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Jun 25, 2022

बड़ा आघात

महाराष्ट्र में ढाई साल पहले गठित सरकार की नैया हिचकोले खाती नज़र आ रही है। सरकार में शिवसेना के मजबूत स्तम्भ एकनाथ शिंदे ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है। एकनाथ शिंदे गुट का शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर आरोप है कि उन्होंने सत्ता के लिए बाला साहब के सिद्धांतों को दरकिनार कर कांग्रेस से गठबंधन किया तथा हिंदुत्व को भुला दिया है। वहीं शिवसेना के भाजपा पर आरोप हैं कि वह उनके विधायकों को बहला-फुसला कर सरकार गिराना चहती है। यदि शिवसेना एकनाथ शिंदे के विद्रोह के कारण विभाजित होती है तो उसे सबसे बड़ा आघात झेलना पड़ेगा।

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

मजबूत हो विपक्ष

लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक मजबूत विपक्ष का होना बहुत आवश्यक है। लेकिन एक अरसे से महसूस किया जा रहा है कि केन्द्र में विपक्ष की भूमिका गौण है। केन्द्र सरकार द्वारा जल्दबाजी में कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनका बाद में सड़कों पर पुरजोर विरोध हुआ। इस बात में कोई दो मत नहीं कि आंदोलनों से देश की ऊर्जा नष्ट होती है। जो आवाज संसद भवन में विपक्षी दलों द्वारा उठाई जानी चाहिए वह आवाज जनता द्वारा सड़कों पर आकार एक आंदोलन का रूप ले लेती है। विपक्ष के अभाव में सत्तारूढ़ नेता निरंकुश हो जाते हैं, सियासी दलों के साथ-साथ जनता को भी यह बात समझनी होगी।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

सियासी अवसरवाद

देशभर की निगाहें महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर लगी हुई हैं। यदि निष्पक्ष रूप से देखा जाए तो यह राजनीतिक अवसरवाद ही है। निर्वाचित सरकार को इस तरह से अस्थिर करने की कवायद लोकतांत्रिक मूल्यों के गिरते स्तर को ही दर्शाता है। शिवसेना के बड़े नेता एकनाथ शिंदे पार्टी को तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाने की कोशिश में बेशक कामयाब हो जाएं लेकिन ढाई वर्ष बाद जब विधानसभा के चुनाव होंगे तो निश्चित रूप से इन सभी नेताओं को जवाब देना होगा।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

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Jun 24, 2022

राजनीतिक उठापटक

23 जून के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘रार और वार’ महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव सरकार के खिलाफ उन्हीं के एक मंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विधायकों के बड़े धड़े के समर्थन के बूते बगावत का विश्लेषण करने वाला था। असल में पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा तथा शिवसेना ने हिंदुत्व आधारित मुद्दों को लेकर लड़ा था और बहुमत भी प्राप्त कर लिया था परंतु मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने एनसीपी तथा कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली थी। तभी से केंद्र की भाजपा तथा महाराष्ट्र सरकार में सियासत का शह-मात का खेल चल रहा था।

शाम लाल कौशल, रोहतक

मदद की गुहार

अफगानिस्तान के लोग तालिबानी क्रूर शासन से उबरे भी नहीं थे कि भीषण भूकंप ने पल भर में सब कुछ तहस-नहस कर दिया। आलम यह रहा कि इस विनाशकारी भूकंप से हजार लोगों की जिंदगियां उजड़ गईं और पन्द्रह सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए। यहां चारों तरफ बर्बादी और तबाही का ही आलम दिखाई दे रहा है। पहले से गरीबी से जूझ रहे अफगानियों को एक और बड़ा झटका लगा है। ऐसे में वहां की सरकार के लिए चुनौतियां भी दोगुनी हो गई हैं। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मदद की गुहार जरूर लगाई है।

शशांक शेखर, नोएडा

पर्यटन में आत्मनिर्भरता

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में पर्यटन उद्योग का बहुत बड़ा योगदान है। गर्मियों के मौसम में यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं। प्रदेश की आर्थिकी को और अधिक मजबूत करने के पर्यटन उद्योग में कई ऐसे अनछुए क्षेत्र हैं जिन्हें चिन्हित करके विकसित करना चाहिए ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहां घूमने आएं। आने वाले समय में यदि ऐसा होता है तो प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होगा।

नरेन्द्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंद्र नगर

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Jun 23, 2022

आदिवासियों का सम्मान

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी घोषित कर विपक्ष की बेचैनी बढ़ा दी है। भारत के इतिहास में पहली बार आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी। उड़ीसा से संबंध रखने वाली 64 वर्षीय एनडीए उम्मीदवार प्रशासनिक अनुभव से परिपूर्ण हैं। ऐसी संभावनाएं बन रही हैं कि उन्हें उड़ीसा में सत्तारूढ़ पार्टी बीजू जनता दल, तेलंगाना में सत्तारूढ़ पार्टी टीआरएस एवं जेडीयू का भी समर्थन मिलेगा। 

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

 

योग की जरूरत

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष प्रयासों से प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग शारीरिक मजबूती के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यदि शरीर ठीक है और मानसिक रूप से स्वस्थ और मजबूत हैं तो हम किसी भी काम को आसानी से कर सकते हैं। अस्वस्थ शरीर मानव के स्वभाव को चिड़चिड़ा बना देता है। अत: योग द्वारा ही स्वस्थ शरीर का निर्माण किया जा सकता है।         

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंद्र नगर

 

हिंसा ठीक नहीं

अग्निपथ योजना की घोषणा होते ही हिंसक बवाल मच गया। राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यह सब राष्ट्र विरोध की श्रेणी में आता है। वहीं अगर अग्निपथ योजना का मसौदा देश के सामने रखने से पहले आवश्यक सुझाव व आपत्तियां ली जातीं तो जो अाज विकट स्थिति निर्मित हुई वह नहीं होती।  

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

 

स्वर्णिम समय 

अग्निपथ योजना देश के युवाओं के लिए बेहतर और स्वर्णिम समय लेकर आयी है। इस योजना के तहत युवाओं को सेना में देश की रक्षा करने का मौका मिलेगा। इससे भारतीय सेना की औसत उम्र 32 से घटकर 26 वर्ष हो जाएगी। देश के युवा 25 साल के उम्र में आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त हो जाएंगे। इससे सेना का आधुनिकीकरण भी बहुत तेजी के साथ होगा। 

समराज चौहान, कार्बी आंग्लांग, असम

 

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Jun 22, 2022

युवाओं में बेचैनी

बीस जून के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘रोजगार संकट’ सरकार द्वारा सेना में 4 साल की समय अवधि के लिए भर्ती को लेकर अग्निपथ योजना लागू करने के साथ-साथ युवाओं में बढ़ती हुई बेकारी तथा बेचैनी का वर्णन करने वाला था। केवल 4 साल के लिए सेना में भर्ती के बाद युवा लोगों को और कई विभागों में एडजस्ट करने की बात सरकार ने कही है। सरकार को रिक्त पदों को शीघ्र अति शीघ्र भरना चाहिए, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सुविधाएं देनी चाहिए। सेना में 15 साल की नौकरी बहाल करनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

सुलगते सवाल

‘अग्निपथ योजना के सुलगते सवाल’ अग्रलेख में लेखक शंभूनाथ शुक्ल की आशंकाएं स्वाभाविक ही हैं। बेरोजगारी से जूझते युवाओं के लिए सरकार का मिशन मोड संजीवनी का काम करेगा। लगातार मंदी के दौर से गुजर कर आगे बढ़ता समय सरकार के इस फैसले पर सहमति तो देता है लेकिन लेखक की सेवा के अल्प जीवन संबंधी तमाम शंकाएं भी जायज हैं। अब अगर इनसे निजात पाना है तो सरकार को इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ ही सेवा अवधि अल्पता पर भी विचार करना होगा।

अमृतलाल मारू, दसई धार, म.प्र.

