Dainik Tribune : आपकी राय

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Nov 29, 2022

व्यवस्था का मजाक

मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मंत्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विडंबना है कि आम कैदियों के लिए साधारण खाना भी बेस्वाद व जला भुना होता है, वहीं नेताओं के लिए लग्जरी व्यवस्था न्याय प्रणाली के मखौल के साथ ही आम व खास के फर्क को रेखांकित करती है।

सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम, म.प्र.

प्रतिपालन पर निर्भरता

बीते दिन संविधान दिवस मनाया गया। चर्चा हुई कि देश का संविधान सर्वश्रेष्ठ है। निःसंदेह है भी। लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर के कथन को ध्यान रखना चाहिए कि कोई संविधान कितना ही अच्छा क्यों न हो, यदि उसका प्रतिपालन करने वाले अच्छे नहीं होंगे तो वह बुरा सिद्ध होगा। कोई संविधान कितना भी बुरा क्यों न हो, अगर उसका प्रतिपालन करने वाले अच्छे होंगे तो वह अच्छा साबित होगा।

-दीर्घा, चंडीगढ़

टी-20 में निराशाजनक प्रदर्शन Other

Nov 28, 2022

सामान्य ढंग से लें

कोई भी खिलाड़ी अपने खेल में हमेशा बेहतर करने की ही कोशिश करता है। नि:संदेह क्रिकेट खिलाड़ी अच्छी फीस लेते हैं। इसका मतलब यह तो नहीं हो सकता वे पूरी जिन्दगी अच्छा ही अच्छा करें। कई बार बेहतर करने वाले खिलाड़ी शून्य पर चले जाते हैं। हम सबको इसके लिए भी तैयार रहना चाहिए। बेशक अपने पसंदीदा खेल में खिलाड़ी के कमजोर प्रदर्शन पर निराशा होती है, गुस्सा भी आता है, पीड़ा भी होती है परन्तु इन सब को हमें सामान्य ही लेना चाहिए। खेल व खिलाड़ी का पूरा सम्मान करना चाहिए। अच्छे प्रदर्शन भी तो देखने को मिलते रहेंगे।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुग्राम

नयों को मौका मिले

आईपीएल और अन्य मैचों में लगातार खेलने के बावजूद हमारी टीम सेमीफाइनल में शर्मनाक हार के बाद बाहर हो गई। क्रिकेट प्रेमी बेहद निराश हुए और एक बात खलती रही कि इतना स्कोर करने के बाद भी हमारे खिलाड़ी एक भी विकेट नहीं ले पाये। क्या हमारी टीम के खिलाड़ी एक भी विकेट लेने में सक्षम नहीं हैं? यदि नहीं तो हमारे देश में और भी बहुत से क्रिकेट खिलाड़ी हैं जो देश के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के अच्छे प्रदर्शन के लिए टीम में नये युवा खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए तभी हमारी टीम इंडिया और मजबूत बन पाएगी।

सतपाल, करनाल

उम्मीदों पर पानी

टी20 वर्ल्ड कप में हमारे देश की क्रिकेट टीम ने सेमीफाइनल मैच हार कर क्रिकेट प्रेमियों को निराश कर दिया। एक बार फिर से वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की नंबर एक टीम रही है। लेकिन खेल में हर बार हर खिलाड़ी को सफलता ही मिले यह भी संभव नहीं। लेकिन सेमीफाइनल में टीम लापरवाही से खेली। यह कहना भी उचित ही होगा कि टीम में कुछेक कमियां तो जरूर थीं। उम्मीद है कि अगले वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन के लिए हमारे देश की टीम और टीम को चुनने वाले अभी से तैयारी शुरू कर देंगे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

हार का विश्लेषण हो

टी-20 विश्वकप में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। जिससे क्रिकेट प्रेमियों को निराशा का सामना करना पड़ा। सेमीफाइनल में टीम जीत के लिए संघर्ष करती ही नज़र नहीं आई, जिसका परिणाम यह रहा कि टीम इंडिया को इंग्लैंड ने आसानी से पराजित कर दिया। आईपीएल व ऐसे ही अन्य आयोजनों में भाग लेने के कारण टीम इंडिया से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी। जरूरी है कि भारतीय क्रिकेट टीम को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन के लिए तैयार करने के लिए टी-20 विश्वकप में मिली हार के कारणों का गहनता से विश्लेषण किया जाए।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

गेंदबाजों का गलत चयन

टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप की दावेदार भारत की क्रिकेट टीम थी। लेकिन भारतीय टीम का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। न्यूजीलैंड व इंग्लैंड से हारना भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के कई कारण हैं। उनमें प्रमुख हैं -हार्दिक पंड्या को चोट लगने की वजह से टीम का संतुलन गड़बड़ाना। लीग स्टेज के मैचों में प्रमुख भारतीय बल्लेबाजों का फ्लॉप हो जाना। गेंदबाजों का गलत चयन और बायो बबल की थकान भी टीम इंडिया की हार की वजह बनी।

ललित महालकरी, इंदौर, म.प्र.

जिम्मेदारी लें

हार-जीत खेल का अभिन्न अंग है। हर बार जीत की उम्मीद नहीं की जा सकती। मगर कमजोर खेल का प्रदर्शन या बिना लड़े हथियार डाल देना चिंता की बात है। सेमीफाइनल में टीम इंडिया के निराशाजनक खेल ने क्रिकेट प्रेमियों को दुःखी किया है। बेशक दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में शुमार हमारे क्रिकेटरों के लचर खेल के लिए क्रिकेट की पूरी संस्था को जिम्मेदारी लेनी होगी। देश में उभरते क्रिकेट खिलाड़ियों में भी प्रतिभा देखी जा रही है। ऐसे में नये खिलाड़ियों की अनदेखी पर सवाल खड़े होना लाज़िमी है। समय रहते होनहार खिलाड़ियों को संवारा गया होता तो संभवतः ऐसे निराशाजनक प्रदर्शन से बचा जा सकता था।

एमके मिश्रा, रांची, झारखंड

पुरस्कृत पत्र

ऑल राउंडरों की कमी

धमाकेदार शुरुआती लीग मैचेस की जीत के बाद भारतीय क्रिकेट टीम फिसल गई और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों बुरी तरह से हार गई। भारतीय टीम को इस विश्व कप जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था लेकिन टीम की कमजोरी पावर प्ले में ज्यादा रन नहीं बना सकी। स्पिनर्स नहीं चले तो वहीं एक सेट पैटर्न पर काम करना और ऑल राउंडर बल्लेबाजों की कमी, जो बॉलिंग कर सकें, ने उसे विश्व कप जीतने से रोक लिया। वहीं इंग्लैंड टीम ने पावर प्ले में तेजी से रन बनाए और उनके पास आल राउंडर भी काफी थे, जिससे वह विश्व चैंपियन बन गई।

भगवानदास छारिया, इंदौर

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Nov 26, 2022

इंसानियत शर्मसार

कमज़ोर से कमज़ोर इंसान भी किसी पुलिस स्टेशन में जा कर अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ कंप्लेंट कर सकते हैं। लेकिन बेजुबानों के बारे में हम लोग एक बार सोचें ये किसके पास जाएंगे और क्या बोलेंगे। दिल्ली में एक प्रजनन की प्रकिया में चल रहे एक जीव की निर्मम हत्या ने विचलित किया। हम अगर कुछ भी नहीं कर सकते तो मूक जीवों की आवाज़ बनें।

थुपस्तान डोलकर, चंडीगढ़

फुटबाल फीवर

इस वक्त फुटबाल विश्व कप का जादू सर चढ़ कर बोल रहा है। कतर खेल के इस महाकुंभ का आयोजक है। ऐसा पहली बार है कि कोई अरब देश खेल को आयोजित कर रहा है। कतर पहला मुस्लिम देश भी बन गया है जो वर्ल्ड कप का आयोजक है। जब से मेज़बानी मिली है कतर विवादों में रहा है। प्रवासी मजदूरों का अमानवीय हालातों में काम करना और कई लोगों की मौत हो जाना या एेन वक्त पर स्टेडियम पर बियर बेचने पर बैन लगाना विवाद रहा है। जाकिर नाइक के कतर पहुंचने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

