में निश्चित ही कई लोगों को कोरोना अपनी गिरफ्त में ले लेगा। इस बात की क्या गारंटी है कि चुनाव के दौरान होने वाली रेलमपेल में कोरोना लोगों के लिए जानलेवा साबित नहीं होगा। ये चुनाव न हों तो ही बेहतर है।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.

प्राथमिकता से परहेज

किसान बिल से सब वाकिफ हो गए हैं लेकिन टीवी चैनलाें काे फिलहाल ड्रग्स मामला सुलझाने से फुर्सत नहीं मिल रही। बिहार चुनाव को लेकर कई चैनलों ने अब अपना रुख बिहार की ओर कर लिया है लेकिन बॉलीवुड से बिहार जाते कहीं भी किसान बीच में नहीं आया। किसान आज इस बिल के खिलाफ है। सरकार कह रही है कि एमएसपी खत्म नहीं होगी।

श्वेता चौहान, जालंधर

आत्मघाती लापरवाही

कोरोना वायरस के चलते डॉक्टरों की मानवीय सेवा सराहनीय है। वहीं बिना मास्क के दुकानदार बेखबर अपना व्यापार करते देखे जा सकते हैं। मास्क लगाने वाले लोगों का कुछ ही प्रतिशत है। ऐसे में संक्रमण चेन का टूटना असंभव-सा लग रहा है। मास्क लगाने की प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी कार्रवाई की दरकार है।

संजय वर्मा, मनावर, धार, म.प्र.

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

चीन का खाद्यान्न संकट Other

Oct 01, 2020

चीन में खाद्यान्न संकट गहराता जा रहा है। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए 2013 के क्लीन योर प्लेट अभियान को फिर से लॉन्च किया है। पश्चिमी मीडिया का भी मानना है कि चीनी प्रशासन इस योजना की आड़ में देश में पैदा हुए खाद्य संकट को छिपा रहा है। और भारी खाद्यान्न संकट के बावजूद वह अनाज की भरपूर व्यवस्था करने के बजाय बारूद आयात कर रहा है। जब तक चीन की जनता खुद ही वहां से तानाशाही शासन को उखाड़ कर नहीं फेंक देती तब तक जिनपिंग की विस्तारवादी नीति में कोई सुधार होने वाला नहीं है।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, म.प्र.

समृद्धि की राह

28 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून में सुरेश सेठ का ‘कृषि की आर्थिकी में लौटने में ही समाधान’ लेख कोरोना से तहस-नहस आर्थिकी को पैरों पर खड़ा करने के लिए कृषि की तरफ लौट जाने का सुझाव देने वाला था। एक समय था जब खेतों में काम करने वाले किसान शहरों की तरफ रोजगार की तलाश के लिए दौड़ते थे, लेकिन कोरोना वायरस महामारी तथा लॉकडाउन ने आदमी को फिर से जीवित रहने के लिए खेतों की तरफ लौटने के लिए मजबूर कर दिया है। कृषि की समृद्धि से क्रय-शक्ति बढ़ाकर अन्य आर्थिक क्रियाओं को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।

शामलाल कौशल, रोहतक

बेटियों का दमन

यूपी के हाथरस में फिर से निर्भया काण्ड दोहराया गया है। हालांकि यूपी के हाथरस में दलित युवती के साथ हुई गैंगरेप की घटना में चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। वहीं पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाये जा रहे हैं। अब जरूरी है कि न्याय के लिए इस मामले की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो ताकि गुड़िया-निर्भया की तरह सात साल का लंबा इंतज़ार न करना पड़े। सवाल यह है कि इस देश में बेटियों की बलि कब तक ली जाती रहेगी?

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com