मिलकर बचाएं धरती

वातावरण में बढ़ते तापमान के चलते आमजन का जीना दूभर हो गया है। कारण ग्लोबल वार्मिंग, वृक्षों का अवैध कटान, प्राकृतिक संसाधनों का खनन, ऊर्जा व जल स्रोतों का जरूरत से ज्यादा दोहन मानवता के लिए खतरे की घंटी है। कुदरत के प्रति विनम्रता दिखाते हुए अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना, उन्हें उचित संरक्षण प्रदान करना, बूंद-बूंद पानी बचाने की मुहिम को आगे बढ़ाना आदि में सहयोग सबका नैतिक कर्तव्य होना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Jun 21, 2022

चालकों की मनमानी

महानगरों में एप आधारित कैब सेवा मध्य वर्गीय परिवारों के लिए एक आवश्यकता बन चुकी है। लेकिन आजकल बुकिंग कन्फर्म होने के बाद भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। ड्राइवरों की मनमानी से इस सेवा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कंपनी द्वारा पीक आवर्स में कैब के रेट बढ़ा दिए जाते हैं। इन कंपनियों द्वारा कोई हेल्प नंबर भी जारी नहीं किया गया है और शिकायत करना एक जटिल समस्या है।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

विरासत का संरक्षण

भाजपा सरकार द्वारा मंदिरों का कायाकल्प एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। जिस प्रकार काशी विश्वनाथ मंदिर, केदारनाथ, महाकाल का जीर्णोद्धार हुआ है वे सिर्फ दर्शनीय ही नहीं, बल्कि समय के अनुसार भव्य बने हैं। पावागढ़ मंदिर का पुननिर्माण एवं उस पर पांच सौ वर्ष बाद झंडा फहराना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

भगवानदास छारिया, इंदौर, म. प्र.

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खेलों की राजधानी हरियाणा Other

Jun 20, 2022

उम्मीदों को विस्तार

हरियाणा की मेजबानी में संपन्न हुए ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ में प्रदेश के खिलाड़ियों ने सर्वाधिक पदक जीतते हुए समूचे देश में स्वर्णिम सफलता हासिल की है। खेल महोत्सव में हरियाणा का चैंपियन बनकर उभरना दर्शाता है कि खिलाड़ियों में न केवल खेल-भावना कूट-कूट कर भरी हुई है, बल्कि उनकी दमदार प्रस्तुति में देश और प्रदेश का नाम रोशन करने की दृढ़ इच्छाशक्ति निहित है। खट्टर सरकार जिस तरह से खेलों एवं खिलाड़ियों के विकास और उत्थान में निवेश निरूपण कर रही है, उससे भविष्य में हरियाणा खेलों की राजधानी बनकर उभरने वाला है।

युगल किशोर शर्मा, फरीदाबाद

सुधार की दरकार

विजयी खिलाड़ियों के लिए हरियाणा सरकार द्वारा घोषित पुरस्कार राशि से खेलों के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आये खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे, हरियाणा ही नहीं पूरे देश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। युवा अब खेलों में अपना भविष्य तलाशने लगे हैं। मगर अफसोस की बात है कि गरीब परिवारों के बच्चों के लिए यह डगर अब भी कठिन बनी हुई है। किसी भी खिलाड़ी के लिए प्रशिक्षण केन्द्र और एक ईमानदार समृद्ध कोच की आवश्यकता होती है। सरकारी स्तर पर ये सुविधाएं गौण हैं। सरकार खेल स्टेडियम और प्रशिक्षकों का प्रबंध करे।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’ , महम

जागरूकता जरूरी

खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 की मेजबानी का जिम्मा लेकर हरियाणा ने यह साबित कर दिया कि वह खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए काफी गंभीर है। हरियाणा के विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया है, ओलंपिक में भी कमाल कर चुके हैं। हरियाणा सरकार को चाहिए कि विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को आगे लाने के लिए गांवों से शहरों तक खेल जागरूकता अभियान चलाए। अगर सरकार सभी खेलों के खिलाड़ियों की सुविधाओं के प्रति गंभीर रहे तो हरियाणा हर खेल में नम्बर वन बन जाए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सफल आयोजन

यह गौरव की बात है कि खेलो इंडिया यूथ गेम-2021 की मेजबानी हरियाणा प्रदेश को मिली। प्रदेश के खिलाड़ियों ने खेलों में 52 सोने के पदक तालिका में दर्ज करके प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरी ओर खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 के समापन पर ओवरऑल ट्रॉफी अपने नाम की है। हरियाणा के प्राचीन कथन ‘दूध दही का खाणा, ये मेरा हरियाणा’ पर आधारित खिलाड़ियों का खानपान है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि टोक्यो ओलंपिक में हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने भारत को गोल्ड दिलाया। खेलो इंडिया यूथ-2021 में 12 नेशनल रिकॉर्ड बताते हैं कि आयोजन कितना सफल रहा है।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

खेल संस्कृति में योगदान

पिछले कुछ सालों में हरियाणा देश की खेल राजधानी के रूप में उभरा है। दुनिया की तमाम अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में हरियाणा की खेल प्रतिभाएं सफलता के परचम लहरा रही हैं। इसमें राज्य की खेल नीतियों व आकर्षक पुरस्कारों की बड़ी भूमिका रही है। मगर अभी भी वैश्विक खेल ताकतों का मुकाबला करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास की जरूरत है। अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए चयन हेतु पारदर्शी व्यवस्था बनाने की भी आवश्यकता है। खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रम देश की खेल संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

खिलाड़ियों में दमखम

इंडिया यूथ गेम्स-2021 की मेजबानी करने का श्रेय हरियाणा को दिया जाना गर्व की बात है। विभिन्न खेल स्पर्धाओं में जीते कांस्य, रजत, स्वर्ण पदक उनकी मेहनत का परिणाम है। राष्ट्रीय खेलों में जीते सर्वाधिक पदकों ने यह सिद्ध कर दिया कि हरियाणा के खिलाड़ियों में अभी दमखम है। देश का सम्मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को सरकार की ओर से सहायता राशि, नौकरी देकर उनकी हौसला अफजाई करना काबिले तारीफ है। अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में नाम कमाने की चाहत में सरकार की ओर से उभरती खेल प्रतिभाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण कोचों द्वारा प्रदान करने की व्यवस्था ओर बेहतर करनी चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