लुंडूप नोरबू, पी.यू, चंडीगढ़

सार्थक महोत्सव

अन्तरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2022 कुरुक्षेत्र में शुरू हो गया है। इस महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 29 नवंबर से 4 दिसम्बर तक होंगे। इस अवधि के दौरान गीता पूजन,गीता यज्ञ,अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार,गीता पाठ,संत सम्मेलन,48 कोस के तीर्थों पर गीता महोत्सव को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य हरियाणा की संस्कृति से रूबरू करवाना है।

शिवानी शर्मा, चंडीगढ़

सबके लिए शिक्षा

हाल ही में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में जो फेरबदल किये जा रहे हैं उसे ठीक तो नहीं कहा जा सकता। इससे सरकार के मुफ्त और अनिवार्य व उत्तम िशक्षा का वादा पूरा नहीं होता है। आज भी स्कूलों की दयनीय स्थिति बनी हुई है। स्कूल हैं तो अध्यापक नहीं है। अध्यापक हैं तो बैठने के लिए जगह नहीं है। आज भी गरीब विद्यार्थी को महंगी होती शिक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

वेदपाल राठी, रोहतक

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Nov 25, 2022

गिरेबान में झांके

एक कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा है कि गुजरात चुनाव में मोदीजी को दिख जायेगी उनकी हैसियत। ऐसी टिप्पणियाें से कांग्रेस को बचना चाहिए। उन्हें  मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। यही कारण है कि वर्ष 2014 एवं 2019 के चुनावों या बाद में हुए चुनावों में भी अनर्गल, अमर्यादित भाषा के प्रयोग से कांग्रेस जनता से और दूर चली गई। वही भाजपा अपने कार्यों से जनता के करीब आती जा रही है। कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांक कर अपनी गलतियों का अवलोकन करना चाहिए। 

भगवानदास छारिया,  इंदौर 

बढ़ता प्लास्टिक कचरा

इस साल लेह में आने वाले पर्यटकों की संख्या ने पर्यटन के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लेकिन इस समाचार के साथ ही वहां पर्यटकों द्वारा उपयोग में लाकर फेंकी गई पानी की  खाली बोतल व अन्य प्लास्टिक कचरा बड़ी मात्रा में देखने को आया है। लेह लद्दाख में पर्यटन आय का सबसे बड़ा स्रोत है। ऐसी स्थिति में वहां की सरकार प्रशासन और व्यापारियों का कर्तव्य बनता है कि पर्यटक की कमाई में से कुछ हिस्सा वहां के प्रदूषण को रोकने पर भी खर्च करें। लेह लद्दाख के प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखते हुए और आकर्षण  और पर्यटन के लिए अधिकाधिक सुविधापूर्ण बनाया जाए।

सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम

ट्राॅमा सेंटरों की अनदेखी

तेईस नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘सदमे में ट्रामा सेंटर’ वर्तमान हालातों का वर्णन करने वाला था। जालंधर, पठानकोट, खन्ना, फिरोजपुर तथा फाजिल्का में स्थापित पांच ट्रामा सेंटरों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, मशीनों तथा अन्य सुविधाओं की कमी के कारण पिछले पांच साल से बंद हैं, जबकि इन्हें चलाने के लिए केंद्र सरकार आर्थिक सहायता देती  रही है। पंजाब सरकार को चाहिए कि ट्राॅमा सेंटरों को शिफ्ट करके मुख्य सड़क मार्गों पर लाया जाए। ताकि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के कारण सड़क दुर्घटना में शिकार  हुए लोगों की जान बचायी जा सके। यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाना जरूरी है। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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Nov 24, 2022

प्रशंसनीय अभिव्यक्ति

तेईस नवंबर को दैनिक ट्रिब्यून के संपादकीय पृष्ठ पर विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘समता का समाज ही देश की छवि का मानक’ वास्तविक स्थिति को बयान करने वाला था। आर्थिक विषमता के साथ-साथ देश में सामाजिक असमानता आज भी बड़ी समस्या बनी हुई है। किसी भी राष्ट्र का विकास उसकी एकरूपता पर टिका होता है। असमानताएं विकास में रुकावट तो होती ही हैं, कई तरह के अपराधों की जनक भी होती हैं। विकास की दृष्टि से आज हमारा देश इंडिया और भारत में बंटा नजर आता है। आबादी का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा, चिकित्सा और न्याय का मोहताज बना हुआ है। गांवों से शहरों की तरफ तेजी से होता पलायन देहात के विकास में बाधा है। सटीक अभिव्यक्ति के लिए लेखक को साधुवाद!

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

अमेरिका की दोहरी नीति

यूक्रेन युद्ध के चलते भारत ने तटस्थता का परिचय देते हुए रूस को साफ संदेश दिया है कि यह युद्ध का समय नहीं है। इस समय रूस भी पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत ने रूस से तेल का आयात कर रूसी अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा अवश्य दिया है। नि:संदेह रूस भारत का परंपरागत सहयोगी है तो वहीं अमेरिका ने हमेशा भारत के विरोधी पाकिस्तान का ही साथ दिया है। हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तान को खतरनाक देश बताया तो वहीं उसे एफ-16 लड़ाकू विमानों की मरम्मत के लिए धनराशि भी मुहैया करवाई। इन सब तथ्यों से साबित होता है कि अमेरिका की जो बाइडेन सरकार भारत के लिए विश्वासपात्र तो नहीं कही जा सकती।

अक्षित तिलकराज गुप्ता, रादौर

प्लास्टिक पर प्रतिबंध

सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए इसे प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार का यह फैसला सराहनीय है। लेकिन अभी भी बाजारों में सिंगल यूज प्लास्टिक चोरी-छिपे बिक रही है। सरकार को अभी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सिंगल यूज प्लास्टिक से पृथ्वी में बढ़ रहे प्रदूषण से कमी तो आयेगी ही, साथ ही आसपास में फैली गंदगी अब पहले से कम नजर आ रही है।

वेदपाल राठी, रोहतक

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Nov 23, 2022

असहिष्णु समाज

श्रद्धा हत्याकांड को बहुत दिन भी नहीं गुज़रे कि अब एक नयी घटना सुनने को मिली है। समाचार के अनुसार पिता ने आक्रोश में आकर अपनी बेटी की गोली मारकर हत्या कर दी और उसे ट्रॉली बैग में भरकर यमुना एक्सप्रेसवे पर फेंक दिया। यह ज़रूरी नहीं कि वारदात युवा पीढ़ी या प्रेमियों के बीच ही हो, अपितु यह अब किसी के साथ, किसी के भी द्वारा हो सकती है। क्या कोई कल्पना कर सकता है कि पिता व पुत्री के विश्वसनीय रिश्ते में भी ऐसा भी हो सकता है। आज क्रोध हमारे मस्तिष्क पर इतना हावी हो गया है कि सहिष्णुता की कोई जगह नहीं बची है।

अम्बिका अरोड़ा, चंडीगढ़

फुटबाल का महाकुंभ

इक्कीस नवंबर का संपादकीय ‘जुनून का खेल’ कतर में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2022 पर प्रकाश डालने वाला था। इस आयोजन की मेजबानी एशिया को मिलना दर्शाता है कि आने वाले समय में एशिया महाद्वीप में भी फुटबाल का ऐसा ही जुनून नजर आए जैसा अमेरिका व यूरोप में नजर आता है। हो सकता है कि कतर में फुटबाल के महाकंुभ की चमक के आगे एशिया महाद्वीप में क्रिकेट की चमक कुछ दिनों के लिए फीकी पड़ जाए‍।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

बिखरा विपक्ष

आज विपक्ष बुरी तरह से बिखरा हुआ है, जिसके पास सिर्फ मुफ्त की रेवड़ियों के अलावा कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है। दूसरी ओर भाजपा के पास सत्ता, संगठन की शक्ति, अनुशासन और सिद्धांत के अतिरिक्त हिंदुत्व और राष्ट्रवाद आदि प्रबल मुद्दों के साथ कर्मठ और प्रभावशाली नेता हैं। अजीब बात तो यह भी है कि इन विपक्षी पार्टियों के चुने हुए नेता जल्द ही धन, बल और पद के लालच में तुरंत पाला भी बदल लेते हैं जिससे जनता का विश्वास टूटता है। 

वेद मामूरपुर, नरेला 

घिनौना अपराध

महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली श्रद्धा की हत्या करके उसके 35 टुकड़े कर दिए। यह एक घिनौना अपराध है। यह केवल श्रद्धा का अकेला मामला नहीं है। आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन फिर भी आजकल की युवा पीढ़ी इन सब चीजों को नजरंदाज करती जा रही है। ऐसे दरिंदों को फांसी से कम सज़ा नहीं होनी चाहिए। 