पुरस्कृत पत्र

सुधार की गुंजाइश

पदकों में शतक लगा कर हरियाणा ने सिद्ध कर दिया है कि वह खेलों की राजधानी बनता जा रहा है। ओलम्पिक से लेकर तमाम विश्व स्पर्धाओं में हरियाणा के खिलाड़ी सोने-चांदी व कांस्य पदक लगातार बड़ी संख्या में लाकर न केवल हरियाणा बल्कि देश का नाम रोशन कर रहे हैं। फिर भी खेल नीति में सुधार की बहुत गुंजाइश है। स्कूलों में खेल नर्सरियां बनाकर बचपन से ही प्रतिभाशाली खिलाडि़यों की पहचान कर उत्कृष्ट प्रशिक्षण व अभ्यास की सुविधाएं निःशुल्क प्रदान करने की आवश्यकता है। शहरों में विश्वस्तरीय खेल के मैदान, खेलों के सामान और प्रशिक्षण की व्यवस्था कर गुदड़ी के लालों की प्रतिभा को निखारा जा सकता है।

शेर सिंह, हिसार

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Jun 18, 2022

विवादों को हवा

इन दिनों गंगा-जमुनी तहजीब को बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश देश में चल रही है। वाराणसी से चला विवाद आज देश भर में फैल गया है। आज टीवी डिबेट में बैठकर जिस तरह से विवाद को लगातार हवा दी जाती है एवं संयम नहीं बरता जा रहा है उससे माहौल बिगड़ रहा है। यह अब बंद होना चाहिए। जब भी कोई टीवी डिबेट में प्रवक्ता या धर्मगुरु आता है, वह अपने धर्म की व्याख्या करते-करते बेवजह की बातें करने लगता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से गुजारिश है कि इन टीवी डिबेट पर सख्त नजर रखें। इन टीवी चैनल में आकर जो भी देश का सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

एमएम राजावत राज, शाजापुर

नि:स्वार्थ रिश्ता

भारत की समृद्ध संस्कृति ने तो अारंभ से ही हर रिश्ते की अहमियत का संदेश दिया है। देश में बेशक पश्चिमी सभ्यता के कुछ रिवाजों ने दस्तक दे दी है, जिनमें से एक है फादर्स डे। यह अच्छा है कि भारत में भी अपने पिता के प्रति सम्मान जाहिर करने को फादर्स डे का प्रचलन आरंभ हो चुका है, लेकिन दिखावे या सोशल साइट पर फादर्स डे की सेल्फी शेयर के इरादे से ही फादर्स डे मनाना सरासर गलत है। दुनिया में पिता का रिश्ता सबसे नि:स्वार्थ रिश्ता होता है। अफसोस आज बहुत से लोग अपने पिता की उन कुर्बानियों को भूल जाते है जो उनकी खुशी के लिए की होती हैं।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर, पंजाब

लोक मंगल की मुहिम

बारह जून के लहरें अंक में अरुण नैथानी का ‘योग की आत्मा बचाने की मुहिम’ लेख योग पुरुष स्वामी भारत भूषण द्वारा लोक मंगल कामना के निमित्त चली मुहिम का विश्लेषण करने वाला रहा। आधि-व्याधि के संत्रास से तप्त मानवता के लिये राहत का एकमात्र उपाय योग है। योगीराज भारत भूषण की त्याग- तपस्या की मिसाल योग दिवस की महत्ता को सार्थकता प्रदान करती है। जन-जन के मन में योग के प्रति लगन-रुचि जगाते हुए मानवीय जीवनशैली को सुखद-संपन्न बनाने में उनका अतुलनीय सहयोग रहा है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Jun 17, 2022

पुनर्विचार करें

रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेनाओं के लिए अग्निपथ नाम की एक योजना बनाई है। इस योजना में चार साल का अल्पकालिक सैनिक जीवन युवाओं के जीवन में कई आशंकाओं को जन्म देगा। इस योजना के तहत इस आयु में अग्निवीर को 17 लाख रुपये देकर बिना पेंशन घर भेज दिया जाएगा। आशंकाओं के बीच कर्तव्य निर्वाह पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना होगी। घर भेजे गए अग्निवीरों के लिए अपने भविष्य को लेकर हमेशा चिंता बनी रहेगी। कई विसंगतियों के कारण इस योजना का विरोध होना भी स्वाभाविक लगता है। सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

गणेश दत्त शर्मा, होशियारपुर

निष्पक्ष हो जांच

ऐसा लगता है कि सरकार ने विपक्षी दल के नेताओं की फाइलें बना रखी हैं, कभी किसी की फाइल और कभी किसी की फाइल खोल दी जाती हैं। इस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ समाचारपत्र नेशनल हेराल्ड को लेकर ईडी जांच-पड़ताल कर रही है। इस जांच में से कुछ निकलेगा या नहीं यह जांच का विषय है। भाजपा को इसके साथ सत्तापक्ष से संबंधित मंत्रियों, कॉर्पोरेट लोगों के खिलाफ भी ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

वाजिब हक मिले

सरकार द्वारा तीनों सेनाओं में अग्निपथ स्कीम के माध्यम से अग्निवीरों की भर्ती चार वर्ष के लिए की जायेगी। इसके पीछे का कारण तनख्वाह और पेंशन का बोझ कम करना है लेकिन इसका विरोध युवाओं द्वारा प्रदर्शन, धरना और आंदोलन से किया जा रहा है। यह बात सही है कि चार वर्ष के पश्चात ये युवा कहां जायेंगे? जब नेता अपनी अधिकतम आयु तक देश की सेवा कर पेंशन के हकदार हो जाते हैं तो ये तो युवा हैं। इन्हें सेना के माध्यम से लंबी उम्र तक देश की सेवा करने का अधिकार मिलना चाहिए।

भगवानदास छारिया, इंदौर

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Jun 16, 2022

प्लास्टिक प्रदूषण

प्रदूषण पूरे देश की एक विकट समस्या बन चुकी है। सिंगल यूज प्लास्टिक प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक बनता जा रहा है। इसे आसानी से डिस्पोज नहीं किया जा सकता है। आज हर शहर और गांव की गलियों में प्लास्टिक की थैलियां तथा डिस्पोजल बर्तनों का कचरा देखने को मिलता है। सीवर और नालियों को अवरुद्ध करने में प्लास्टिक कचरे की ही भूमिका रहती है। यह समस्या अब विकराल रूप लेती जा रही है। समय रहते चेतना होगा वरना वह दिन दूर नहीं जब इस दमघोटू कचरे के कारण धरती का भी दम घुटने लगेगा।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

विश्वास के रिश्ते

बारह जून के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ की ‘इतनी-सी बात’ कहानी दिल की गहराइयों को छूने वाली रही। गृहस्थ रूपी गाड़ी को चलाने में पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ सामंजस्य स्थापित करके चलना होता है। जीवन में शक घरेलू सुख-शांति को डसने में विलंब नहीं करता। आपसी प्रेम वैवाहिक जीवन में संदेह से कोसों दूर निर्लेप होकर सुखद क्षणों का अहसास कराता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले उसे जांच-परख लेना नितांत आवश्यक है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

वाजिब हक

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि अब लिव इन रिलेशन से पैदा हुई संतान का भी पिता की संपत्ति पर हक होगा। इस फैसले से कितने लोगों को इंसाफ मिलेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। देखा जाये तो देश की संस्कृति में लिव इन रिलेशन नाममात्र को है। नि:संदेह जो संस्कृति की परंपरा के विरुद्ध चलेगा उसके रिश्ते की बुनियाद कभी मजबूत नहीं हो सकती। लिव इन रिलेशन के लिए ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए कि इस रिलेशन के टूटने से कोई बेकसूर बलि का बकरा न बने।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Jun 15, 2022

फसलों का विविधीकरण

पंजाब में भूजल स्तर गिर रहा है। अगर अभी से गंभीरता नहीं दिखाई तो यहां भी रेतीले इलाकों की संख्या बढ़ जाएगी। देश में जहां भूगर्भीय जलस्तर में भारी गिरावट आ रही है, वहां कुछ अधिक पानी वाली फसलों का उत्पादन बंद कर देना चाहिए। सरकार को चाहिए कि कृषि विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसी तकनीक विकसित करें कि देश के हर राज्य में मौसम की बेरुखी से होने वाले फसलों के नुकसान से किसानों को बचाया जा सके। अर्थात‍् जिस तरह मौसम का चक्र परिवर्तन हुआ है, उसी हिसाब से फसलों की पैदावार की जाए। वैसे वर्षाजल संचयन इस दिशा में एक कारगर उपाय हो सकता है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

हक भी मिले

पच्चीस मई का दैनिक ट्रिब्यून संपादकीय ‘आशा का भरोसा’ पढ़ा। कोरोना काल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई सेवाओं को विस्मृत नहीं किया जा सकता। इसके अलावा आंगनवाड़ी को हमारी शिक्षण संस्थाओं की मातृसंस्था कहना गलत नहीं होगा। कार्यकर्ता जिस प्रकार बच्चों को अपनत्व, स्नेह प्रदान कर उनकी सेवा करती हैं वह किसी मां के लाड़-दुलार से कम नहीं होती। सरकार को भी इनकी सुध लेनी चाहिए। उनकी सेवाओं के बदले उन्हें सरकारी सेवाओं के बुनियादी अधिकार और सुविधाएं उपलब्ध करवाने चाहिए।

अमृतलाल मारू, दसई धार, म.प्र.

समानता का हक

आजकल समान नागरिक संहिता कानून बनाने पर बहस छिड़ी हुई है, लेकिन कुछ वर्ग इसका विरोध कर रहे हैं। सभी को समान अधिकार चाहिए तो फिर किसी वर्ग विशेष को समान नागरिक संहिता से डर किस बात का? भिन्न-भिन्न समुदायों के आर्थिक, सामाजिक तथा शैक्षणिक उत्थान के लिए समान नागरिक संहिता कानून आज के भारत की जरूरत है। सबके एक समान विकास के लिए भारत के सभी वर्गों को समान नागरिक संहिता का स्वागत करना चाहिए।

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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Jun 14, 2022

खेलों की राजधानी

खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2021 में हरियाणा के खिलाड़ियों ने अधिकतम पदक जीत कर सभी राज्यों में प्रथम स्थान बनाए रखा। पदकों का शतक लगा कर हरियाणा ने सिद्ध कर दिया है कि वह वास्तव में खेलों की राजधानी बनता जा रहा है। ओलम्पिक से लेकर तमाम विश्व स्पर्धाओं में हरियाणा के खिलाड़ी सोने-चांदी व कांस्य पदक लगातार बड़ी संख्या में लाकर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। स्कूलों में खेल नर्सरी बनाकर बचपन से ही प्रतिभाशाली खिलाडि़यों की पहचान कर उत्कृष्ट प्रशिक्षण व अभ्यास की सुविधाएं निःशुल्क प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि धनाभाव से कोई प्रतिभा उपेक्षित न रह जाये।

शेर सिंह, हिसार

संयम का पालन

राष्ट्रीय पार्टी बनाने की महत्वाकांक्षा रखने वाले ओवैसी हर सभा में भड़काऊ भाषण देते हैं। अकसर हिन्दू, हिंदुत्व और मोदी निशाने पर होते है। दिल्ली में ओवैसी पर मुकदमा दर्ज होने के बाद ओवैसी के पक्ष में प्रदर्शन करने वाले 30 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। ओवैसी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर हाे रहे हमलों को लेकर कभी कोई मुद्दा नहीं उठाते हैं।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

निकाय चुनाव व आकांक्षा Other

Jun 13, 2022

सुविधाओं पर दें ध्यान

नागरिकों की निकायों से आकांक्षाएं होती हैं कि वे नागरिकों को स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा, स्वच्छता के साथ ही शहर के विकास के लिए काम करें। शहर में पेयजल की समय पर आपूर्ति हो, निकाय समस्त अवशिष्ट मामलों के संबंध में समय पर कार्यों का निष्पादन करे। वह भवन निर्माण, शहरी नियोजन, सड़क व पुल के साथ ही औद्योगिक व वाणिज्यिक क्षेत्र में भी जलापूर्ति पर समुचित ध्यान दें। वहीं निकाय बढ़ती हुई आबादी के अनुरूप मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दें।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

सियासी दखल न हो

असल में स्थानीय निकाय ऐसे जनप्रतिनिधि चुनने के लिए होते हैं जो कि आम जनता को पीने का पानी, सीवरेज, विभिन्न बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण व सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़कों की मरम्मत आदि काम करके लोगों का भला कर सके। लेकिन ऐसा करने के बदले में विभिन्न राजनीतिक दल निकाय चुनाव लड़कर यह साबित करना चाहते हैं कि लोग कितना उनके पक्ष में हैं। इसी आधार पर बाद में वे विधानसभा तथा संसदीय चुनाव लड़ने के बारे में निर्णय करते हैं! जो लोग स्थानीय निकाय जीत जाते हैं उनमें से अधिकांश अपने कर्तव्यों को लोगों की अपेक्षा के अनुसार नहीं निभाते।

शामलाल कौशल, रोहतक

योग्य हो नुमाइंदा

निकाय चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि इसमें जीतने वाले योग्य उम्मीदवार से जनता को अपने वार्ड में विकास की संभावनाएं नजर आती हैं, वहीं यदि ये जीते हुए अयोग्य पार्षद उस क्षेत्र में कार्य नहीं करवा पाते है तो उसका खमियाजा भी जनता को ही भुगतना पड़ता है। अतः जनता ने पार्टी को देखने के बजाय पहले नुमाइंदे को देखना चाहिए कि उसका काम के प्रति कोशिश क्या है। ऐसा देखा गया है कि पार्षद में यदि दमखम हो तो कोई भी पार्टी सत्ता में हो, वह काम करवा ही लेता है। अतः पार्षद और महापौर का चुनाव जनता द्वारा सोच-समझ कर ही किया जाए तो शहर की उन्नति संभव है।

भगवानदास छारिया, इंदौर, म.प्र.