नरेन्द्र कुमार शर्मा, जोगिंद्र नगर

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Nov 22, 2022

लोकतंत्र की शालीनता

उन्नीस नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में अविजीत पाठक का लेख ‘असहमति के सम्मान से समृद्ध होगा लोकतंत्र’ वर्तमान सरकार द्वारा असहमति, विरोध आलोचना, प्रदर्शन, धरना आदि को सहन न करने के कारण आलोचना करने वाला था। ऐसा लगता है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सत्ता शीर्ष के इर्द-गिर्द सारी राजनीति केंद्रित है। लोकतंत्र की सुंदरता और शालीनता विपक्ष तथा अलग-अलग विचारधाराओं को सम्मानजनक स्थान देने, उनके सुझावों पर अमल करने में समझी जाती है।

शामलाल कौशल, रोहतक

शांति की पहल

ग्रुप 20 देशों के संगठन की कमान भारत के प्रधानमंत्री को सौंपी गई है। यह भारत के लिए ऐतिहासिक, यादगार एवं गौरवशाली बात है। भारत एक शांतिप्रिय देश है एवं विश्व में शांति कायम हो यह भारत की नीति है। अध्यक्ष होने के नाते भारत की यह पुरजोर कोशिश होगी कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामरिक विवादों के कारण युद्ध की स्थिति को किसी भी हालत में रोका जा सके।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

प्रदूषण रोकने में हमारी जिम्मेदारी Other

Nov 21, 2022

कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों

आज प्रदूषण की समस्या एक भयावह रूप ले चुकी है परिणामस्वरूप प्रदूषित वायु के कारण अनेक विकार मानव को पीड़ित कर रहे हैं। आज शहरों, गांवों में लोग कूड़े-कर्कट और प्लास्टिक आदि के ढेर में अनावश्यक रूप से आग लगाकर वायु को प्रदूषित कर रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण क्या कम था कि जंगलों में घास के ढेर को आग लगाकर जीवित वृक्षों तक को जलाने में नहीं चूकते। सरकार को दोष देना और अपने कर्तव्य से विमुख होना आज लोगों की मानसिकता बन गई है। जब तक प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक नहीं होगा तब तक वायु प्रदूषण ऐसे ही बढ़ता रहेगा।

अशोक कुमार वर्मा, कुरुक्षेत्र

मिलजुल कर समाधान

साल के अंतिम महीनों में दिल्ली हरियाणा व आसपास के क्षेत्र प्रदूषण के शिकार होते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्थिति पर पहुंचने पर सरकारों के तुगलकी फरमान जारी हो जाते हैं। उद्योग निर्माण व यातायात पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं जिससे सबसे ज्यादा श्रमिक वर्ग प्रभावित होता है। प्रशासन और आम नागरिक दोनों को मिलकर समाधान खोजना होगा। हर नागरिक को चाहिए कि अपने आसपास ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएं और उनका रखरखाव भी करें। सरकारी योजना और कानून तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक जागरूकता और जनभागीदारी न हो।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

सोच विकसित करें

देश का पर्यावरण लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। पराली जलाना इस समस्या का एकमात्र कारण नहीं है। शायद पराली जलाने से उतनी जहरीली गैसें नहीं निकलती होंगी जितनी जहरीली फैक्टरियों और ईंट-भट्ठों की चिमनियों तथा शहरों में जलते कूड़े के ढेरों से निकलती हैं। सड़कों पर बढ़ता वाहनों का दबाव स्पष्ट करता है कि वायु प्रदूषण में भंयकर इजाफा हो रहा है। पराली जलाना हर लिहाज से गलत है क्योंकि इससे न सिर्फ वायु प्रदूषित होती है, आग से कई तरह के जीव-जन्तुओं का जीवन भी समाप्त होता है। पर्यावरण को लेकर व्यक्तिगत सोच भी विकसित करनी होगी।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

अनियंत्रित दोहन पर रोक

आज बढ़ता औद्योगिकरण, आबादी व सड़कों पर निरंतर बढ़ते ट्रैफिक बोझ से भी प्रदूषण हो रहा है। इसके लिए हम अपने निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक, सीएनजी व हरित ईंधन से चलने वाले वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑड-ईवन नियम, वाहनों के प्रदूषण की समय समय पर जांच, साइकिल को प्राथमिकता देने, सप्ताह में कम से कम एक दिन बड़े वाहनों पर प्रतिबंध के साथ यदि भूमि, जल, वन, वायु इत्यादि के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगे तो कोई दोराय नहीं कि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता है।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

जागरूकता अभियान

राजधानी दिल्ली तथा हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ रहा प्रदूषण संपूर्ण मानवता के लिए चिंता का विषय है। प्रदूषण कम करने में सहयोग करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। धुआं उगलने वाली औद्योगिक फैक्टरियों, प्लांटों का निर्माण कार्यकाल घटा देना चाहिए। कार्यालयों में आवागमन हेतु निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक वाहनों को प्रयोग में लाना चाहिए। अधिक से अधिक पेड़ लगाना और उनका संरक्षण अनिवार्य होना चाहिए। सरकार को खेतों में पराली न जलाने के फायदों के प्रति किसानों, आमजन के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

नियमों का पालन

प्रदूषण कम करने में नागरिकों की जिम्मेदारी प्रमुख है बाद में शासन की आती है। नागरिक जितनी सजगता के साथ वस्तुओं के इस्तेमाल के बाद कचरा प्रबंधन प्रणाली को अपनाएंगे, सरकार का बोझ कम होता जाएगा। प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल नागरिक ज्यादा करें तो प्लास्टिक कचरा कम होता जाएगा। सौर ऊर्जा तकनीक का ज्यादा प्रयोग करने से बहुत-सी प्रदूषण की समस्याएं खत्म हो सकती हैं। सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने से ऊर्जा समस्या एवं प्रदूषण बहुत हद तक कम किया जा सकता है। प्रशासन के बनाए नियमों का नागरिक पूरी तरह पालन करें तो प्रदूषण समस्या हल हो सकती है।

प्रदीप गौतम सुमन, रीवा, म.प्र.

पुरस्कृत पत्र

प्रदूषण मुक्त जीवनशैली

स्वच्छ ईंधन का प्रयोग, वाहनों का उचित रख रखाव, कूड़े को जलाने के बजाय उसका उचित निपटारा, सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग, निर्माण सामग्री को ढक कर रखने जैसे सामान्य तरीके अपनाकर नागरिक प्रदूषण कम करने में अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं। शिक्षित और जानकर होने के बावजूद विलासिता के प्रति प्रेम के कारण देश का संपन्न वर्ग अक्सर संसाधनों की बर्बादी करता है। सबसे पहले इस संपन्न वर्ग को अपनी कम्फर्ट जोन से बाहर निकल कर प्रदूषण मुक्त जीवनशैली अपनानी होगी।

बृजेश माथुर, गाजियाबाद

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Nov 19, 2022

व्यक्ति केंद्रित राजनीति

सोलह नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘जनतांत्रिक परंपराओं से ही लोकतंत्र’ व्यक्ति केंद्रित राजनीति को देश के लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बताने वाला था। सत्ता शीर्ष का अधिकांश समय चुनावी सभाओं में स्टार प्रचारक के तौर पर गुजर जाता है। हिमाचल में उन्होंने मतदाताओं से उनके नाम पर उम्मीदवारों को वोट देने के लिए कहा। कांग्रेस के शासनकाल में भी चुनावों में पार्टी के नाम पर मतदाताओं को वोट देने के लिए कहते रहे हैं। नेहरू-गांधी परिवार का कांग्रेस पर वर्चस्व ही पार्टी की वर्तमान स्िथति का कारण है। जनतांत्रिक परंपराओं का निभाया जाना लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है। मुख्य मुद्दों को छोड़कर रेवड़ियां बांटकर लोकतंत्र की रक्षा नहीं की जा सकती है।

शामलाल कौशल, रोहतक

सराहनीय सुझाव

माननीयों द्वारा आपत्तिजनक बयानों पर अंकुश लगाने के लिए एक नये कानून के लिए संसद को सुप्रीम कोर्ट का सुझाव सराहनीय है। राजनेताओं द्वारा आपत्तिजनक बयानों का प्रयोग होता रहता है। एक कानून होने से यह सुनिश्चित होगा कि राजनेता अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे। हेट स्पीच का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, लेकिन विस्तृत कानूनों की कमी के कारण लोग फ्रीडम ऑफ स्पीच के अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करते हैं। लोगों को भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ही उचित कानून भी बनाया जाए।

भृगु चोपड़ा, पंचकूला

राष्ट्र का धन

‘कब तक पराया धन’ संपादकीय में उल्लेख है कि बेटी अब पराया धन नहीं रहीं, ऐसे में अपनी पुरानी सोच को नकारें, क्योंकि बेटी ही सबसे अधिक विश्वसनीय और सेवाभावी होती है। विवाहित स्त्री दो परिवार के बीच एक सेतु बनकर जोड़ती ही है। गौरतलब है कि वर्तमान में महिलाएं कुछ क्षेत्रों में आगे हो चुकी हैं किंतु संख्या की दृष्टि में उनका अनुपात कम होना चिंतनीय विषय है। वस्तुत: यह सब का राष्ट्रीय कर्तव्य है कि बेटियों को लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में भागीदार बनायें ।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

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Nov 18, 2022

प्रतिबंध लगाना उचित

पंद्रह नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘बंदूक संस्कृति पर अंकुश’ गन कल्चर पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी उपायों का वर्णन करने वाला था। सरकार ने बंदूक संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए हथियारों के लिए दिए गए लाइसेंस की समीक्षा करने का जो निर्णय किया है, वह सराहनीय कदम है। वहीं हिंसा तथा गन कल्चर से संबंधित गीतों तथा हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाना भी उचित है। इस सीमावर्ती प्रदेश में शांति तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

जीवन स्तर सुधरेगा

सामान्य जाति के लोगों के लिए शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है, इससे न केवल आर्थिक रूप से विपन्न होने के बावजूद आरक्षित वर्ग सरीखी सुविधा पाने से वंचित रहे सवर्ण गरीबों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि जातिगत आधार पर होने वाले आरक्षण के विरोध की तीव्रता भी कम होगी। सरकार इस आरक्षण के जरिए समाज में बराबरी लाने की एक अच्छी कोशिश कर रही है।

समराज चौहान, कार्बी आंग्लांग, असम

विसंगतियों का समाज

दिल्ली के छतरपुर में एक नवयुवती के प्रेमी ने उसकी नृशंस ढंग से 35 टुकड़े करके हत्या कर दी। इस बर्बरता ने चंगेजखान, तैमूर लंग और नादिरशाह की क्रूरता की याद ताजा कर दी। ऐसी मध्ययुगीन पाश्विकता सभ्य समाज के लिए अभिशाप है। समानता के नाम पर अतिस्वच्छंदता भारतीय समाज को किस तरह खोखला कर रही है, यह घटना इसका जीता जागता उदाहरण है।

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी

सोची-समझी साज़िश

श्रद्धा हत्याकांड ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी आफ़ताब की हैवानियत के रोज़ नये खुलासे हो रहे हैं। आफ़ताब के खुलासे से सिद्ध होता है कि यह कोई एक दिन के झगड़े का परिणाम नहीं बल्कि एक सोची-समझी साज़िश थी।

अम्बिका अरोड़ा, चंडीगढ़

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Nov 17, 2022

सकारात्मक हो नजरिया

दैनिक ट्रिब्यून में 14 नवंबर के संदर्भ में ‘रहम की रिहाई’ संपादकीय का निष्कर्ष कहा जा सकता है कि सजा काटकर अपराधी जेल से बाहर निकलता है तो निश्चित रूप से उसका व्यवहार शेष बचे जीवन में भी वैसा ही रहना चाहिए जिस आचरण की वजह से उसे रिहा किया गया है। इस घटना में राजीव गांधी को जिस क्रूरतम तरीके से मारा गया था वह अमानवीय था। खैर, सजा का एक मतलब आचरण सुधारना भी होता है और शायद यही वजह रहती है कि कोर्ट अपराधियों को समय से पूर्व या सजा कम करके सुधारने का मौका देता है। सारे मामले को आज के हालातों में सकारात्मक नजरिये से देखा जाना जरूरी है।

अमृतलाल मारू, महालक्ष्मी, नगर इंदौर

जनसंख्या विस्फोट

विश्व में बढ़ती जनसंख्या विस्फोटक स्थिति में आ चुकी है। जनसंख्या वृद्धि के कारण ही आज विश्व में पीने के पानी की समस्या अंतर्राष्ट्रीय प्रश्न बन चुकी है। विश्व के अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संगठनों को एवं सभी देशों की सरकार और समाजशास्त्रियों को अवश्य ही इस पर विचार करना होगा। भारत जैसे देश में जनसंख्या वृद्धि के कारण ही सामाजिक एवं आर्थिक विषमता की खाई ने विकराल रूप धारण कर लिया है। देश में बेरोजगारी का कारण भी जनसंख्या ही है।

विरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

संदेश मिले

यह बेहद जरूरी है कि नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किया जाए। ताकि उसके प्रत्यर्पण से उन सभी फरार कानून तोड़ने वालों को संदेश जाएगा जो मानते हैं कि वे भारत के बाहर सुरक्षित हैं। बड़े अपराधी अपराध करने के पश्चात देश से भाग जाते हैं। और सोचते हैं कि वे अब सुरक्षित हैं। कानून का मखौल उड़ाने वालों को पकड़ने के लिए सरकार को सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए।

भृगु चोपड़ा, जीरकपुर

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आपकी राय Other

Nov 16, 2022

पद की गरिमा

चौदह नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित समाचार ‘सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस यूयू ललित बोले- पूर्व सीजेआई द्वारा राज्यसभा सदस्यता स्वीकार करना सही नहीं’ विषय पर चर्चा करने वाला था। ललित के विचारों से पूर्णतया सहमत हुआ जा सकता है। सेवानिवृत्ति के बाद इस पद की गरिमा बनाए रखने के लिए राजनीति में प्रवेश करना न्याय संगत नहीं लगता। जिस तरह राष्ट्रपति का सेवानिवृत्त होने के बाद किसी राजनीतिक पद को स्वीकार करना शोभनीय नहीं है वही बात सीजेआई पर भी लागू होती है। सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी उच्चतम अधिकारी को सक्रिय राजनीति में नहीं जाना चाहिए, इससे पद की गरिमा पर आंच आती है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


आपत्तिजनक टिप्पणी

भारत के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति के प्रति पश्चिम बंगाल के एक मंत्री द्वारा नंदीग्राम के एक कार्यक्रम में आपत्तिजनक टिप्पणी शर्मनाक एवं संपूर्ण आदिवासी समाज के प्रति निम्नस्तरीय मानसिकता की परिचायक है। संवैधानिक पद पर बैठे हुए एक जिम्मेदार व्यक्ति को इस तरह से अमर्यादित आचरण करना शोभा नहीं देता। क्या राष्ट्रपति का आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधि होना गुनाह है। क्या उनका परंपरागत पहनावा गुनाह है।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली


शीघ्र सज़ा मिले

दिल्ली में एक शख्स ने अपनी प्रेमिका की हत्या के 35 टुकड़े किये। इन दिनों जहां लोग लिव इन रिलेशनशिप में रहना पसंद करते हैं, वहीं अब सुरक्षा का सवाल भी खड़ा होता जा रहा है। केवल एक-दूसरे के साथ रहना महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि एक-दूसरे को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सुरक्षा किसी भी रिश्ते का पहला अहम पैमाना होता है। जांच में यह बात भी सामने आई कि इस प्रेमी जोड़े में अक्सर झगड़ा होता रहता था। ऐसे जघन्य अपराध के लिए फास्ट ट्रैक द्वारा शीघ्र सजा के तौर पर सीधी फांसी मिलनी चाहिए।

राजबीर सिंह, कोटली गाज़रा

आपकी राय Other

Nov 15, 2022

जवाबदेही तय हो

ग्यारह नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘हादसे, संवेदना और जवाबदेही का प्रश्न’ गुजरात में मोरबी में मच्छु नदी पर पुल के गिर जाने से सैकड़ों मासूम लोगों के मारे जाने पर बड़ी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर सवालिया निशान लगाने वाला था। पीड़ितों को मुआवजा देकर और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कमेटी स्थापित करके इंसाफ के नाम पर बहलाने की कोशिश की जाती है। सवाल उठता है कि जब इसको चालू किया गया तो इसके ठीक होने का सर्टिफिकेट क्यों नहीं लिया गया। पुल पर क्षमता से ज्यादा लोगों को क्यों जाने दिया गया? इस बात की जवाबदेही तय होनी चाहिए। 