ज्यादा शक्तियां

स्थानीय प्रशासन के चुनावों से ही राजनीतिक दल अपनी शक्ति और लोकप्रियता का प्रदर्शन करते है। अधिकतर राजनीतिक दल निकाय चुनावों में सफलता प्राप्त करने के लिए चुनाव चिन्ह का भी इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय प्रशासन के पास शक्तियां और आय के साधन कम होते हैं। स्थानीय प्रशासन केंद्रीय एवं राज्य सरकारों पर अत्यधिक निर्भर रहते है। स्थानीय स्तर पर नागरिकों की अपेक्षाएं एवं आकांक्षाएं भिन्न होती हैं, जिनको पूरा करने के लिए स्थानीय प्रशासन अपने आप को असहाय महसूस करता है जिसके कारण निकाय चुनाव एक दिखावा सा प्रतीत होते हैं।

जय भगवान भारद्वाज, नाहड़, रेवाड़ी

बुनियादी मुद्दे छुएं

हरियाणा में निकाय चुनावों की घोषणा होते ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं राजनीतिक दल आम नागरिक की बुनियादी जरूरतों को मुद्दा बनाने के बजाय कर्कश संवाद, जाति, प्रांत व धर्म के नाम पर विभाजन की बात करते हैं। अकसर विकास व आम आदमी की जरूरतों को ताक पर रखकर नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं। आजादी के 75वें साल और अमृत महोत्सव काल में बुनियादी मुद्दों की बात होनी चाहिए। जनतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव एक पवित्र अनुष्ठान होना चाहिए। हर चुनाव जनता की भलाई और आम नागरिक के उत्थान के लिए होना चाहिए।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

भलाई हो मकसद

निकाय चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। स्थानीय निकायों के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधि जनता के लिए होने की भावना से राजनीति में पहल करते हैं। बिजली, पानी, स्ट्रीट लाइट, सड़क संबंधी समस्याओं का निवारण सर्वोपरि है। लेकिन जनता की उम्मीदों पर खरा न उतर स्वार्थ को महत्व उनकी फितरत बन जाता है। जनता के प्रति अपने कर्तव्यों को भुलाने का अंजाम आगामी चुनाव में भोगना पड़ता है। निकाय चुनाव मतदाताओं को वोट का सदुपयोग करने, राष्ट्र के लिए भावी योग्य, ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ उम्मीदवार का चुनाव करने की पहचान भी कराते हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क कैथल

पुरस्कृत पत्र

वर्चस्व की लड़ाई

निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां आरम्भ हो गई हैं। कुछ दल पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं तो कुछ केवल समर्थन देने की बात कर रहे हैं। गठबंधन में शामिल दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि ये राजनीतिक दल अपने वर्चस्व के लिए ही चुनाव लड़ रहे हैं। जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं का कहीं जिक्र नहीं है। स्थानीय निकायों का प्रशासन जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता रहा है। जनता इसलिए उदासीन है कि उन द्वारा चुने गए प्रतिनिधि जनता के हितों पर ध्यान न देकर अपने निजी व अपने दल के हितों को सर्वोपरि रखते हैं।

शेर सिंह, हिसार

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Jun 11, 2022

सख्त कार्रवाई हो

आठ जून के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘आत्मघाती बयान बाजी’ एक टीवी कार्यक्रम के दौरान भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा विवादित बयान देने के बाद उपजे विवाद को लेकर था। बेलगाम बयानबाजी के चलते इस्लामिक देशों से जो तल्ख प्रतिक्रिया सामने आई है वह स्वाभाविक है। मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी द्वारा इसे लेकर आपत्तियां जतायी गयीं। एक के बाद एक मुस्लिम देशों ने भारत के दूतावासों के अधिकारियों को बुलाकर केवल विरोध ही प्रकट नहीं किया बल्कि भारतीय वस्तुओं के बहिष्कार का सिलसिला भी शुरू हो गया। विवादित बयान देने वालों को कठोर सज़ा दी जानी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

रेडियम की अनिवार्यता

ज्यादातर दुर्घटना अंधेरे में एवं घने कोहरे में सड़क पर खड़े पशुओं, वाहनों के न दिखाई देने के कारण होती है। ऐसे में बैलगाड़ी के धुरों पर मध्य में एवं बैलगाड़ी के पीछे की ओर रेडियम लगाए जाने चाहिए। साथ ही पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट बांधा जाना एवं सींग पर रेडियम पेंट लगाने से अंधेरे में उनकी जान के साथ खुद की जान बचाई जा सकती है। यहां तक कि जहां टॉवर लगे उसके ऊपर रेड लाइट का बल्ब लगा होना चाहिए। इससे अंधेरे में हवाई दुर्घटनाओं को होने से रोका जा सकता है।

संजय वर्मा, मनावर, धार, म.प्र.

प्रेरणादायक कहानी

पांच जून के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में वीणा सेठी की ‘साया’ कहानी प्रेरणादायक रही। पति-पत्नी गृहस्थ रूपी गाड़ी के दो पहियों में वैचारिक समानता की धुरी है। ससुराल के नये वातावरण में अपने आपको ढालना एक सभ्य, संस्कारित गृहिणी की पहचान है। कथानायिका सुशीला का त्याग- तप घरेलू सुख-शांति में वृद्धि करने वाले सामाजिक आदर्शों की अनुकरणीय मिसाल है। कथ्य शैली रोचक व प्रभावशाली बन पड़ी है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Jun 10, 2022

हारेगा कैंसर

चार जून के दैनिक ट्रिब्यून में निरंकार सिंह का 'होसलों के बूते कैंसर के खिलाफ जंग' लेख ने बताया कि कैंसर दुनियाभर में हो रही मौतों का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। रोग महामारी की तरह तेजी से फैल रहा है। लेकिन बड़ी आबादी चिकित्सा की महंगी व्यवस्था के चलते उपचार से वंचित रह जाती है। कैंसर का पता चलते ही इस बीमारी का मरीज मन में यह धारण कर लेता है कि अब तो मृत्यु निश्चित है। सरकार गरीब लोगों में जागरूकता पैदा करने के साथ ही गरीब रोगियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराये।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

आत्मघाती राह

एक किशोर द्वारा पब्जी गेम खेलने से मना किया जाने पर अपनी मां की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मोबाइल वीडियो गेम से आजकल के बच्चों और किशोरों में अवसाद व आक्रामकता की बीमारी हो गई है। लखनऊ की घटना में नाबालिग आरोपी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। सरकार को देश भर में सभी तरह के खतरनाक वीडियो गेम जिनके जरिये बहुत सारा पैसा किशोरों से एेंठा जाता है, को तत्काल प्रभाव से बंद करना चाहिए।

सुभाष बुडावन वाला, रतलाम, एमपी

गड्ढामुक्त सड़कें

साल 2014 के बाद से केंद्र में सत्ता में आयी भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क और परिवहन के क्षेत्र में आशातीत कार्य किया। हाल ही में, लगभग पांच दिनों में 75 किलोमीटर का सड़क निर्माण का नया रिकाॅर्ड बनाया। जहां एक ओर 2017 में यूपी की सत्ता में काबिज हुए सीएम योगी के नेतृत्व की टीम ने गड्ढा मुक्त की मुहिम चलायी थी, वहीं दूसरी ओर 2022 में दोबारा सत्ता में आने के बाद, सड़कें बरसों से गड्ढा युक्त का जीवंत उदाहरण बनी हुई हैं। लोक कल्याण विभाग जल्द से जल्द नयी सड़कों का निर्माण कराए।