शामलाल कौशल, रोहतक

अंकुश की पहल

यूक्रेन पर परमाणु हमले की तैयारी में रूस, समाचार चिंता का विषय है। यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव गहराता जा रहा है। वर्तमान में परमाणु, जैव एवं रासायनिक हथियार प्रणाली के इस्तेमाल की सोच ज्यादा विकसित हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बैठक में विश्व शांति के लिए परमाणु व जैविक हथियारों पर अंकुश की पहल की जानी चाहिए। 

संजय वर्मा, मनावर, धार

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मोरबी पुल हादसे के सबक Other

Nov 14, 2022

आपराधिक लापरवाही

मोरबी पुल हादसे के पीछे कई चरणों में नियमों की अनदेखी व लापरवाही हुई है। इस पुराने पुल के पुनर्निर्माण व रख-रखाव का ठेका एक ऐसी कम्पनी को दे दिया गया जिसका इस क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं था। खुले टेंडर आमंत्रित करने की प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया। लेकिन कुछ माह बाद ही बिना सुरक्षा निश्चित किये इसे आम लोगों के लिए खोलना एक आपराधिक लापरवाही ही थी। पुल की क्षमता से अधिक लोगों को जाने दिया गया। मुनाफे का लालच भी इस दुर्घटना का एक कारक रहा है। इस हादसे के जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर उन के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करना आवश्यक है।

शेर सिंह, हिसार

साझी जवाबदेही

गुजरात में मोरबी पुल पर जो हादसा हुआ, उसके लिए सरकार, प्रशासन और आमजन बराबर के जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी गलती सरकार की है, उसने क्यों इतने पुराने झुलते पुल की जगह नया पुल बनाने की कोशिश नहीं की। दूसरा, प्रशासन ने क्यों बिना जांच पड़ताल के इस पुल पर भीड़ इकट्ठी होने दी। क्यों नहीं हम भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतते। इस हादसे से तो सरकारों, प्रशासन और आमजन को सबक लेना चाहिए। भविष्य में ऐसी कोई दुर्घटना न हो, इसके लिए सतर्कता, सावधानी और सख्त कायदे कानून बनाने की जरूरत है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

तंत्र की काहिली

मन की दुर्बलता, नैतिकता के ह्रास से मानवता खतरे में है। गुजरात में मोरबी पुल हादसा इस बात का पुख्ता प्रमाण है। इस घटना ने प्रशासन की काहिली को उजागर किया है। प्रशासन की नाक के नीचे पुल की मरम्मत से लेकर भीड़ के नियंत्रण पर बरती गयी लापरवाही व सुरक्षा की अनदेखी के कारण निर्दोष जनता काल के गाल में समा गयी। इस भयंकर चूक के लिए सभी संबंधित बराबर के दोषी हैं। अभी भी इस चूक के लिए लीपापोती होती नजर आ रही है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

गजानन पाण्डेय, काचीगुडा, हैदराबाद

जनता भी जागे

गुजरात के मोरबी शहर में एक केबल पुल के टूट जाने के कारण बड़ी संख्या में लोगों का मारा जाना संबंधित लोगों द्वारा अपने कर्तव्य में बरती गई लापरवाही का ही परिणाम नजर आता है। इस पुल के निर्माण के बाद इसे फिटनेस प्रमाण पत्र दिये बिना आम लोगों के उपयोग के लिए खोलना, क्षमता से कहीं अधिक संख्या में लोगों का पुल पर उपस्थित होना आपराधिक लापरवाही ही कही जायेगी। इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं की जवाबदेही तय की जाए तथा ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आम जनता को जागरूक करने की भी आवश्यकता है।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

रसूखदारों पर कसे नकेल

गुजरात में मोरबी पुल हादसा इसके रखरखाव, संचालन व मरम्मत आदि में स्थानीय अधिकारियों की घोर लापरवाही का जीता जागता उदाहरण बन चुका है। परिणामस्वरूप सैकड़ों बेकसूर लोगों को नाहक ही जान गंवानी पड़ी है। अधिक भीड़भाड़ अक्सर जानलेवा ही साबित होती हैं। इस अपराध में शामिल बड़े रसूखदार लोगों की जवाबदेही तय करना तो बनता ही है, साथ ही भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए देश भर के तमाम सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा नियमों की अनुपालना की जांच-पड़ताल करना भी जरूरी है।

देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद

बख्शा न जाये

गुजरात में एक केबल पुल के गिर जाने से सैकड़ों निर्दोष लोगों का मारा जाना एक आपराधिक लापरवाही है जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। ठेका ऐसी कंपनी को दिया गया जो कि अनुभवहीन थी। सवाल उठता है कि मरम्मत के बाद नगरपालिका ने पुल के लिए कोई एनओसी क्यों नहीं जारी की। इस सारे मामले में राजनीतिक दबाव तथा भ्रष्टाचार की बू आती है। भविष्य में इस किस्म के हादसे न हों, इसके लिए सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी गुनहगार को बक्शा नहीं जाए! लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त तथा त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

पुरस्कृत पत्र

चौकस तंत्र बने

गुजरात के मोरबी में केबल पुल टूटने के हादसे से यह बात साफ तौर पर जाहिर होती है कि देश में जितनी भी पुरानी संरचनाएं हैं उनका तकनीकी तौर पर पूरी ईमानदारी के साथ मूल्यांकन होना चाहिए। सौ वर्ष से पुराने बिल्डिंग, पुल, ऐतिहासिक स्मारक आदि सभी स्थानों पर क्षमता से अधिक लोगों का प्रवेश वर्जित होना चाहिए। देश में संरचनाओं के रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसियां हादसे के बाद अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। जिम्मेदारों पर सख्त कानूनी कार्रवाई तुरंत होनी चाहिए। ऐसे हादसे रखरखाव में कोताही एवं तकनीकी चूक के परिणाम स्वरूप होते हैं। अतः रखरखाव के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों को ही नियुक्त किया जाना चाहिए।

ललित महालकरी, इंदौर, म.प्र.

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Nov 12, 2022

संकट की आहट

दस नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘दुनिया बचाने का वक्त’ मिस्र के शरम अल शेख में आयोजित पर्यावरण सम्मेलन में एंटोनियो गुटेरेस की पर्यावरण संकट के कारण मानवता के खतरे की चेतावनी के परिप्रेक्ष्य में है। विडंबना है कि जीवाश्म ईंधन का प्रयोग करने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां कार्बन का उत्सर्जन करके ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा रही हैं, लेकिन इस पर नियंत्रण के लिए विकसित देश खुद पल्ला झाड़कर विकासशील देशों को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर तथा बर्फ के पहाड़ पिघल रहे हैं, अगर ऐसा चलता रहा तो भविष्य में नदियों में पानी नहीं मिलेगा, जल संकट के कारण जीना मुश्किल हो जाएगा।

शामलाल कौशल, रोहतक

भविष्य की चिंता

दुनिया की विभिन्न यूनिकॉर्न कंपनियों में हालिया लेआउट भविष्य के लिए चिंता का विषय है। यह रोजगार सूचकांक में गिरावट को बढ़ा रहा है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। विदेशों पर निर्भरता देश के युवाओं के लिए अधिक समस्याएं ला रही है। सरकार को इस मामले पर कार्रवाई करनी चाहिए और अधिक संख्या में रोजगार पैदा करने के तरीके अपनाने चाहिए। साथ ही युवा प्रतिभाओं को शामिल करके भारतीय स्टार्टअप को रोजगार के क्षेत्रों में जोर देना चाहिए।

आयुषी उपाध्याय, चंडीगढ़

अब आगे देखें

भारत अब टी20 विश्व कप सीरीज का हिस्सा नहीं है। हालांकि फाइनल में पहुंचने का एक बड़ा मौका था लेकिन हम चूक गये। क्रिकेट प्रेमियों में काफी मायूसी दिखी। जीत या हार खेल का हिस्सा है। यह सच है कि हम भारतीय होने के नाते जीत का जश्न मनाते हैं। हमें टीम का समर्थन और उसे मजबूत करने की जरूरत है ताकि अगली बार जीतने के लिए कड़ी मेहनत की जा सके।

हर्षिता सागर, यमुनानगर

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Nov 11, 2022

मिलकर काम करें

दस नवंबर का संपादकीय ‘दुनिया बचाने का वक्त’ पूरी दुनिया में बढ़ती जा रही पर्यावरण की समस्या पर प्रकाश डालने वाला था। इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस द्वारा दी गई चेतावनी अत्यधिक सटीक है। दुनिया के विकसित देश जीवाश्म ईंधन का प्रयोग अधिक मात्रा में करते हैं तथा पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए वांछित प्रयास नहीं करते। विकसित देशों ने तमाम उद्योगों के जरिये मोटी कमाई करके प्रदूषण को खराब कर दिया है। अब विकासशील देशों पर जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को बंद करने के लिये दबाव बना रहे हैं। अतः जरूरी है कि दुनिया के अमीर व गरीब देश मिलकर पर्यावरण को बचाने की दिशा में काम करें।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

विज्ञान से समाधान

दस नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शांति और विकास भी है। आज विज्ञान ने इंसान की जिंदगी बहुत आरामदायक बना दी है। वैसे विज्ञान और नयी तकनीक का प्रयोग उचित तरीके से किया जाए तो वरदान है, अन्यथा अभिशाप। आधुनिक हथियारों के भयंकर परिणामों को देखते हुए सभी देशों को भारत की तरह शांति की राह पर चलते हुए सभी मुद्दे हल करने चाहिए। आज विज्ञान को जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखकर काम करना होगा।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

कसौटी पर खरे

छह नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून लहरें अंक में ‘॓जिंदगानी की खबर हकीकत से बेखबर’ लेख पत्रकारिता के क्षेत्र में जोखिम भरे दायित्व वहन करने का सुरुचिपूर्ण विश्लेषण रहा। कोरोना काल के दौरान डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मियों का त्याग, बलिदान व सेवा सही मायनों में कसौटी पर खरे उतरे। समाचारों में स्वच्छ पारदर्शिता लाने का फर्ज पत्रकार के लिए समाज राष्ट्र को जागरूक बनाने हेतु जरूरी है। तथ्यपरक प्रकाशित समाचार प्रबल साबित होते हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Nov 10, 2022

पारदर्शिता का लोकतंत्र

आठ नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘लोकतंत्र की जागीर’ पंजाब में अकाली दल द्वारा एकमत से एसजीपीसी का अध्यक्ष मनोनीत किए जाने की परंपरा को चुनौती देने का विश्लेषण करने वाला था। अब अकाली दल सत्ता पर काबिज नहीं है। बादल परिवार राजनीतिक तौर पर कमजोर पड़ गया है। इसके बावजूद बीबी जगीर कौर ने पार्टी लाइन से हटकर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया है। बीबी जगीर कौर को अनुशासन समिति ने दल से निकाल दिया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद संगठन में पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम करने का प्रयोग माना जा सकता है।

शामलाल कौशल, रोहतक

बढ़ता प्रदूषण

भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की ज्वलंत स्थिति बन रही है। प्रदूषण का मुख्य कारण पराली जलाना बताया जा रहा है। लोग सांस की समस्याओं से पीड़ित हैं। यह स्वास्थ्य बनाम अर्थव्यवस्था की स्थिति पैदा कर रहा है क्योंकि प्रदूषण के कारण निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाने से दैनिक वेतनभोगी बेरोजगार हो जाएंगे। वैसे दक्षिणी-पूर्वी हवाओं से राजधानी को प्रदूषण से थोड़ी राहत जरूर मिली है। हवा की दिशा बदलने के कारण प्रदूषण के स्तर में भी कमी आई है। निस्संदेह, सरकार स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार के लिए दिशानिर्देश ला रही है लेकिन रोजगार के मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

पारुल गुप्ता, फतेहगढ़ साहिब

निष्पक्ष हो जांच

सरकार किसी भी दल की हो, कहीं भी हादसे होते हैं तो उस पर ओछी नुक्ताचीनी वाली सियासत से बचना चाहिए। ऐसे दुखद मौके पर एक-दूसरे पर दोषारोपण की सियासत से कोई अच्छा संदेश नहीं जाता है। न ही पीड़ितों पर कोई मरहम लगता है। साथ ही मोरबी जैसे हादसों के मूल कारणों की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए। ऐसे हादसों के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन 

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Nov 09, 2022

हमारी जिम्मेदारी

दिल्ली और आसपास के नगरों में 300 से ऊपर एक्यूआई का स्तर पहुंचने के बावजूद पराली भी जल रही है। संपादकीय ‘जिद का धुआं’ में उल्लेख है कि केंद्र और राज्य सरकारें भी परस्पर आरोप लगाने के बजाय प्रदूषण रोकने की दिशा में सकारात्मक और कठोर कदम उठाएं, क्योंकि किसानों की मजबूरी है कि वह समय पर खेत तैयार करें और जलाने के अलावा उनके पास कोई अच्छा विकल्प मौजूद नहीं है। प्रदूषण से परेशान प्रत्येक नागरिक यदि जिम्मेदारीपूर्वक पर्यावरण को स्वच्छ नहीं रख कर किसी अन्य को दोषी बताएंगे तो फिर हमें भी शासन और प्रशासन से सहयोग या सुविधा की कोई अपेक्षा नहीं करना चाहिए।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन 


स्वागतयोग्य फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में प्रवेश में 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले ईडब्ल्यूएस कोटे की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह अन्य श्रेणियों को दिए गए आरक्षण का उल्लंघन नहीं करता है और संविधान के मूल ढांचे का भी उल्लंघन नहीं करता है। अदालत का फैसला स्वागतयोग्य है। इसके अलावा, सरकार को ईडब्ल्यूएस कोटे के लोगों की पात्रता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शुल्क और आयु में छूट का भी संज्ञान लेना चाहिए।

आयुषी उपाध्याय, चंडीगढ़ 


विकास में बाधा

हिमाचल और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। चुनाव के समय जो राजनीतिक दल अपना-अपना घोषणा पत्र पेश करते हैं, उनको मतदाताओं की जरूरतों का विश्लेषण करना चाहिए। घोषणा पत्र में मुफ्त में पैसे देने या सुविधाएं देने के लोकलुभावनी बातें नहीं होनी चाहिए। मुफ्तखोरी बहुत-सी समस्याओं को जन्म तो देती ही है, साथ ही यह देश के विकास लिए भी बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर सकती है। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Nov 08, 2022

जीत के मायने

सात नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून मे प्रकाशित खबर ‘दादा के ‘हाथ’ से बीजा, पोते ने कर-‘कमलों’ से काटा’ में पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पौत्र भव्य बिश्नोई की शानदार जीत का विश्लेषण करने वाली थी। हरियाणा में य जीत भाजपा की लोकप्रियता भी उजागर करती है। कांग्रेसी नेताओं में आपसी मतभेद रहे, वहीं इनेलो तथा आप में मतदाताओं की कोई दिलचस्पी नहीं है। भाजपा की जीत का मतलब है कि आलोचना के बावजूद मोदी अभी भी जनता की पसंद हैं। अगर कांग्रेस ने अपनी पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा तो आगामी विधानसभा और 2024 के संसदीय चुनावों में उसकी राह मुश्किल होगी। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

राह निकालें

छह नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित खबर ‘हरियाणा में पुराने डीजल वाहनों पर अस्थाई रोक’ दिल्ली की तरह हरियाणा में भी बढ़ते वायु प्रदूषण का वर्णन करने वाला था। इसका मुख्य कारण पंजाब तथा हरियाणा के किसानों द्वारा पराली जलाना तो माना ही जाता है लेकिन इसके अलावा कारणों में बड़ी संख्या में वाहनों का प्रयोग, भवन तथा सड़क निर्माण, माइनिंग, उद्योग-धंधे आदि शामिल हैं। हरियाणा के जिन क्षेत्रों में एक्यूआई गंभीर स्थिति में है वहां पर बच्चों के स्कूल बंद कर देने चाहिए। वाहनों के सम-विषम तरीके को इस्तेमाल करना चाहिए। 

शामलाल कौशल, रोहतक

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हरियाणा सरकार के आठ साल Other

Nov 07, 2022

महंगाई-भ्रष्टाचार मुद्दा

सबका साथ-सबका विकास और हरियाणा एक-हरियाणवी एक के सिद्धांत पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आठ सालों में तमाम फैसले लिये। इस डबल इंजन सरकार के फैसले ऐसे हैं, जो प्रदेश की जनता तथा भाजपा शासित राज्य सरकारों के लिए उदाहरण बन गए हैं। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता, गांव में लाल डोरा समाप्त करना, अधिग्रहण की बजाय किसानों से भूमि खरीदना, एमएसपी पर फसल खरीद, ऐसे उदाहरण्ा सरकार की कामयाबी को दर्शाते हैं। लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद सरकार चुनाव में जीत के लिए मोदी के भरोसे है। आज भी महंगाई और भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है।