अमन जायसवाल, दिल्ली विवि, दिल्ली

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Jun 09, 2022

एथनॉल से कमाल

 विकसित देश न केवल धरती के ज्यादा से ज्यादा संसाधनों का दोहन कर रहे हैं बल्कि उनमें कई देश भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन कर पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि भारत पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रयासरत है। भारत ने समय सीमा से 5 माह पहले ही पेट्रोल में 10 फीसदी एथनाॅल मिलाने के लक्ष्य को हासिल कर लिया है जो बड़ी उपलब्धि है। भारत ने गैर परंपरागत ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य 

हासिल करने के साथ ही पिछले 8 वर्षों में भारत के वन क्षेत्रों में 20 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि की है। 

-मनमोहन राजावत राज, शाजापुर

कमी खलेगी

संगीत की दुनिया में  विलक्षण प्रतिभा के धनी पंडित भजन  सोपोरी का महाप्रयाण संगीत प्रेमियों को गम दे गया है|   पंडित भजन सोपोरी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयां दीं।   शास्त्रीय संगीत की उत्कृष्ट कोटि  की विधाओं के प्रयोग से  उन्होंने फिल्म संगीत की दुनिया में भी  नाम कमाया|  संगीत  प्रेमियों को  पंडित भजन  सोपोरी की  कमी खलेगी|  दिवंगत आत्मा को अश्रुपूरित श्रद्धासुमन! 

- युगल किशोर शर्मा , फरीदाबाद 

समझौता नहीं

हालिया विवादित बयानों पर कुछ छोटे मुस्लिम देश एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं । उनके दबाव में भारत सरकार ने अपने प्रवक्ताओं को बाहर कर दिया।  135 करोड़ आबादी वाला हमारा देश क्या इन देशों के दबाव में आकर काम करेगा? हमारे देश के कामगारों की वजह से ही उन्हें सस्ता श्रम उपलब्ध हो रहा है।  भारत द्वारा भेजी जाने वाली सस्ती खाद्य सामग्री की वजह से इन देशों की जनता का पेट भर रहा है। लेकिन दूसरे धर्मों के बारे में विध्वंसक बयान पर तो इन देशों के कान पर कभी जूं नहीं रेंगी? कब तक हम इस तरह से धर्म-निरपेक्षता  की कीमत चुकाएंगे? 

-सुभाष बुड़ावनवाला,रतलाम, म़ प्र.  

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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Jun 08, 2022

अनुभव से पालन

छह जून के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का ‘अनुभव जन्य ज्ञान से हो बच्चों की परवरिश’ लेख बच्चों के पालन-पोषण हेतु उपयोगी सुझाव देने वाला था । संयुक्त परिवार प्रणाली में जन्मे बच्चों के पालन में बुजुर्गों का सहयोग कारगर साबित होता था। आधुनिक एकल परिवार जहां पति- पत्नी कामकाजी हों, वहां नवजात शिशु का, सुनी सुनाई बातों या गूगल  जानकारी द्वारा पालन- पोषण करते हैं। बच्चे को क्रच में डाल स्वयं को कर्तव्य मुक्त समझते हैं। मोबाइल-कंप्यूटर से अर्जित ज्ञान अच्छे नंबर दिला सकता है, लेकिन अच्छा इंसान नहीं बना सकता। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


जातिवार जनगणना

बिहार में हुई सर्वदलीय बैठक में जातिवार जनगणना के प्रस्ताव को पास कर दिया गया। महाराष्ट्र विधानसभा भी जातिवार जनगणना के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर चुकी है। तमिलनाडु की सरकार भी ऐसी मांग कर चुकी है। संभव है कि अन्य राज्य सरकारें भी इस दिशा में पहल करेंगी। जब हमारे देश में जाति के आधार पर नौकरी में आरक्षण हो सकता है। मेडिकल, इंजीनियरिंग व अन्य प्रोफेशनल  कॉलेजों में जातिगत आरक्षण मिलता है। हर सरकारी-गैर सरकारी पेपर पर जाति लिखना अनिवार्य है। ऐसे में जातिवार जनगणना से क्या आपत्ति?  

सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम, एमपी


देर से ही सही

सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि हर मस्जिद में  शिवलिंग ढूंढना अच्छी बात नहीं है। दुरुस्त है कि आखिर गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या फायदा? इससे न केवल तनाव, तनातनी बढ़ेगी अपितु शांति-सौहार्द में आग लगेगी। लेकिन नसीहत विलंब से आयी। सबसे पहले दोनों वर्गों को विश्वास में लेकर भड़काऊ कृत्यों को रोकने के लिए काम कर दिखाना होगा।

 हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

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Jun 07, 2022

सख्ती जरूरी

दैनिक ट्रिब्यून के तीन जून के संपादकीय 'कश्मीर में कहर' को पढ़कर घाटी के असल हालात समझे जा सकते हैं। टारगेट किलिंग घाटी में आतंक का पर्याय बन चुकी है। आतंकवादियों का एकमात्र मकसद सिर्फ यही लगता है कि हिंदू व अन्य अल्पसंख्यक लोग वहां से पलायन कर जाएं व आतंकवादी अपने मकसद में कामयाब हो सकें। असल में, सीमा पार से पोषित आतंकवाद के मद्देनजर सरकार को फिर सर्जिकल स्ट्राइक जैसा कड़ा कदम उठाना होगा। घाटी में अल्पसंख्यकों 

को सुरक्षित माहौल की आवश्यकता है। 

-अमृतलाल मारू, धार, एमपी

 

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

कैसे बनेंगे आदर्श गांव Other

Jun 06, 2022

प्रोत्साहित करें

ननेतागण लोकप्रियता के लिए गांव को गोद लेने की घोषणा तो कर देते हैं, मगर हकीकत में सारे दावे खोखले सिद्ध होते हैं। ये जनप्रतिनिधि गांव के विकास की बात करते हैं मगर इनके द्वारा गोद लिए हुए गांव बिजली, पानी, पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं। यह योजना तभी सार्थक होगी जब माननीय समय-समय पर गांव में जाएंगे। गांव की पंचायत से लोगों की समस्याओं के बारे में जानेंगे, उनको दूर करने का प्रयास करेंगे तथा विकास के लिए बजट मुहैया करवाएंगे। साथ ही युवाओं को विकास कार्यों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेंगे। वहीं गांव का हर व्यक्ति भी विकास कार्य में सहयोग करे।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

ईमानदार पहल हो

सरकारों द्वारा लगातार ग्रांट जारी करने के उपरांत भी ग्रामीण अंचलों की दशा में परिवर्तन आता हुआ दिख नहीं रहा है। आदर्श

गांव बनाने के लिए स्वच्छ छवि वाले ईमानदार, शिक्षित एवं समाजसेवी व्यक्तियों को ही राजनीति में उतरना चाहिए। ग्राम पंचायत, ब्लाॅक विकास समिति एवं जिला परिषद के रिकाॅर्ड को ऑनलाइन किया जाना चाहिए। सरकारी ग्रांट एवं रिकॉर्ड का ऑडिट एवं निरीक्षण चरणबद्ध प्रकिया से किया जाना चाहिए ताकि हेराफेरी पर अंकुश लग सके। तभी हम आदर्श गांव की परिकल्पना का स्वप्न साकार होते हुए देख सकते हैं।

युगल किशोर शर्मा, फरीदाबाद

नि:स्वार्थ सेवा हो

केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई आदर्श गांव योजना के तहत स्थानीय सांसद को अपने चुनावी क्षेत्र में से किसी एक गांव को आदर्श गांव घोषित करने का उपक्रम शुरू हुआ था। इसमें बिजली, पानी, चिकित्सा एवं शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकसित किया जाना शामिल था। ऐसे आदर्श गांव में भी मूलभूत सुविधाओं की कमी, गंदे पानी से भरे तालाब, आपदा प्रबंधन सुविधाओं का अभाव आदि रहते हैं। अकसर ये सांसद की अनदेखी का कारण बने हैं। असल में सांसद-विधायकों की नि:स्वार्थ सेवा द्वारा ही गांव काे आदर्श रूप दिया जा सकता है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

इच्छाशक्ति की कमी

काम पूरे होने संभव हैं जैसे पंचायती राज की स्थापना, सहकारिता, कृषि और उद्योगों में स्थानीय संसाधनों का उपयोग, साफ-सफाई, गांवों को सड़कों से जोड़ना, स्कूल बनाना इत्यादि। साधारण काम को भी दृढ़ इच्छा शक्ति की कमी और दशकों की उपेक्षा ने मुश्किल बना दिया है। सरकारी योजनाओं से हटकर अगर गांवों से निकल कर कामयाब हुए लोग अपने-अपने गांवों को गोद लेकर उनका विकास करें, कंपनियों के लिए सीएसआर का कुछ हिस्सा गांवों में खर्च करना अनिवार्य हो जाये तो बड़ा बदलाव आ सकता है। निसंदेह आदर्श गांव के विचार को हकीकत में बदलना एक साझा प्रयास है।

बृजेश माथुर, गाजियाबाद

कर्तव्य समझें

किसी गांव को आदर्श बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों व सरकार के साथ-साथ गांव के लोगों को भी आदर्शों व प्रतिमानों को स्थापित करना होगा। लोगों को सामुदायिक और स्वैच्छिक सेवा की भावना को मूर्त रूप देना होगा। लैंगिक समानता, महिलाओं के लिए सम्मान, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और प्रोत्साहन के साथ ही विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन स्थापित करने की ओर ध्यान देना होगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी के साथ ही मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के पालन के बिना आदर्श गांव की कल्पना नहीं की जा सकती है।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

समुदाय की भागीदारी

सांसदों द्वारा आदर्श ग्राम योजना के तहत एक गांव गोद लेकर उसे आदर्श बनाने की दिशा में अच्छी पहल थी। लेकिन अकसर हमारे जनप्रतिनिधि गांव को गोद लेकर उसे भूल जाते हैं। इस योजना के तहत चयनित गांवों में भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। दरअसल, आदर्श गांव बनाने के लिए जनभावनाओं को समझ कर स्थानीय जरूरत के अनुसार कार्य करने की आवश्यकता है। केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं में तालमेल बिठाना व ग्रामीण जनता को स्व विकास हेतु जागरूक करना जरूरी है। कुशल नेतृत्व, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं का योगदान भी आवश्यक है।

सोहन लाल गौड़, बाहमनीवाला, कैथल

जिम्मेदारी निभायें

आदर्श गांव की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। एक ऐसा गांव, जिसमें हरियाली और खुशहाली हो। लेकिन ऐसा आदर्श गांव बनेगा कैसे? उत्तर एकदम स्पष्ट है- गांववालों की समझदारी, ईमानदारी और मेहनत से। प्रधानमंत्री रोजगार योजना तथा अन्य योजनाएं गांवों की समृद्धि के लिए हैं। इनका उपयोग निष्पक्ष भाव से होना चाहिए। इसके लिए ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा अपने स्तर पर कुछ जिम्मेदारी उठानी होगी। सामूहिक श्रमदान से गांव चमक सकते हैं। संसाधनों का समुचित उपयोग और संरक्षण होना चाहिए। आपसी द्वेष, वैमनस्य और ईर्ष्या को त्यागकर एकता के सूत्र में बंधकर आदर्श गांव की परिकल्पना में रंग भर सकते हैं।

नरेन्द्र सिंह नीहार, नयी दिल्ली

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Jun 04, 2022

कैसा विकास!

कोरोना वायरस जब दुनिया के लिए तबाही बनकर आया था, तो उस वक्त अकेले 2021 में ही 12.5 करोड़ से अधिक लोगों की नौकरियां चली गई थीं, लाखों परिवारों की बचत खत्म हो गई , इलाज करवाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा था। वर्ष 2021 में सबसे निचले तबके के लोगों की कमाई में 40 फीसदी गिरावट आ गई। लेकिन तब कुछ ऐसे लोग थे, जिन्हें इस महामारी से फायदा हो रहा था। कोविड-19 के दो साल में कई अरबपतियों ने इतनी कमाई की है, जितना उन्होंने 23 साल में भी नहीं की और ये दावा ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट में किया गया है। महामारी के कारण दुनिया के 99 फीसदी लोगों की कमाई में गिरावट आई तो वहीं उस काल के बाद, हर 30 घंटे में एक अरबपति की संख्या में वृद्धि हुई हैं। वहीं दुनिया में गरीबी की दर बढ़ती जा रही है और ये अनुमान भी है कि इस साल 26.3 करोड़ लोग आर्थिक संकट की मार झेल सकते हैं।

-निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

शिक्षा की गरिमा

दो जून के दैनिक ट्रिब्यून में अविजीत पाठक का 'अपवित्र गठबंधनों से शैक्षिक गरिमा को आंच' लेख शिक्षा जैसे पवित्र व्यवसाय को कलंकित करने वाले माफिया का भंडाफोड़ करने वाला था। पूर्व काल में शिक्षण- प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य नैतिकता का विकास करना था न कि केवल धनोपार्जन। वर्तमान में शिक्षा कोरा व्यवसाय बनकर रह गई। शिक्षा व शिक्षक का महत्व कम होता जा रहा है। कुछ विश्वविद्यालयों में खुलासा हुआ कि कुलपति तक तथाकथित तकनीकी- डॉक्टरी की डिग्रियां बेचने में संलिप्त हैं। कोचिंग संस्थान प्रोफेशनल एंट्रेंस परीक्षाओं में रैंकिंग के लिए पैकेज के नाम पर लाखों रुपए ऐंठने का काम कर रहे हैं। शिक्षा को बचाने के लिए जन आंदोलन का महत्व नितांत आवश्यक है। शिक्षा को मूल्य आधारित व रोजगारोन्मुखी बनाना जरूरी है। इसके लिए कर्तव्य निष्ठ, ईमानदार शिक्षक वर्ग को आगे आना होगा तभी शिक्षा से समाज का कल्याण संभव है।