गणेश दत्त शर्मा, होशियारपुर

बिना सिफारिश के नौकरी

हरियाणा में भाजपा सरकार के 8 साल में बहुत से काम हुए। खट्टर सरकार के दौरान सरकारी व निजी नौकरियां बिना सिफारिश व पैसे के लोगों को मिली। उद्योगों के विकास के दरवाजे भी खुले। आमूल चूल परिवर्तन कर सिस्टम बनाकर जनसमस्याएं दूर करने का प्रयास भी किया गया। पढ़ी-लिखी पंचायतों के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी गई। इन सबके साथ इस बात को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि बेरोजगारी की दर आज हरियाणा में सबसे ज्यादा है। जाट आरक्षण आंदोलन में हुई अराजकता के लिए भी सरकार ही जिम्मेदार है। एसवाईएल का मुद्दा सुलझाने में भी सरकार नाकामयाब ही रही है।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

सुशासन के संकेत

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में अनेक विकास योजनाओं और परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। भूस्वामित्व योजना संग गांवों में लाल डोरा समाप्त किया। परिवार पहचान-पत्र, मेरी फसल मेरा ब्योरा शुरू किया गया। महाग्राम और ग्राम दर्शन के बाद नगर दर्शन पोर्टल योजना को शुरू किया गया। 24 घंटे बिजली की व्यवस्था की गई। कृषि, हथकरघा उद्योग, एग्रो इंडस्ट्रीज को बढ़ावा और अनुदान, मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना आदि कई योजनाएं हैं। रोजगार प्रदान करने में पारदर्शिता, रिश्वतखोरी पर अंकुश सुशासन के संकेत हैं।

जयभगवान भारद्वाज, नाहड़

जमीनी स्तर पर दिखे

मनोहर सरकार ने आठ साल के दौरान सुशासन और नई योजनाओं को मूर्त रूप देने का जितना दावा किया, उतना जमीनी स्तर पर दिखाना कठिन कार्य है। जो व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं वे तो सरकार के साथ होंगे और जो कोरोना के शिकार हुए और समय पर दवा-सुविधाएं नहीं मिली, वे खिलाफ होंगे। विपक्ष के साथ वही होंगे, जिन्हें महंगाई, बेरोजगारी, प्रदूषण और पराली जलाने से संबंधित परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि इसी ढर्रे पर सरकार चलती रही तो इस बार पूर्व से अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। हां, खेलों के क्षेत्र में सरकार का प्रदर्शन उम्दा रहा है।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

डबल इंजन सरकार

भाजपा की डबल इंजन सरकार हरियाणा में निश्चित ही अच्छे कार्य कर रही है। हरियाणा में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, सड़कें, फुटपाथ, अंडरपास, ओवरब्रिज, नदी, नहर और नाले के साथ पौधरोपण की जरूरत है। इसके अलावा गांवों और शहरों का विकास भी अत्याधुनिक योजना के आधार पर होना जरूरी है। किसान, मजदूर और युवाओं की मूलभूत समस्याओं के समाधान की जरूरत है। वहीं सुधार के लिए नेताओं द्वारा अपने क्षेत्रों का निरीक्षण और जनशिकायतों का स्वागत भी जरूरी है।

वेद मामूरपुर, नरेला

मोदी का भरोसा

वर्ष 2019 में भाजपा को बहुमत से दूर रख कर जनता ने अपनी नाराजगी जता दी थी। फिर भाजपा ने जजपा के साथ सरकार तो बना ली मगर कई मुद्दों पर मतभेद के कारण गठबंधन में तकरार बढ़ती रही। गठबंधन की मजबूरी, किसान आंदोलन, कोरोना आदि से लड़ती हरियाणा की भाजपा सरकार आज हांफती नज़र आ रही है। जून में हुए निकायों चुनावों में तमाम चेयरमैन पदों का नुकसान होना सरकार की अलोकप्रियता दिखाता है। आज खट्टर सरकार का सारा ध्यान खुद को स्थिर रखने पर है और चुनाव में जीत के लिए वह विकास के बजाय मोदी के भरोसे है।

बृजेश माथुर, गाजियाबाद

राहत की पहल

मनोहर सरकार ने युवाओं को नौकरी देने में पारदर्शिता दिखाई, कृषकों को न्यूनतम मूल्य पर फसल बेचने के लिए कहीं जाना नहीं पड़ा। इस बार खट्टर सरकार ने बासमती धान की कृषकों से सीधे खरीद की है। किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है। शिक्षा के माॅडल में भी सरकार आगे रही है। भूमि अधिग्रहण करने के बजाय बाजार मूल्य पर कृषकों की इच्छा अनुसार ही जमीन खरीदी। उन्हें जबरन जमीन हथियाए जाने के भय से मुक्ति मिली। वहीं खट्टर सरकार सुदूर गांवों तक बिजली पहुंचाने में सफल रही है। सरकार अपने काम के बलबूते फिर से सत्ता पर काबिज होगी।

सुभाष बुड़ावन वाला, म.प्र.

महंगाई व बेराेजगारी दूर हो

मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपनी दूसरी पारी के शासनकाल में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक उपलब्धियों के हकदार हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति, कृषि क्षेत्र में सुविधाएं, बुढ़ापा पेंशन वृद्धि, खेलों में पदक जीतने वालों का सम्मान व अपराधियों पर अंकुश लगाने जैसे कार्य किये हैं। लेकिन कोरोना काल के बाद बेरोजगारों को रोजगार चाहिये। वहीं बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार दूर हो तभी सरकार के आठ वर्षों की कामयाबी होगी। सरकार को जनता के दिलों में अपनी छवि में सुधार करने की जरूरत है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

आपकी राय Other

Nov 05, 2022

अन्न की बर्बादी

यूएनईपी की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि चीन हर साल 9.6 करोड़ टन भोजन बर्बाद करता है और भारत 6.87 करोड़ टन। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में पूरी दुनिया में तिरानबे करोड़ टन से अधिक खाना बर्बाद हुआ। सबसे ज्यादा खाने की बर्बादी सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में ही हो रही है यह विचारणीय बात है। इसका प्रमुख कारण अमीरी और गरीबी के बीच चौड़ी होती खाई है। जरूरी है कि खाने कि बर्बादी के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाएं। शादी ब्याह में व बड़े समारोह में प्रशासन की ओर से एक निरीक्षकों की टीम भेजी जाए जो झूठा खाना डाले जाने पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करें।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, म.प्र.

घातक प्रदूषण

नवंबर के प्रथम सप्ताह में दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की संभावना बड़ी चिंता पैदा करती है। अस्पतालों में सांसों की बीमारी से मरीजों की संख्या में हुई बेतहाशा वृद्धि इसका प्रमाण है। दिल्ली में प्रदूषण रोकथाम के लिए की गई व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। प्रदूषण से बीमारी बढ़ने के खतरे गरीब लोगों को भारी पड़ रहे हैं। दिल्ली में वायुमंडल प्रदूषित होने के पीछे पंजाब, हरियाणा में पराली जलाने के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। जरूरी है कि प्रदूषण रोकथाम से संबंधित विभाग बेहतर संवाद और समन्वय स्थापित कर प्रदूषण रोकथाम की व्यवस्था को कारगर बनाएं।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

समाधान निकाले

दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए वायु प्रदूषण लगातार गंभीर खतरा बना हुआ है। घटती वायु गुणवत्ता सूचकांक कई अपरिहार्य स्वास्थ्य और पर्यावरणीय परिस्थितियों के लिए चिंता का विषय है। वैसे पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाए जाने को दिल्ली में बिगड़ी हवा की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इन सबके बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल और राजनीति एक बेहूदा बात बनकर रह गई है। इसके बजाय सरकार को समाधान खोजना चाहिए।