-अनिल कौशिक, क्योड़क ,कैथल

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Jun 03, 2022

गरिमा की पुनर्स्थापना

एक जून के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का बेहतरीन लेख ‘सामाजिक बदलाव की एक सुखद पहल’ महाराष्ट्र के कोल्हापुर की तीन गांवों की पंचायतों द्वारा विधवाओं को सर्वसम्मति से बिंदी लगाने, चूड़ियां  पहनने का अधिकार देने पर एक नये युग की शुरुआत है। किसी महिला के विधवा होने पर उसे कसूरवार मानकर उसे चूड़ियां न पहनने, बिंदी न लगाने तथा मांगलिक कार्यों में भाग न लेने देने की परंपरा न केवल ग्रामीण क्षेत्रों बल्कि पढ़े-लिखे शहरी क्षेत्रों में भी देखने को मिलती है। वृंदावन तथा काशी में आज भी बहुत सारे विधवा आश्रम पाये जाते हैं। 

शामलाल कौशल, रोहतक 


सियासी मुद्दा न बनाएं 

कांग्रेसी नेता तथा पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की आधुनिक हथियारों से हत्या व उसमें विदेश में बैठे शातिर गैंगस्टर का शामिल होना दर्शाता है कि हत्या नियोजित ‍ढंग से हुई है। वस्तुत: पुलिस के निकम्मेपन, बदमाशों से सांठगांठ और जल्दबाजी में सुरक्षा हटाना आदि कारणों से हत्या आसानी से की गई। संपादकीय ‘घातक   मंसूबे’ में    भी स्पष्ट किया गया है कि  सिद्धू मूसेवाला की हत्या पंजाब में पुनः अराजकता की दस्तक की ओर इशारा है। ऐसे में इसे सियासी मुद्दा न बनाएं बल्कि इसकी वास्तविक जांच कर हत्यारों को शीघ्र गिरफ्त में लिया जाए। 

बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, तराना, उज्जैन 


होनहार लड़कियां

हाल ही में यूपीएससी के  परिणामों में लड़कियों का दबदबा रहा, प्रथम स्थान पर श्रुति शर्मा, द्वितीय पर अंकिता अग्रवाल और तृतीय पर गामिनी सिंगला रहीं। एक बार फिर देश की लड़कियों ने साबित कर दिया कि अगर इन्हें करिअर बनाने के लिए लड़कों के समान अधिकार दिए जाएं तो ये बुलंदियों को छू सकती हैं। यूपीएससी में कामयाबी हासिल करने वाली लड़कियों ने एक बार फिर उन संकीर्ण सोच वाले लोगों को आईना दिखाया जो अपनी बेटियों के प्रति संकीर्ण मानसिकता रखते हैं या बेटा-बेटी में भेदभाव करते हैं। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर 

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Jun 02, 2022

जल संरक्षण जरूरी

हालिया प्रकाशित नीति आयोग के रिपोर्ट की मानें तो साल 2030 तक 40 प्रतिशत लोग पीने के पानी की पहुंच से दूर हो जायेंगे। जल स्तर गिरने से नदियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अधिकांश राज्यों में तो शुद्ध पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। बढ़ते जल संकट के लिए ग्लोबल वॉर्मिंग, बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, वनों का अंधाधुंध कटान जैसे अनेक कारक जिम्मेदार हैं। सरकार और जनता मिलकर जल संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ायें।

शिवेन्द्र यादव, कुशीनगर, उ.प्र.

बहाली पर पुनर्विचार

वीआईपी सुरक्षा हटाने के बाद पंजाब के लोकप्रिय गायक, सिद्धू मूसेवाला की हत्या बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति ने पंजाब सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालात ने फिर से पुलिस सुरक्षा प्रदान करने पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है! निश्चित तौर पर सभी को तो सरकार के द्वारा पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती लेकिन गुप्तचर एजेंसियों के द्वारा जिनकी जान को खतरा बताया जाए उनके बारे में सरकार को सोचना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

कमाल की बेटियां

लड़कियों का यूपीएससी जैसे ‘टफ कंपटीशन’ में अग्रणी रहना सराहनीय व स्वागत योग्य है। उन लड़कियों के परिजन भी अभिनंदन योग्य हैं जिन्होंने उन को आगे बढ़ाने के लिए भरपूर सहयोग किया और वातावरण बनाया। यदि केंद्र व राज्य सरकारें लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए मुफ्त ट्यूशन और शिक्षा को प्राथमिकता दें तो लड़कियों का प्रदर्शन और भी बेहतर हो सकता है। वहीं आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत महिला रोजगार के मामले में 131 देशों की सूची में 121वें नंबर पर है। इस रिपोर्ट से जाहिर होता है कि अभी भी रोजगार के मामले में महिलाओं को दोयम दर्जे का माना जाता है

सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम, एमपी

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Jun 01, 2022

विवेक से आस्था

अठाईस मई के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का ‘विवेक से आस्था को संयमित रखना जरूरी’ लेख देश में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर बेहतरीन समाधान बताने वाला था। इतिहास की भूल सुधारने का ऐसा तरीका इस्तेमाल करना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियां हमारे इस तरीके को एक और ऐतिहासिक भूल न कहें। आशा है कि ज्ञानवापी विवाद का कोई सर्वसम्मत हल न्यायालय निकालेगा। हमें विवेक से काम लेना चाहिए! विवेक से आस्था को संयमित करना चाहिए। आदम से आदमी और आदमी से इंसान बनकर समस्याएं हल की जा सकती हैं।

शामलाल कौशल, रोहतक

वीभत्स तस्वीर

इकतीस मई के दैनिक ट्रिब्यून में ‘घातक मंसूबे’ संपादकीय पंजाब में फल-फूल रही गैंगस्टर संस्कृति का खुला पोस्टमार्टम है। गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या एक संवेदनशील मामला है, जिसकी उपेक्षा राज्य की शांति और कानून व्यवस्था को खतरे में डाल सकती है। धीरे-धीरे आतंकवाद के बढ़ते कदम कहीं राज्य को फिर लहूलुहान न कर दें इसके लिए राज्य सरकार के साथ ही केंद्र को आतंकवाद को दोबारा पनपने से रोकना होगा।

अमृतलाल मारू, दसई, धार, म.प्र.

साहसिक कदम

पंजाब सरकार के स्वास्थ्य मंत्री को मंत्रिमंडल से न केवल बर्खास्त कर दिया गया है, बल्कि जेल भेज दिया गया है। सुशासन के लिए इस प्रकार की ठोस कार्रवाई बहुत जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचारियों की कमर तोड़ने व अन्यों में खौफ पैदा करने का काम हो सके। पंजाब सरकार का छवि की चिंता किए बिना भ्रष्ट को जेल भेजना साहसिक कदम है।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

सख्त कार्रवाई हो

पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या पर उसके चाहने वाले बेहद दुखी हैं। सिद्धू मूसेवाला पर जिस तरह से गोलियां चलाई गईं उससे एक सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आधुनिक बंदूक कातिलों के पास आई कैसे। क्या पंजाब में आतंक फिर से सिर उठा रहा है। ऐसे आतंक को कुचलने की जरूरत है।

सृष्टि मौर्य, फरीदाबाद