आयुषी उपाध्याय, चंडीगढ़

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Nov 04, 2022

मूल्यों की नजीर 

दो नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘लोकतांत्रिक मूल्यों की नजीर बना ब्रिटेन’ राजनेताओं के लिए सबक सिखाने वाला था। ऋषि सुनक जैसे गैर-ब्रिटिश अल्पसंख्यक व्यक्ति का ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनना लोकतंत्र की बेहतरीन मिसाल है। ऋषि का प्रधानमंत्री बनना जनतांत्रिक मूल्यों के प्रति ब्रिटेन के नागरिकों की निष्ठा को दर्शाता है। वहीं ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री, लिज़ ट्रस ने 44 दिन तक शासन करने के बाद यह कहकर त्यागपत्र दे दिया कि क्योंकि वह लोगों के साथ किए गए अपने वायदे पूरे नहीं कर सकीं अतः वह त्यागपत्र दे रही हैं। देश में प्रत्येक दल चुनाव के समय घोषणापत्र जारी करता है लेकिन उस पर किये गये वादे कभी पूरे नहीं होते।

शामलाल कौशल, रोहतक

हादसे के सबक

गुजरात के मोरबी का ‘झूलता पुल’ ध्वस्त होना दुखद घटना है। देश में आपराधिक लापरवाही लोगों की जान की दुश्मन बन गई है। जब भी कोई हादसा होता है तब सरकारें और प्रशासन जांच के आदेश देकर और मुआवजे का मलहम लगाकर कर्तव्यों की फिर इतिश्री कर लेते हैं। अगले हादसे के इंतजार तक लंबी तान के सो जाते हैं। लेकिन कोई भी सबक नहीं लेते हैं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर तो ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत होती है। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

प्रासंगिक कहानी

तीस अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में दिनेश विजयवर्गीय की ‘सावनी’ कहानी मनभावन, शिक्षाप्रद व प्रेरणादायक रही। वर्तमान में गुरु-शिष्य संबंधों की पारंपरिक प्रासंगिकता टच मोबाइल, इंटरनेट, व्हाट्सएप तक सिमट गई है। इसका अपवाद बनी कथा नायिका सावनी अपने गुरु सोमनाथ जी की सरकारी अस्पताल ले जाकर उनकी स्वास्थ्य संबंधी सहायता कर गुरु शिष्य परंपरा को जीवंत बनाया है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Nov 03, 2022

हरियाणवी का सम्मान

दैनिक ट्रिब्यून में सत्यवीर नाहड़िया का लेख ‘हरियाणवी को भाषा का मान दिलाने की राह’ पढ़कर महसूस हुआ कि अब समय आ गया है कि संविधान की आठवीं सूची में हरियाणवी भाषा को भी स्थान मिलना चाहिए। हिन्दी और हरियाणवी सिनेमा में हरियाणवी भाषा ने काफी प्रसिद्धि पाई है। वहीं हरियाणवी बोली के गीत-संगीत ने देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। अतः हरियाणवी भाषा का जो स्थान लोगों के दिल और दिमाग में है ठीक उसी प्रकार इसे संवैधानिक दर्जा भी मिलना चाहिए।

जयभगवान भारद्वाज, नाहड़

ऑटो चालकों की मनमानी

दिल्ली की जीवनरेखा ऑटो रिक्शा एवं काली-पीली टैक्सी किराए में सरकार ने बढ़ोतरी की है। वैसे दिल्ली में एप आधारित 25000 टैक्सी हैं उनके अपने रेट हैं, जिसमें सरकार की कोई दखलंदाजी नहीं है। एप आधारित कैब वाले ग्रामीण, मलिन, जेजे क्लस्टर एवं पुनर्वास बस्तियों में नहीं जाते हैं। सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं दिल्ली में टैक्सी और ऑटो केवल मीटर से चलें। सरकार मीटर खराब होने की स्थिति में ऑटो को चलाने की अनुमति नहीं देने की नीति लागू करे।

वीरेंद्र कुमार जाटव, नयी दिल्ली

आज भी प्रासंगिक

सरदार पटेल का स्पष्ट विचार था कि नये भारत की तरक्की तभी होगी जब देश का किसान, गांव का कारीगर समृद्ध होगा। साथ ही उनकी खुशहाली के लिए सरकारी नीतियां व सहायता प्रदान की जाएंगी। उनका मानना था कि किसान स्वयं अपने उत्पादन का मूल्य निर्धारण करे। पटेल का राष्ट्र के प्रति समर्पण और त्याग, हमें उनकी याद दिलाते रहेगा। वह लौह पुरुष थे। जिन्होंने अपनी पूरी ताकत देश की स्वाधीनता और बाद में अखंड भारत के निर्माण में लगा दी। सच में वह युग पुरुष थे।

अभिनंदन भाई पटेल, लखनऊ

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Nov 02, 2022

रूस की विदेश नीति

मास्को में रूस की सबसे बड़ी पॉलिटिकल कॉन्फ्रेंस वल्दाई फोरम में व्लादिमीर पुतिन ने अलग-अलग मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने रूस की मौजूदा हालत से दुनिया को अवगत कराया और संकेत दिया कि आने वाले दिनों में रूस की विदेश नीति और रक्षा नीति किस तरफ जाएगी। राष्ट्रपति का भाषण कई तथ्यों को उजागर करता है, जिससे साफ होता है कि युद्ध के लिए अकेला रूस दोषी नहीं है। अमेरिका और नाटो देश भी पीठ पीछे यूक्रेन के माध्यम से सीधे-सीधे रूस से युद्ध कर रहे हैं। इस मुद्दे में भारत की विदेश नीति कारगर रही है।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, म.प्र.


भूमिका की पड़ताल

इकतीस अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में वप्पला बालाचंद्रन का ‘कश्मीर विलय में नेहरू की भूमिका की पड़ताल’ लेख विषय का विश्लेषण करने वाला था। कश्मीर का भारत के साथ विलय के मामले का संचालन तत्कालीन वायसराय, माउंटबेटन, वीपी मैनन तथा सरदार पटेल ही कर रहे थे। कश्मीर के भारत के साथ विलय को लेकर राजा हरि सिंह से हस्ताक्षर लेेने के बाद ही भारतीय सेना ने कश्मीर में प्रवेश किया। कश्मीर पर निर्णय उस समय पंडित नेहरू नहीं बल्कि सरदार पटेल, माउंटबेटन की जोड़ी ले रही थी।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


समान हक

बीसीसीआई द्वारा भारतीय महिला क्रिकेटरों को अंतर्राष्ट्रीय मैचों के लिए पुरुष क्रिकेटरों के बराबर फीस के समाचार ने क्रिकेट के प्रति लगाव को दुगना कर दिया। निरंतर मेहनत और खेल में तकनीकी के विकास ने महिला क्रिकेट को भी रोमांचक बना दिया है। निश्चित रूप से बोर्ड का यह फैसला क्रिकेट खिलाड़ियों में नया उत्साह पैदा करेगा। इस फैसले से जहां महिला खिलाड़ियों के खेल की गुणवत्ता में सुधार आएगा, वहीं युवा खिलाड़ियों की दिलचस्पी भी बढ़ेगी।

अमृतलाल मारू, इंदौर

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Nov 01, 2022

देश व जनता सर्वोपरि

ब्रिटेन की हालिया राजनीति दो महत्वपूर्ण सबक सिखा गई है। पहला 45 दिनों तक राजकार्य संभालने वाली लीज ट्रस ने अपनी नाकामी की जवाबदेही को स्वीकारते हुए, त्यागपत्र दे दिया। वहीं ऋषि सुनक ने चुनाव में जीत-हार की परवाह किए बगैर, जनता को मीठी दवा देने की बजाय कड़वी दवा की बात की थी। उन्होंने कहा कि मैं झूठे वादे कर प्रधानमंत्री नहीं बन सकता, भले ही मुझे पद मिले या न मिले। इन नेताओं ने यह साबित किया है कि देश व जनता महत्वपूर्ण है न कि वोट व सत्ता। इसके विपरीत हमारे देश में देश और जनता को दरकिनार कर बस नेताओं को वोट, पद व सत्ता चाहिए।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

राष्ट्रप्रेम का भाव

उनतीस अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘जीवन में स्थाई बने राष्ट्रप्रेम का भाव’ तार्किक सवाल उठाता है। देश में अनेकता में एकता देखने को मिलती है उसे आजकल के राजनीतिक दल छिन्न-भिन्न करके वोटों की राजनीति करने का जो प्रयत्न कर रहे हैं वह निंदनीय है। मेलबोर्न में जो भावना भारत द्वारा क्रिकेट मैच जीतने पर दर्शकों ने दिखाई थी, वही भावना देश के अंदर भी दिखानी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक