आपकी राय

बेसहारों को आश्रय

Jul 30, 2021

पूरे देश और पंजाब में अनगिनत बेघर बेसहारा लोग चौक-चौराहों में विशेषकर ट्रैफिक रेड लाइट सिग्नल के नजदीक ज्यादा भिक्षा मांगते हैं, क्योंकि यहां भिक्षा लेनी आसान हो जाती है। देश के सुप्रीम कोर्ट द्वारा भिखारियों को कानून से रोकने की मनाही की गई है और यह भी कहा है कि यह मानवीय समस्याएं हैं और प्रदेशों की सरकारें इसका नियमानुसार समाधान करें। देश में बाल विकास कमीशन है, महिला विकास विभाग है और वृद्धों के कल्याण के लिए भी बहुत-सी योजनाएं और केंद्र हैं। क्या सरकार इन बेसहारों को सरकारी केंद्रों में आश्रय नहीं दे सकती? वैसे भी बहुत से बच्चे जो लापता हो जाते हैं उन्हें भिखारी बनाकर संगठित गिरोह भिक्षा मंगवाते हैं।

लक्ष्मीकांता चावला, अमृतसर


अनुचित व्यवहार

सोमवार से संसद का मानसून सत्र बड़ी उम्मीद के साथ शुरू हुआ था कि इस बार कृषि विधेयक पर कोई ठोस निर्णय निकलेगा। लेकिन सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने पेगासस व कृषि विधेयक कानून मुद्दा को जोर-शोर से उठाया, जिसमें सत्ताधारी दलों के जवाब आने के बजाय संसद के दोनों सदन हंगामे की भेंट चढ़ गये। संसद के दोनों सदन में जनप्रतिनिधि इसलिए बैठते हैं कि जनता की मूल समस्याओं पर बातचीत की जा सके। सांसद के माध्यम से सदन को चलाने के लिए प्रतिदिन करोड़ों रुपए की लागत आती है। ऐसे में सांसद संविधान के मूल कर्तव्यों का पालन करते हुए जनहित में निर्णय लें।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी


गैर-जिम्मेदार विपक्ष

विपक्ष की सही भूमिका सरकार की गलतियों को जनता के सामने लाना है। यही विरोधी पक्षों का मुख्य उद्देश्य भी है परंतु विपक्ष जिस ढंग से राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही को ठप करने पर तुला हुआ है यह तरीका सही नहीं है। विरोध प्रदर्शन के लिए देश के संविधान में अनेक प्रजातांत्रिक तरीके हैं। सदन में एक गरिमा का पालन करते हुए भी सरकार पर हमला बोला जा सकता है। मगर देश की संसद को ही बंद कर देना किसी भी तरीके से सही नहीं कहा जा सकता।

केरा सिंह, नरवाना

अंदरूनी उठापटक

Jul 29, 2021

24 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘दिल मिले न मिले, पर साथ चले’ पंजाब प्रदेश की अंदरूनी उठापटक की कहानी बताने वाला था। चुनावी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस के क्षत्रपों के वर्चस्व की लड़ाई की कीमत पार्टी को छह माह बाद होने वाले चुनाव में निश्चित रूप से चुकानी पड़ेगी। कैप्टन जैसे राजनेता को हाशिए पर धकेल कर कांग्रेस पंजाब में जड़ें नहीं जमा सकती। मौका देखकर कैप्टन अपना दांव जरूर खेलेंगे। हालात का गहराई से विश्लेषण करने वाले लेख के लिए साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, उत्तराखंड


कुदरत का कहर

आजकल पूरे देश में बाढ़ व भूस्खलन से कोहराम मचा हुआ है। बाढ़, भूस्खलन व मकानों के गिरने से सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों परिवार इसका दंश झेल रहे हैं। हाल ही में किन्नौर जिले के सांगला में बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसने 9 पर्यटकों की जान ले ली तथा करोड़ों रुपए की लागत से बना लोहे का पुल भी टूट गया। हमें बाढ़, भूस्खलन व बादल फटने से बचने के उपायों के बारे में सोचना होगा। वैसे भी मौसम चक्र बदल चुका है। इससे बचने के लिए हमें प्रदूषण को आधुनिक तकनीक से नियंत्रित करना होगा।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू,जोगिंदर नगर


हौसला दें

टोक्यो ओलंपिक पर हर व्यक्ति की नजर है। हमारी भूमिका हर उस खिलाड़ी का समर्थन करने की होनी चाहिए जो अपने देश की प्रतिष्ठा में योगदान दे रहा है। उनकी जीत या हार को अलग रखते हुए, हमें उन्हें अधिकतम स्तर तक प्रोत्साहित करना चाहिए और उनके लिए अप्रासंगिक टिप्पणियों का उपयोग करने से बचना चाहिए।

कमलप्रीत सिंह, लुधियाना

चुनौतियों का चिंतन

Jul 28, 2021

24 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह के ‘दिल मिले न मिले, पर साथ चले’ लेख बताता है कि आसन्न विधानसभा चुनाव तक कैप्टन अमरेंद्र सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच संगठनात्मक ढांचे को लेकर सहमति बनने में संदेह है। सिद्धू ने पहले भी अपने रवैये में परिपक्वता नहीं दिखायी, चाहे क्रिकेट हो, भाजपा से अलगाव हो या मंत्रिमंडल का मुद्दा, कैप्टन से उनकी टसल जारी रही। सच्चाई यह है कि कैप्टन हवा को देखकर ही चुप्पी साधे बैठे हैं । कॉमेडी शो में ‘ठोको-ठोको’ जैसी मसखरी में भीड़ तो वह जुटा लेते हैं पर यह टोटका चुनाव में काम आयेगा, इसमें संदेह है। लेखक ने सही लिखा है कि कैप्टन राजनीतिक-प्रशासनिक कार्यों में उदासीनता न दिखाएं। लेखक ने गहन छानबीन के बाद पंजाब की राजनीति की गांठें खोली, लेख के लिए साधुवाद!

मीरा गौतम, जीरकपुर


शहीदों का स्मरण

27 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय ‘एक विजय, कई सबक’  भारतीय क्षेत्र कारगिल पर हमला करने व हमारे जवानों द्वारा पाकिस्तान को बुरी तरह से हराना विजय दिवस की याद ताजा कराने वाला था। पाकिस्तान ने चोरी-छिपे अपने सैनिकों को भेजकर कारगिल में भारत के खिलाफ जंग छेड़ी थी। उनमें से जो सैनिक मारे गए उनकी लाशें लेने से भी पाकिस्तान ने इंकार कर दिया, जिनका बाद में भारतीय सैनिकों ने विधिपूर्वक दाह-संस्कार किया! कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय वीरों को देश शत-शत नमन करता है!

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Jul 27, 2021

सतर्क रहें

देश की कुछ राज्य सरकारें प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के स्कूल खोलने की तैयारी में हैं। लेकिन इस पर राज्य अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं आईसीएमआर रिपोर्ट के अनुसार कोविड के खिलाफ दो-तिहाई भारतीयों में एंटीबॉडी कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए बन चुकी है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या एंटीबॉडी बन जाने भर से ही हम तीसरी लहर से बच सकते हैं? वर्तमान समय में टीकाकरण कराने वाले देशों में भी संक्रमण की रफ्तार फिर से बढ़ रही है। ऐसे में राज्य सरकारों को थोड़ा दिन और आॅनलाइन कक्षा जारी रखने पर विचार करना चाहिए।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी


चीनी मंसूबे

भारत और चीन के बीच गतिरोध अभी भी जारी है। काफी समय हो गया है लेकिन गतिरोध समाप्त नहीं हो रहा है। वहीं चीनी राष्ट्रपति के तिब्बत के औचक दौरे से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और गहरा सकता है। यदि भारत स्वयं को चीनी सीमा विवादों से सुरक्षित रखना चाहता है, तो उसे तिब्बत की स्वायत्तता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति के तहत उठाने की जरूरत है।

जैसमीन कौर, चंडीगढ़

फेरबदल के निहितार्थ Other

Jul 26, 2021

उम्मीदों का बदलाव

मोदी मंत्रिमंडल में किया गया फेरबदल स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यदि कोई मंत्री अपने दायित्व का निर्वाह संतोषजनक तरीके से नहीं करता है तो उसकी छुट्टी हो सकती है। वर्तमान समय में फेरबदल अगले साल पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक समीकरण को भी महत्व दिया गया है। यह फेरबदल स्वयं में एक ऐतिहासिक कदम भी है क्योंकि इसमें महिलाओं को बड़ी संख्या में प्रतिनिधित्व दिया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस फेरबदल के बाद सरकार की कार्यशैली में बदलाव अवश्य आएगा।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

सुधार होगा

प्रधानमंत्री मोदी व्यक्ति की सूरत नहीं अपितु सीरत को अधिमान देते हैं। मोदी सरकार द्वारा उन अज्ञात लोगों को उनके बेहतर कार्य के लिए पद्मविभूषण आदि पुरस्कारों का देना इसका जीवंत उदाहरण है। दिग्गज नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाकर मोदी की राष्ट्र निर्माण एवं विकासपरक मंशा भी उजागर हो गई कि मंत्री वही रहेगा जो जनता को काम करके दिखायेगा। मंत्रिमंडल में युवा-प्रौढ़ के जोश व अनुभव रूपी नये मेल से सरकार की दशा एवं दिशा में सुधार होगा।

कम्मी ठाकुर, नारनौल

संतुलित कवायद

मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल का उद्देश्य सरकार की साख पर उठ रहे सवालों तथा आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों-विवादों के परिणामस्वरूप ही यह बड़ा फेरबदल किया है। किसान आंदोलन एवं उ.प्र. का आसन्न चुनाव, जिसमें विजयी समीकरण बनाने के लिए सभी लोगों को समान भागीदारी देने का भी एक मजबूत प्रयास है। इस फेरबदल के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की बेहद संतुलित कवायद की गयी है।

अशोक, पटना

राजनीतिक लक्ष्य

मंत्रालय में प्रत्येक मंत्री की कार्यप्रणाली और निगरानी रखना प्रधानमंत्री का दायित्व है। जब उन्हें लगा कि कोई मंत्रालय सही ढंग से अपना काम नहीं कर रहा है तो उससे संबंधित मंत्री की छुट्टी या विभाग बदलना उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। कोरोना संकट में शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मंत्रालयों ने अपने काम बेहतर ढंग से नहीं किये। देश-समाज में उनकी छवि का विघटन हुआ। यह संदेश मोदी तक भी गया। अब आने वाले समय में देश-प्रदेश में कई जगह चुनाव का बिगुल बजने वाला है। कोई भी राजनीतिक दल अपना कोई भी कदम बिना राजनीतिक घटा-जोड़ के नहीं उठाता।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुग्राम

साख बचाने के लिए

मोदी मंत्रिमंडल में परिवर्तन से स्वतः ही सिद्ध हो गया कि सरकार अपने द्वितीय कार्यकाल के विगत दो वर्ष से ज्यादा समय में अनेक विषयों पर विफल रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून और श्रम सहित अनेक मंत्रालयों से कैबिनेट मंत्रियों को हटाया जाना विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मंत्रिमंडल परिवर्तन और विस्तार में उ.प्र. और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव की आहट स्पष्ट प्रतीत होती है। मंत्रिमंडल फेरबदल कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, घटते रोजगार एवं आय और कोरोना महामारी में सरकारी कुप्रबंधन के चलते मौतों से ध्यान हटाने का एक विफल प्रयास है।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां गुरुग्राम

बदलाव के लक्ष्य

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल में किये बड़े बदलाव सरकार की छवि सुधारने की ही कवायद है। वैसे तो सफलता और असफलता के लिये सरकार ही जिम्मेदार होती है। कहना मुश्किल है कि महज मंत्रियों के बदलने से किसी जवाबदेही की नाकामी पर विराम लग जाता है। हां, इतनी उम्मीद जरूर पैदा होती है कि नये मंत्री जनता के हितों और विकास के लिये बेहतर करने का प्रयास करेंगे। वैसे तो मंत्रिमंडल में बदलाव राजनीतिक लक्ष्यों को पाने के लिये ही होते हैं। उम्मीद है बदलाव बेहतर परिणाम देंगे।

मोहम्मद आलम, चंडीगढ़

पुरस्कृत पत्र

सेवा हो दायित्व

कोरोना की दूसरी लहर में कई परिवारों ने अपनों को खोया है। ऑक्सीजन की कमी, दवाइयों की कालाबाजारी, वैक्सीन की अनुपलब्धता और दुष्प्रचार ने आग में घी का काम किया। प्रधानमंत्री को साथी मंत्री की लापरवाही ने शायद भीतर तक झकझोर दिया। भविष्य में ऐसा न हो इसकी तैयारी तो भूतकाल की गलतियों से सबक लेकर ही सुधारी जा सकती है, वही मोदी ने किया। कुछ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर कर और कुछ नये चेहरे हर वर्ग, हर प्रदेश से मंत्रिमंडल में शामिल कर यह बता दिया कि देश की सेवा के लिए सिर्फ समझदार, मेहनतकश, जवाबदेही नेताओं को ही यह दायित्व सौंपना उचित रहेगा।

भगवान दास छारिया, इंदौर, म.प्र.

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Jul 24, 2021

स्कूलों को मदद

स्कूलों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने के मकसद से अॉनलाइन पढ़ाई शुरू की है। देश में बहुत से छोटे-बड़े प्राइवेट स्कूल हैं, यह करोड़ों बच्चों की पढ़ाई का माध्यम ही नहीं, बल्कि बहुत से लोगों की रोजी-रोटी और रोजगार का भी जरिया है। कोरोना ने लोगों की कमाई को भी प्रभावित किया, इस कारण कुछ लोग अपने बच्चों की स्कूल फीस भी नहीं भर पा रहे। कुछ स्कूलों के लिए तो शिक्षकों को वेतन देने में भी दिक्कत आ रही होगी। सरकारों को चाहिए कि वे प्राइवेट स्कूलों की भी आर्थिक मदद उसी तरह करें, जिस तरह उद्योग-धंधों और गरीबों की कर रही है। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


प्रयास जरूरी

तालिबान ने कभी भी शांतिपूर्ण समझौतों में कोई रुचि नहीं दिखाई। अफगानिस्तान में एक बार फिर से तालिबान का राज शुरू होने की संभावना है, जो कि भारत के हित में नहीं है। भारत शुरू से ही अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक तथा स्थायी सरकार के पक्ष में है। जब तक तालिबान का रुख़ स्पष्ट नहीं हो जाता, भारत के लिए अच्छा होगा कि मौजूदा हालात को देखते हुए औपचारिक बातचीत बनाये रखे। भारत को कूटनीतिक तरीके से अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत है और एक बार फिर से आतंकवाद विरोधी वातावरण बनाने के लिए सभी देशों को विश्वास में लेना चाहिए। 

कनिष्क माथुर, जयपुर


देखभाल भी हो

देश में निरंतर वनों की कटाई एक जटिल समस्या है। हालांकि अलग-अलग प्रदेश में वन महोत्सव के तहत भारी संख्या में पौधे लगाए जा रहे हैं। निःसंदेह यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन पौधे लगाने से ज्यादा उनकी देखभाल की जरूरत होती है। देखभाल के अभाव में पौधे सूख जाते हैं। ऐसे में हमें पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल पर भी ध्यान देने की जरूरत है ताकि हम हरे-भरे स्वच्छ पर्यावरण की बहाली में सफल हो सकें।

श्याम मिश्रा, दिल्ली

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Jul 23, 2021

नकेल कसें

22 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में जी. पार्थसारथी का ‘चीनी साम्राज्यवाद के मुकाबले का वक्त’ लेख विषय पर चर्चा करने वाला था। आज के समय में चीन विश्व के लिए सिरदर्द बना हुआ है! कोरोनावायरस महामारी फैलाकर इसने विश्व को तबाही के मुहाने पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा वह सैनिक तथा आर्थिक शक्ति के बलबूते पर अपना साम्राज्य फैलाने की कोशिश कर रहा है! दरअसल, अमेरिका को पछाड़कर चीन सुपर पावर बनना चाहता है। चीन पर नकेल लगाने के लिए अमेरिका ने ‘क्वाड’ का आइडिया दिया है, जिससे उसे रोका जा सके। अब तो भारत समेत संसार के अन्य देश हांगकांग में स्वतंत्रता तथा तिब्बत विवाद को फिर जीवित करें तभी ड्रैगन को रोका जा सकता है।

शामलाल कौशल, रोहतक

विनाश की पटकथा

आज हम विकसित और शक्तिशाली बनने की दौड़ में अपने विनाश की पटकथा लिख ​​रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के गंभीर मुद्दे हमेशा सुर्खियों में रहे हैं, लेकिन उस पर किए गए वादे कभी काम में नहीं आए। चाहे वह कैलिफोर्निया की आग हो या चीन में बाढ़, असामयिक प्राकृतिक घटनाओं ने अपनी शक्ति दिखाई है। भारत भी जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से अछूता नहीं है। विकासशील से विकसित देश तक, प्राकृतिक आपदाओं के आने पर, न तो तकनीक और न ही मानव मन इसे प्रबंधित करने के लिए पर्याप्त सक्षम है। यह बेहतर होगा, अगर हम प्रकृति के नुकसान की भरपायी के लिए प्रयासरत रहें। 

अमन जायसवाल, दिल्ली 

सच्चाई बताएं

इस्राइली सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए विपक्षी नेताओं, अधिकारियों, पत्रकारों, जजों तथा मंत्रियों के फोन हैकिंग कर जासूसी करने पर वाद-विवाद जारी है। इसको लेकर विपक्ष ने हंगामा भी मचाया, जिससे सदन की कार्यवाही नहीं हो सकी। केंद्र सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन सरकार जासूसी करने के दावों से इनकार कर रही है। सरकार को इस मुद्दे पर निष्पक्ष जांच करवा कर सच्चाई राष्ट्र को बतानी चाहिए। 

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

सतर्क रहें Other

Jul 22, 2021

चीन लगातार हठधर्मिता पर उतरा हुआ है। चीन इस समय एलएसी के पास फिर से निर्माण में लगा हुआ है, ताकि भारतीय क्षेत्रों में उसकी पहुंच सुगम हो सके। भारत को सीमा पर और बड़ी सतर्कता की जरूरत है। पिछले 2 साल से चीन भारतीय सीमा पर लगातार हरकतें कर रहा है। इस समय उसकी कुटिल चाल फिर शुरू हो गई है। चीन इस समय अरुणाचल, लद्दाख और सिक्किम में एलएसी पर पक्की सड़कों का निर्माण कर रहा है। साथ ही इमारतें भी बनाई जा रही हैं। इससे चीन की आवाजाही विवादित क्षेत्रों तक सुगम हो जाएगी। सरकार को भी एक कदम आगे सोचकर काम करना चाहिए तथा उसको उसी की भाषा में जवाब देने की जरूरत है।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार म.प्र.

संशोधन किया जाये

नौ जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में सम्पादकीय ‘राजद्रोह की तार्किकता’ पढ़ने का अवसर मिला। निःसंदेह यह कानून अंग्रेजों द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों के दमन हेतु बनाया गया था, जिसका आज कोई औचित्य नहीं है। लेकिन जब देश में लोकतंत्र तथा विघटनकारी और अशांति फैलाने वाली शक्तियां सक्रिय हो जाएं तो उनको रोकने के लिए ऐसे कानून को समाप्त करने की बजाय उसमें संशोधन किया जाना चाहिए, जिससे देश की अखंडता संप्रभुता को कोई चुनौती न दे सके।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

अविश्वसनीय दलील

सरकार ने संसद को बताया कि ऑक्सीजन की कमी से देश में कोई ज्यादा मौतें नहीं हुई हैं। लेकिन सभी जानते हैं कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान कितनी कीमती जानें गयी हैं। सरकार ऑक्सीजन की मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं थी और लोगों को महामारी के दौरान बिस्तरों की आपूर्ति की कमी देखी गई। तीमारदार ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर भटकते रहे। सरकार का कहना कि आक्सीजन की कमी से मौतें नहीं हुई तो यह बात हजम नहीं होती।

वंशिका भसीन, पंचकूला

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Jul 21, 2021

सख्ती दिखाएं

भारत के शीर्ष चिकित्सा वैज्ञानिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोर्स ने चेताया है कि दुनिया के कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। हाल ही में दुनिया के कई देशों में संक्रमण और मौतों में वृद्धि हुई है। भारत में भी चिंता का विषय इसलिए है कि यहां पाबंदियों में छूट मिल रही है और बाजार के खुलने से सक्रियता बढ़ी है। वहीं वैक्सीनेशन की रफ्तार भी उम्मीदों के मुताबिक गति नहीं पकड़ पाई है। वक्त की मांग है कि राज्य सरकारें जांच, निगरानी, उपचार, टीकाकरण तथा कोविड-19 के अनुरूप नियमों का सख्ती से पालन करवाएं।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

सतर्कता जरूरी

वैश्विक महामारी की तीसरी लहर के आने की भविष्यवाणी विशेषज्ञ कर रहे हैं। देश में भी केंद्र और राज्य सरकारें, स्थानीय प्रशासन और चिकित्सा जगत इसके लिए तैयार हैं। हालांकि, कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए गंभीरता दिखाने के प्रति लापरवाही भी बरती जा रही है। कोरोना को हराने के लिए सरकारें कोरोना टीकाकरण अभियान भी चला रही हैं, और देश का आमजन भी इस अभियान के लिए गंभीरता दिखाते हुए वैक्सीन लगाने के लिए गंभीर है। लेकिन देश के बहुत से राज्यों में वैक्सीन की किल्लत भी हो रही है। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

बड़ा खतरा

इस समय तालिबान अफगानिस्तान में बहुत सक्रिय हो गया है और उसने देश के बड़े क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा किया है। अमेरिका और नाटो ने सेना के जवानों को वापस बुला लिया है। भारत ने भी अपने कई राजनयिकों को वापस बुला लिया है। अफगानिस्तान की सेना ने तालिबान के सामने कई जगहों पर आत्मसमर्पण कर दिया है। यह बहुत चिंता का विषय है। अगर तालिबान वहां शासन स्थापित करते हैं तो यह दुनिया के लिए विशेष रूप से भारत के लिए एक बड़ा खतरा होगा। 

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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Jul 20, 2021

आबादी के प्रश्न

जनसंख्या विस्फोट भारत की आधी समस्याओं का मूल कारण है। देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर भी की गई। इस याचिका में जनसंख्या नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश की मांग की गई। भारी जनसंख्या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का एक बहुत बड़ा कारण भी है। बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाने के लिए सबसे पहले समाज को शिक्षित होने की जरूरत है। ताकि लोग समझ सके कि वह कितने बच्चों का भरण-पोषण करने में सक्षम है। इन सबके अलावा भारत में जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को अपनाने की जगहों पर सरकार को जनसंख्या स्थिरीकरण को बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। 

रितिक सविता, दिल्ली


कारोबार के खतरे

17 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का ‘कारोबार के लिए ताक पर मानवीय संबंध’ लेख बॉलीवुड की चोरी-छिपे अनैतिक सच्चाई का खुलासा करने वाला था। डायरेक्टर युवा अभिनेत्रियों के शारीरिक-मानसिक शोषण की आड़ लेकर फिल्मी कारोबार में नाम और दाम कमाते हैं। ऐसे में फिल्में मर्यादित परंपराओं का पालन कहां, कब और कैसे कर पायेंगी।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

अमर्यादित बयानबाजी

Jul 19, 2021

नकारात्मक सोच

दुःख की बात है कि पिछले काफी अरसे से हमारे नेता बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देते हैं, जिससे बड़ा बवाल होता है और उन्हें बाद में पछताना भी पड़ता है। उसकी सफाई में कुछ और भी कहना पड़ता है। ऐसा प्रायः भावुकता, भावावेश, जोश और क्रोध में होता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव होता है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी से भी अभी ऐसी ही गलती हो गई है जो उचित नहीं। इसलिए ऐसे नेताओं को इसके लिए तुरंत खेद प्रकट करते हुए क्षमा-याचना करना ही उचित है। भविष्य में भी याद रखना चाहिए कि बंदूक से निकली गोली और मुंह से निकले शब्द कभी वापस नहीं आते।

वेद मामूरपुर, नरेला


कुंठा के बोल

किसान आंदोलन हो या कोई भी बैठक उसमें अपने हक के लिए केवल शुद्ध विचारों की लड़ाई हो न कि किसी की मान-मर्यादा को ठेस पहुंचाकर। हाल ही में गुरनाम सिंह चढूनी द्वारा मुख्यमंत्री को पाकिस्तानी कहना, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का ही नहीं बल्कि इससे पूरा पंजाबी समाज आहत हुआ है। किसी भी व्यक्ति द्वारा इस तरह के शब्दों का प्रयोग केवल लड़ाई-झगड़े को ही बढ़ावा देता है। देश हित के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। यह उनकी कुंठा को ही दर्शाता है।

सतपाल सिंह, करनाल


संयम जरूरी

भाकियू अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के लिए प्रयोग किए गए शब्द किसी भी तरह से ठीक नहीं ठहराये जा सकते। लेकिन यह भी सच है कि सरकार के कुछ अतिउत्साही नेताओं ने पिछले सात-आठ महीनों में किसानों के लिए न जाने कितने ही हल्के स्तर के शब्द प्रयोग किए हैं तब किसी ने उनका विरोध नहीं किया। मुख्यमंत्री के लिए प्रयोग किए गए शब्द किसान नेताओं के गुस्से की परिणति है। यह सही है कि आपत्तिजनक और अभद्रतापूर्ण शब्दों से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। किसी को भी व्यक्ति या समाज के प्रति गलत भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

जगदीश श्योराण, हिसार


अंकुश लगे

वर्तमान समय में जब तकनीक का युग है, जहां आज हर कार्यक्रम की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग हो रही हो तो ऐसे में नेताओं द्वारा अपने भाषण में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस वजह से राजनीति का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि मर्यादा पसंद लोग राजनीति में कदम रखने से पहले कतराने लगे हैं। अमर्यादित बयानबाजी भारतीय राजनीति को इस कदर गंदा कर रही है जिस तरह एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है। इस पर जल्द से जल्द अंकुश लगना चाहिए।

विजय महाजन, वृंदावन, मथुरा


गरिमा रहित

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष का वक्तव्य हरियाणा में लोगों में फूट डालने का काम कर सकता है। किसान आंदोलन चलाना और बात है लेकिन लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए किसी भद्र पुरुष को पाकिस्तानी या शरणार्थी कहकर उसका अपमान करना, पूरे पंजाबी समाज को कम आंकना है। ऐसे लोग जो अपने को किसान नेता कहते हैं उनके विरद्ध कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। गुरनाम सिंह का वक्तव्य आपत्तिजनक, गरिमा रहित, अभद्र तथा असंवैधानिक है। इसकी न सिर्फ हरियाणा बल्कि देश के सभ्य समाज को भ्ाी इसकी निंदा करनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक


सामंतवाद का परिचायक

धर्म आधारित देश विभाजन के समय बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान से भारत आये। इन्हें देहात में तो पंजाबी, रिफ्यूजी और पाकिस्तानी जैसे संबोधन भी मिले लेकिन दुर्भावना से प्रेरित नहीं, परिस्थितिवश। ये समाज, समुदाय शिक्षित और समृद्ध हैं तो अपने दम पर। इन जड़हीन लोगों ने हाशिये पर रहते हुए मेहनत-मजदूरी करते हुए सिर पर छत और थाली में रोटी का इंतजाम किया। इन पर कोई भी अपमानजनक टिप्पणी निंदनीय और सामंतवाद की परिचायक है। भाकियू के अध्यक्ष का मुख्यमंत्री पर इस प्रकार की टिप्पणी करना किसी भी लिहाज से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।

सूरज फौगाट, मुन्दाल, भिवानी


पुरस्कृत पत्र

मर्यादित हो विरोध

संविधान हमें अपने विचारों की अभिव्यक्ति का अधिकार देता है परन्तु यह अभिव्यक्ति मर्यादित होनी चाहिए। किसी भी निर्वाचित मुख्यमंत्री को अपमानित करने वाले नाम से सम्बोधित करना कुंठा व अभद्रता का परिचायक है। इस प्रकार की अमर्यादित बयानबाजी का एक सभ्य व सुसंस्कृत समाज में कोई औचित्य नहीं है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पुरुषार्थी एवं पूर्ण रूप से हिंदुस्तानी हैं। उन्होंने अपने कौशल व परिश्रम के बल पर अपने आप को स्थापित किया। इसके लिए वे पूर्ण सम्मान के अधिकारी हैं। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को मर्यादा का पालन करना चाहिए। इस प्रकार की अमर्यादित टिप्पणी की भरपूर भर्त्सना की जानी चाहिए।

शेर सिंह, हिसार

अपराधियों का सफाया

Jul 17, 2021

उ.प्र. में योगी सरकार ने गैंगस्टरों का सफाया करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। सरकार के सत्ता में आने के बाद उसने घोषणा की थी कि सभी गैंगस्टर और अन्य अपराधी या तो अपना अवैध पेशा छोड़ दें या राज्य छोड़ दें। इस सलाह को गैंगस्टरों को हल्के में लिया। तमाम अपराधी या तो पुलिस के हाथों मारे गए या जेल में डाल दिए गए। प्रदेश में गुंडागर्दी का ग्राफ बहुत कम हो गया है और लोग अब शांति और सद्भाव महसूस कर रहे हैं।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर


आसमानी आफत

पहाड़ी क्षेत्र में पर्यटन के साथ बरसात के दौरान मोबाइल के प्रयोग के प्रति सावधान रहना होगा। सम्पादकीय ‘आसमानी कहर’ में उल्लेख है कि बिजली गिरने से हुई मृत्यु के लिए इनसान की लापरवाही को भी कसूरवार मानना होगा वरना एक दिन में इतने अधिक व्यक्तियों की मृत्यु नहीं होती। माना कि बादलों से आकाशीय बिजली पैदा तथा गिरती है लेकिन सावधानी जरूरी है, साथ ही प्राकृतिक असंतुलन के प्रति जागरूकता अपनाना जरूरी है।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन


बेलगाम काला धन

11 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में पुष्प रंजन का ‘रहस्यमयी काला धन’ लेख भारत जैसे विकासशील राष्ट्र में काला धन संग्रही कुबेरपतियों की कारगुजारी का खुलासा करने वाला था। प्रधानमंत्री ने 8 दिसंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा कर काले धन को बाहर लाने का अनोखा तरीका अपनाया। मुद्रा विनिमय के लिये बैंकों में लगी लंबी-लंबी कतारें गहरी स्मृतियां संजोए हैं। लेकिन काला धन समाप्त करने के सभी प्रयास विफल रहे।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


नेपाल का हाल

नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता का माहौल सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद खत्म हो गया है। शेर बहादुर देउबा को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। निश्चित रूप से यह लोकतंत्र के लिए फायदेमंद होगा। इससे अस्थिरता का माहौल भी घटेगा। देउबा के भारत से अच्छे संबंध रहे हैं, ऐसे में दोनों देशों के बीच व्याप्त तनाव को कम करने का भी मौका मिलेगा।

अमृतलाल मारू 'रवि', धार म.प्र.

जन नियंत्रण हो

Jul 16, 2021

13 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘वर्चस्व तोड़ प्रतिस्पर्धा विकसित करें’ लेख सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने से रोकने के लिए सुझाव देने वाला था। कुछ समय पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के फलस्वरूप सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री को बाहर का रास्ता दिखाने के पीछे देश में सोशल मीडिया को लेकर अपनाई जाने वाली विवादित नीति हो सकती है। लेखक के अनुसार सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों को विभाजित कर देना चाहिए ताकि उनमें आपस में प्रतियोगिता हो और लोगों को सच्चाई का पता चल सके। दूसरे उनकी जवाबदेही भी होनी चाहिए। जरूरी है कि सरकार द्वारा स्वतंत्र नागरिकों की समिति बनाई जाए जो कि सोशल मीडिया के खिलाफ शिकायतें सुनने तथा निर्णय लेने में सक्षम हो।

शामलाल कौशल, रोहतक


अंधकार की आहट

अमेरिकी सेनाओं के जाने के बाद सभी बाहरी क्षेत्रीय शक्तियां अफगान मामले को अपने-अपने नजरिये से देखने का प्रयास कर रही हैं। भारत, रूस और ईरान मिलकर इस परिप्रेक्ष्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करना चाहते हैं। ये तभी हो पायेगा जब चीन और पाकिस्तान ऐसा होने देंगे। ये तालिबान को अपना सहयोगी बनाकर और उसे आगे करके दूसरे देशों में आतंकवाद और कट्टरता फैलाने की भरपूर कोशिश करेंगे। आने वाले समय में अफगानिस्तान की तकदीर दूसरे देश अपने अपने हिसाब से लिखने वाले हैं। अफगानिस्तान का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली


लापरवाह हुए हम

पांच राज्यों में कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद लोगों के मन में कोई डर नहीं है। देश में ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भागदौड़ करते मरीजों के तीमारदारों की तस्वीर सबने लाइव देखी हैं। इसके बावजूद लोग बेपरवाह हैं। विदेशों में भी डेल्टा वेरिएंट बेकाबू हो गया है। वहां लॉकडाउन लगाने की बात हो रही है। महामारी से निपटने के लिए हम सबको कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

समाधान का रास्ता

Jul 15, 2021

किसानों ने मानसून सत्र में संसद के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। संसद के बाहर प्रदर्शन करने के पीछे का कारण देश का ध्यान आकर्षित करना है। सरकार और किसानों के बीच बारह बार संवाद हो चुका है। अब फिर से कृषि मंत्री तोमर सिंह ने किसानों से संवाद करने की बात कही है। लोकतंत्र में संवाद करना ही सबसे अच्छा रास्ता होता है। प्रदर्शन हमारा संवैधानिक अधिकार है लेकिन इसका मतलब देश में अशांति फैलाना नहीं है। किसानों को अपना सख्त रवैया छोड़कर समाधान का रास्ता अपनाना चाहिए। केवल बातचीत द्वारा ही हल निकाला जा सकता है।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर


जल्द फैसला लें

कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 10वीं और 12वीं के परिणाम को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर देने की बात की गई थी। यह परिणाम घोषित कब किया जाएगा, इसको लेकर छात्रों में लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि 12वीं के बाद छात्र आगे की पढ़ाई के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन इस बार जब उनके हाथ में अपना परिणाम ही नहीं है, ऐसे में आवेदन कैसे करें? छात्रों के परिणाम के संबंध में संबंधित विभाग जल्द से जल्द निर्णय ले।

श्याम मिश्रा, दिल्ली


गंभीरता जरूरी

उत्तर भारत में अनेक जागरूक लोगों, संस्थाओं और राज्य सरकारों द्वारा प्रति वर्ष पौधरोपण बरसात के दिनों में किया जाता है, मगर इनकी उचित देखभाल के अभाव में ये नष्ट हो जाते हैं। पौधरोपण पर प्रति वर्ष सरकारें बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं जरूर करती हैं, मगर उसकी वास्तविकता किसी से छुपी नहीं है। पौधरोपण रस्म अदायगी तक सीमित रह गया है। आज ग्लोबल वार्मिंग के चलते पौधरोपण गंभीरता से करने की जरूरत है।

वेद मामूरपुर, नरेला

कवायद के निहितार्थ

Jul 14, 2021

नौ जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘मध्यावधि कवायद के राजनीतिक निहितार्थ’ मोदी सरकार में हैरान करने देने वाले मंत्रिमंडल फेरबदल की हकीकत बयां करने वाला था। पहली बात तो ये उत्तर प्रदेश के चुनाव में वोट प्रबंधन का प्रयास था, दूसरा कई नाकाम मंत्रालयों के प्रभारियों को बाहर का रास्ता भी दिखाना था। वहीं अनुभव व नई ऊर्जा में तालमेल बैठाने का भी दांव था। वहीं राजग छोड़कर गये सहयोगी अकाली दल की खाली सीट भी भरनी थी और बिहार को भी साधना था। साथ ही सरकार की छवि सुधारने की कसरत भी पूरी हो गई। महत्वपूर्ण लेख के लिये साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, उत्तराखंड


राजा और रंक भी

योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण पर उ.प्र. सरकार की नीति का ऐलान कर बताया है कि कैसे आबादी प्रदेश के विकास की राह में बाधा बन गई है। सरकार ने जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए कानूनी मसौदा तैयार किया है, जो स्वागतयोग्य है। इस मसौदे में पंचायतों व अन्य स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने वाले ऐसे उम्मीदवारों पर प्रतिबंध होगा, जो दो से अधिक संतान पैदा कर चुके हैं। चाहे लोकसभा या विधानसभा के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार हों, राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे सभी पर कानूनी प्रतिबंध होना चाहिए जो दो से अधिक संतान के पालक हैं। चाहे राजा हो या रंक, आम हो या खास सभी पर कानून की पाबंदी समान होनी चाहिए।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन


हॉकी से उम्मीद

ओलंपिक शुरू होने में अब कुछ दिन ही बचे हैं। पदकों की उम्मीद तो हम भी लगाए हुए हैं और सबसे ज्यादा उम्मीद हॉकी से है क्योंकि सालों से ओलंपिक में हमंे कोई पदक नहीं मिला है। हॉकी में टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। जिस अंदाज में भारतीय टीम खेल रही है, ओलंपिक में पदक की उम्मीद बंध रही है। अगर ऐसा ही प्रदर्शन जारी रखा तो हम पदक जरूर जीत कर लाएंगे।

साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर

आपकी राय Other

Jul 13, 2021

नियंत्रण जरूरी

12 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में छपी खबर ‘योगी ने जारी की उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति’ विश्व जनसंख्या दिवस पर इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है जो कि सही नहीं है। प्रदेश सरकार द्वारा कानून को पारित करना न तो किसी समुदाय विशेष के पक्ष में है और न ही खिलाफ है। इसमें कोई शक नहीं कि भारत की जनसंख्या भी सरकारी प्रयत्नों के बावजूद बढ़ती ही जा रही है, जिसे रोकने के लिए केंद्र सरकार को ही नहीं बल्कि राज्य सरकारों को भी नीति बनानी चाहिए। सरकार का बहुत सारा धन बढ़ती जनसंख्या को सुविधाएं देने, कानून व्यवस्था स्थापित करने तथा सब्सिडी देने में ही खर्च हो जाता है। 

शामलाल कौशल, रोहतक


ठोस हों मुद्दे

राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का भूत फिर कांग्रेस के सिर सवार हो गया है जबकि इसी मुद्दे पर पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी मुंह की खा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी मामले को सिरे से खारिज किया जा चुका है। उचित तो यह होगा कि कांग्रेस किसी ठोस मुद्दे को उठाए, जिससे उसका जनाधार बढ़े।  

अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, म.प्र.

पुरस्कार और प्रोत्साहन

Jul 12, 2021

ग्रामीण प्रतिभाएं

हरियाणा सरकार को ओलम्पिक खेलों हेतु खिलाड़ियों का चयन करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में खण्ड स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का समय-समय पर आयोजन करना चाहिए। उसके बाद ज़िले स्तर पर प्रतियोगिताओं द्वारा प्रतिभाओं को खोजकार उन्हें राज्य स्तर पर अच्छी सुविधाएं और प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अवसर प्रदान करने चाहिए, जिससे ग्रामीण पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को ओलम्पिक खेलों में भाग लेने का अवसर प्रदान हो सके। इससे हरियाणा के खिलाड़ियों का ओलम्पिक खेलों में भाग लेने का आंकड़ा और ऊंचा हो जाएगा।

जय भगवान भारद्वाज, नाहड़, रेवाड़ी


स्कूलाें से शुरुआत हो

राज्य सरकार द्वारा ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने हेतु चयनित खिलाड़ियों के लिये विभिन्न मेडल जीतने पर भारी-भरकम प्रशिक्षण राशि की घोषणा काबिलेतारीफ है। सरकार आरंभ से ही शिक्षण के साथ-साथ खेल प्रशिक्षण अनुभवी कोचों द्वारा देकर उन्हें सभी प्रकार की राज्यस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करवाए। समय-समय पर ग्रामीण स्तर पर खेलों का आयोजन कर प्रतिभाओं को खोजा जा सकता है। इससे बच्चों में खेलों के प्रति लगाव बढ़ेगा। तभी ओलंपिक प्रतियोगिताओं के समय प्रशिक्षित खिलाड़ियों की संख्या में अधिक इजाफा होगा।

अनिल कुमार कौशिक, क्योड़क, कैथल


भेदभाव न हो

हरियाणा सरकार द्वारा ओलंपिक पदक विजेताओं को भारी-भरकम पुरस्कारों की घोषणा तथा पांच लाख रुपये की राशि तैयारी के लिए देना अच्छी पहल है। हरियाणा के बहुत सारे खिलाड़ी ओलंपिक खेलों के लिए चयनित हुए हैं। मगर इनमें से ज्यादातर खिलाड़ी अपने बलबूते पर ही यहां तक पहुंचे हैं। जरूरत है कि उन प्रतिभाओं को खोज कर उन्हें उचित प्रशिक्षण सरकार की तरफ से बिना भेदभाव के दिया जाए। ‌खिलाड़ियों का चयन भी बिना भेदभाव के किया जाए। अगर ऐसा हो जाए तो उच्चस्तर के खिलाड़ी होंगे और वह ओलंपिक में कठिन परिश्रम करके मेडल लाकर देश को गौरवान्वित करेंगे।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़


हीरों जैसे तराशें

ओलम्पिक में पदक जीतना बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। जब कोई खिलाड़ी मेडल जीतता है तो वे क्षण देश के लिए बहुत ही गौरव के क्षण होते हैं। मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए अच्छी धनराशि के पुरस्कार मिलना उनका हक होता है। हरियाणा सरकार द्वारा ओलम्पिक पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलने वाले पुरस्कारों की घोषणा एक स्वागतयोग्य कदम है। देश-प्रदेश में ऐसी बहुत-सी प्रतिभाएं हैं जो पैसों के अभाव में अपना खेल जारी नहीं रख सकते। ईमानदारी से ऐसी प्रतिभाओं को खोजना होगा। उन्हें प्रोत्साहित करना होगा। इस प्रकार हीरे हाथ लग सकते हैं।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुग्राम


प्रोत्साहन जरूरी

हरियाणा सरकार द्वारा टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाले खिलाड़ियाें को करोड़ों रुपये के पुरस्कार देने वाला निर्णय खिलाडि़यों को रोमांचित करने वाला है। ग्रामीण अंचलों में कई नई-नई खेल प्रतिभाएं उभर कर आ सकती हैं, यदि उन्हें खंड, जिला स्तर पर ही आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। सरकार ग्रामीण अंचलों में पंचायत, जिला परिषद एवं ब्लाक विकास समिति के माध्यम से खेल स्टेडियम, व्यायामशाला बनाने की योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए निवेश करे, ताकि राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के प्रति खिलाड़ियों का आकर्षण बढ़े।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद


उदासीन रवैया

राज्यों में विभिन्न खेलों के खिलाडि़यों के अनमोल हीरो की कमी नहीं है। कमी है तो सरकार के सुस्त रवैये से या फिर ऐसे माहिर खिलाड़ियों को आगे लाने वाली संस्थाओं की जो उन्हें आगे आने के लिए प्रेरित नहीं करती हैं। कुछ संस्थाएं हैं जो खिलाड़ियों को खेलों के लिए अच्छी तरह तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा धन लेते हैं लेकिन गरीब खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता। अगर सरकारें सभी खेलों के खिलाड़ियों की सुविधाओं के प्रति गंभीर रहें तो देश हर खेल में नम्बर वन बन जाए। शिक्षा संस्थानों में भी खेलों के प्रति उदासीन रवैया ही देखा जाता है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


पुरस्कृत पत्र

सुविधा और प्रोत्साहन

देश में ग्रामीण स्तर पर प्रतिभाएं हर कहीं बिखरी पड़ी हैं, लेकिन विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक व राजनीतिक कारणों के चलते ऐसी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता। यदि सरकार बेहतर सुविधाएं व प्रशिक्षण इत्यादि की व्यवस्था करना सुनिश्चित करती है तो निश्चित ही खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे। आज विकसित देश खेलों के क्षेत्र में कई गुना आगे इसलिए हैं क्योंकि वहां स्कूली शिक्षा के समय से ही प्रतिभाओं को तराशने के लिए बेहतरीन सुविधाएं, प्रशिक्षण के साथ ही उन्हें प्रेरणा, प्रोत्साहन व पुरस्कार प्रदान की दिशा में कार्य किया जाता है।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

बदलाव के मायने

Jul 10, 2021

नौ जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘मध्यावधि कवायद के राजनीतिक निहितार्थ’ लेख विषय पर चर्चा करने वाला था। मंत्रिमंडल में परिवर्तन करना प्रधानमंत्री का संवैधानिक अधिकार है लेकिन जिस तरह से अपने दूसरे कार्यकाल के मध्य में यह परिवर्तन किया गया है, उसे समझने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी के छह साल तो उपलब्धियों से परिपूर्ण हैं परंतु सातवां साल निराशा से घिरा हुआ था। अपने दूसरे कार्यकाल में मंत्री परिषद में फेरबदल का प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा को लाभ होगा या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

शामलाल कौशल, रोहतक


वैक्सीन की उपलब्धि

भारत दुनिया में सबसे अधिक लोगों का टीकाकरण करने वाला देश बन गया है। ग्लोबल वैक्सीनेशन ब्रेकर के अनुसार टीकाकरण के मामले में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी आदि देशों को पछाड़ दिया है। वैक्सीनेशन की संख्या में रफ्तार की बाद भी कोरोना का प्रकोप थम नहीं रहा है। लगातार संक्रमितों की संख्या में इजाफा हो रहा है और नए-नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं। हालांकि वैक्सीन कारगर है। हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि सतर्कता और जागरूकता के साथ नियमों का पालन करें।

रितिक सविता, दिल्ली


राजनीति को दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अहम बैठक हो या फिर देश के नाम कोई संदेश हो, मोदी कुछ ऐसा करते हैं, जिस कारण पूरी दुनिया का ध्यान उन पर केंद्रित हो जाता है। नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला और बड़ा कैबिनेट फेरबदल हो गया है। इस नई टीम में कई युवा, प्रोफेशनल चेहरों को मौका मिला है। अब देखने वाली बात यह होगी कि मोदी की सेना के नये सिपाही उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं। अब पढ़े-लिखे काबिल लोग देश की राजनीति को एक नई दिशा देंगे, ऐसी उम्मीद है।

महक अरोड़ा, चंडीगढ़

पाक के लिए खतरा

Jul 09, 2021

आठ जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में जी. पार्थसारथी का लेख ‘अमेरिकी वापसी के बाद मुश्किल में पाक’ विषय पर चर्चा करने वाला था। अमेरिका के बाइडेन प्रशासन ने जल्दी ही अफगानिस्तान से अपनी सेनाएं निकालने का फैसला किया है। उसने वहां से अपनी कुछ सेनाएं ही निकाली हैं कि तालिबानियों ने खून-खराबा शुरू कर दिया है। वास्तव में तालिबानियों को पाकिस्तान ने ही पैदा किया है और अब वही अफगानिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए भी सिरदर्द बन गए हैं। जब सारी अमेरिकन सेनाएं अफगानिस्तान से चली जाएंगी तो बहुत सारे तालिबानी तथा अन्य आतंकी गुट पाकिस्तान में घुसपैठ करके वहां गृहयुद्ध की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


बदलाव की उम्मीदें

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव किया गया। केंद्र सरकार युवा मंत्रियों के साथ मिलकर काम करने की कोशिश में है और ऐसी उम्मीद भी जताई जा रही है कि नये चेहरे जोश, उमंग, उत्साह के साथ बचे हुए तीन वर्षों में कदम से कदम मिलाकर बेहतर प्रदर्शन कर दिखायेंगे। इन मंत्रियों की चर्चा होने का मुख्य कारण पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा आधी आबादी के 7 मंत्रियों को शामिल करके केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुल 11 महिला मंत्रियों की संख्या हो गई है। सरकार को भरोसा है कि नये चेहरे लाने से विकास की गति तेजी से आगे बढ़ेगी।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी


वीरभद्र का जाना

हि.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का निधन कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने रोहड़ू चुनाव क्षेत्र को छोड़कर अपने राजनीतिक करिअर में कभी भी कोई चुनाव नहीं हारा। वे प्रदेश में एकमात्र कांग्रेस नेता थे, जिन्हें अन्य पार्टियों के नेता भी बहुत सम्मान देते थे। प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में एक खालीपन आ गया है। इसे भरने में समय लगेगा।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

कुर्सी की रेस

Jul 08, 2021

तीन जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘पंजाब : सत्ता केंद्रित अवसरवादी राजनीति’ पंजाब में विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों तथा राजनेताओं द्वारा कुर्सी की रेस में आगे पहुंचने के लिए हलचल का वर्णन करने वाला था। कांग्रेस पार्टी कैप्टन अमरेंद्र सिंह तथा नवजोत सिंह सिद्धू तथा कुछ अन्य असंतुष्ट लोगों में बंटी हुई है। यही हाल आप का है। प्रदेश में नशीले पदार्थों की तस्करी, कोरोना के कहर के फलस्वरूप बेकारी, मंदी, प्रवासी मजदूरों का पलायन, महंगाई आदि समस्याएं भी हैं। हर कोई दूसरे की नाकामियों को भुनाना चाहता है।

शामलाल कौशल, रोहतक


धोखाधड़ी से बचाएं

ई-कॉमर्स के नियमन से देश के छोटे-बड़े कारोबारियों और दुकानदारों को कोई नुकसान न हो, इसका सरकार को गंभीरता से ध्यान रखना होगा। देश में सरकारें लोगों को बाजारी धोखाधड़ी से बचाने के लिए कायदे-कानून और इसके प्रति जागरूक करने के लिए कई तरह के प्रयास करती हैं। लेकिन सरकारों के यह प्रयास तब तक निरर्थक हैं जब तक लोग इसके प्रति गंभीर नहीं होते। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जो सोशल साइट्स पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर पुराना या घटिया सामान भी बेचती हैं। सरकार उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित करने के लिए कदम उठाए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


मानसून सत्र से उम्मीद

आगामी 19 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। विपक्ष के पास, सरकार को महंगाई को लेकर कठघरे में खड़ा करने का मौका है। कृषि कानून का विरोध कर रहे किसान भी इस सत्र के दौरान प्रदर्शन कर अपना विरोध जाहिर करेंगे। देखना है कि क्या मॉनसून सत्र शांति और सफलतापूर्वक पूर्ण होता है?

अमन जायसवाल, दिल्ली

सत्ता के सौदागर

Jul 07, 2021

तीन जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘पंजाब : सत्ता केंद्रित अवसरवादी राजनीति’ पूरी तरह पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। हर दल आकाश कुसुम तोड़कर जनता की झोली में डाल देने का प्रलोभन दे रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह और भाजपा से कांग्रेस में आये नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की टसल तेज है। आलाकमान की अदालत में सिद्धू की निर्बाध एंट्री और अमरेंद्र सिंह का खाली हाथ लौटा दिया जाना भी चुनावी राजनीति का एक संकेत ही माना जायेगा। किसान आन्दोलन को दिल्ली के रास्ते में डालकर कैप्टन ने केन्द्र सरकार को मुश्किल में तो डाला ही है। अब अवसरवादी राजनीति करके जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। लेखक का मानना है की किसान आन्दोलन में समस्या के हल की पहल पंजाब की तरफ से होनी चाहिए। कुल मिलाकर पंजाब की राजनीति में चुनाव से पहले सत्ता पाने की होड़ में राजनेता मशगूल हो गये हैं। आलेख का सवाल शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल से भी है कि जनता ने दस साल तक जिसे सिर-माथे बैठाया था, वह पार्टी अन्ततः जनता का विश्वास क्यों नहीं जीत पायी? त्रासदी यह भी है कि भाजपा के पास ऐसा सिख चेहरा नहीं है जो सबको स्वीकार्य हो। अतः पंजाब में अनिश्चितता की स्थिति है। गहन विश्लेषण के लिए साधुवाद!

मीरा गौतम, जीरकपुर


अंकुश लगाये सरकार

महिलाओं के प्रति यौन अपराध के बढ़ते मामलों में इंटरनेट की भूमिका अहम है। इंटरनेट पर अश्लीलता परोसी जा रही है। आधुनिक समय में इंटरनेट हर वर्ग के युवा, महिलाएं और युवतियां इस्तेमाल कर रही हैं। इंटरनेट पर परोसी जाने वाली अश्लील वेबसाइटों को बंद करना सरकार के लिए मुश्किल है, असंभव नहीं। देश में बढ़ रहे यौन शोषण के मामले सभ्य समाज के लिए खतरनाक हैं। सरकार को इंटरनेट पर परोसी जा रही अश्लीलता पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

अवसरवादी राजनीति Other

Jul 06, 2021

तीन जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘पंजाब : सत्ता केंद्रित अवसरवादी राजनीति’ हाशिये पर गये राजनेताओं की सत्ता की भूख को दर्शाने वाला था। अपनी राजनीति चमकाने के लिये टांग खींचने व प्रलोभन का यह खेल सिरे चढ़ेगा, इसमें शक है। जनता अब समझदार हो गई है। बिना जनाधार के क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू ने कई मुगालते पाल रखे हैं। कैप्टन जमीन से जुड़े राजनेता हैं, उनकी जड़ें गहरी हैं। लेखक ने इस बात का खुलासा किया है कि ये राजनीतिक तिकड़में दूरगामी परिणाम नहीं देने वाली। देश में लगातार सिकुड़ रही कांग्रेस कहीं आने वाले विधानसभा चुनाव में झटका न खा जाये। मुफ्त की राजनीति करने वाले केजरीवाल का दांव पंजाब में चल पायेगा, कहना मुश्किल है।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

ड्रोन का जवाब

पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के बाद अब ड्रोन के जरिए भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहा है। अब लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक का दायरा बालाकोट से बढ़ाकर रावलपिंडी तक करना होगा तभी पाकिस्तानी हस्तक्षेप बंद हो सकेगा।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, म.प्र.

पौधे बचाओ, अंक पाओ नीति Other

Jul 05, 2021

रचनात्मक पहल

हरियाणा सरकार ने ‘पौधे बचाओ, अंक पाओ’ की नीति प्रदेश के स्कूलों में लागू की है जो कि सराहनीय कदम है। लेकिन यह नीति कितनी कारगर साबित होगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। खैर, इससे छात्रों में प्रकृति के प्रति प्रेम तो बढ़ेगा ही पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा भी छात्रों के कंधे पर होगा। इससे प्रतिस्पर्धा के अवसर बढ़ेंगे किंतु इस नीति में छात्रों को समान अवसर मिलने चाहिए। इस तरह से प्रदेश में प्रदूषण की समस्या से निजात पाया जा सकता है। साथ ही हमारा पर्यावरण भी शुद्ध होगा।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

देखभाल पहले हो

स्कूलों में विद्यार्थियों को पौधारोपण के आधार पर अतिरिक्त अंक देने का हरियाणा सरकार का अभियान अच्छी पहल है। मगर, स्कूलों में पहले ही सीमित जगह होती है जो विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए बहुत कम है। इसके लिए स्कूल के साथ-साथ निकटवर्ती पार्क, सड़क, नदी और नालों के किनारों को सुरक्षित तरीके से प्रयोग किया जा सकता है। पौधारोपण पर प्रति वर्ष सरकारें बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं जरूर करती हैं, मगर उसकी असलियत सभी जानते हैं। इसलिए पौधारोपण से पहले उचित स्थान, इनके लगाने वालों और देखभाल करने वालों की सही व्यवस्था भी हो।

अशोक कुमार मंडवारिया, नीमच, म.प्र.

मिशन बने

हरियाणा सरकार की ‘पौधे बचाओ, अंक पाओ’ की नीति सराहनीय है। इसे सफल बनाने के लिए बच्चों, अध्यापकों व स्कूल के सभी कर्मचारियों को मिलकर प्रयास करना होगा। इसके अतिरिक्त पौधारोपण अभियान के प्रति समाज में भी जागरूकता लाने की ज़रूरत है। स्कूली बच्चों की सहायता से इस कार्यक्रम को आसानी से घर-घर तक पहंुचाया जा सकता है और बच्चों के अभिभावक भी अपना योगदान दे सकते हैं। यदि सभी संबंधित लोग मिलकर इस कार्यक्रम को एक मिशन के रूप में लें तो सरकार की यह नीति निश्िचत रूप से कारगर सिद्ध हो सकती है।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

समाज जुड़े

हरियाणा में स्कूली विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल करने के बदले अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। इससे पहले भी ऐसी कवायद की जाती रही है परन्तु परिणाम वही ढाक के तीन पात। शिक्षा विभाग ने आठवीं से लेकर स्नातक कक्षाओं तक पर्यावरण शिक्षा विषय लागू किया था और पहली से 12वीं तक नैतिक शिक्षा विषय। बाद में दोनों को ही बंद कर दिया गया। आमजन का पेड़ लगाने एवं उनकी देखभाल के लिए जागरूक होना जरूरी है। इसमें सरकार के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को भी आगे आकर ‘पेड़ बचाओ, पौधे लगाओ’ अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।

जगदीश श्योराण, हिसार

सार्थक प्रयास

वृक्षों का महत्व हम सभी भली-भांति जानते हैं फिर भी अपने घरों में लगे पुराने पेड़ों को उखाड़ कर मकान-दुकान बनाते जा रहे हैं। शहर-गांव-देहात में शामलात जगह में लगे पुराने दरख्तों की हालत भी बड़ी खस्ता होती जा रही है। सरकारें वन महोत्सव के दिन पौधे लगाने का प्रयास खूब करती हैं परन्तु पौधे-पेड़ फलते-फूलते कम ही नजर आते हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों को ‘पौधे बचाओ अंक पाओ की नीति’ से प्रोत्साहित कर पेड़-पौधों की सुरक्षा के लिए सरकार की पहल स्वागतयोग्य है।

देवी दयाल दिसोदिया, फ़रीदाबाद

व्यावहारिक हो नीति

स्कूली बच्चों को पौधों को बचाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें अतिरिक्त अंक देने की पहल निश्चित रूप से बहुत ही अच्छी पहल है। भारत के भावी नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने का यह तरीका बहुत ही सराहनीय कदम है। इसके साथ ही हमें पश्चिमी देशों का अंधानुकरण करना अब बंद कर देना ही चाहिए। विश्व पर्यावरण दिवस 21 जून को भीषण गर्मी और लू में पौधारोपण का ढोंग न करके दो-चार बारिश होने के बाद मृदु और कोमल मौसम में ही पौधारोपण करना चाहिए।

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उ.प्र.

पौधों से गुणों का विकास

हरियाणा सरकार द्वारा प्रोत्साहित ‘पौधे बचाओ, अंक पाओ’ की नीति पर्यावरण संरक्षण हेतु एक उत्तम पहल है। इससे बच्चों में पौधों के प्रति जागरूकता उत्पन्न होगी तो वहीं स्वाभाविक रूप से पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के प्रति लगाव भी उत्पन्न होगा। वे बिना किसी लालच के पौधों के विकास में रुचि लेंगे। उन्हें पेड़ों की छाया में बैठना, खेलना, फूल-पत्तियों को निहारना, इन्हें सहेज कर अपनी कॉपियों में रखना अच्छा लगेगा। योग्य अध्यापकों के कुशल मार्गदर्शन में वे पौधों को उगाएंगे और इन्हें विकसित होते देख कर हर्षित होंगे। इनकी रक्षा करने में उन्हें एक अनूठी उपलब्धि का अहसास होगा। इसके साथ अंकों में बढ़ोतरी उन्हें अनुपम सुख पहुंचाएगी।

शेर सिंह, हिसार

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Jul 03, 2021

प्रशासनिक लापरवाही

पिछले दिनों राष्ट्रपति का अपने गांव ट्रेन में जाना उनके स्वभाव की सहजता को दर्शाता है। मूल माटी से उनके प्रेम को सभी वर्गों ने सराहा। उनकी सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखना एक राष्ट्र और जनता का दायित्व है, लेकिन कानपुर में जिस तरह से उनके आगमन के दौरान घंटों ट्रैफिक रोका गया, जिससे शहर की एक महिला की जाम में फंस कर अस्पताल न पहुंचने के कारण मौत हो गई, यह दर्शाता है कि हमारा सिस्टम अभी भी औपनिवेशिक मानसिकता वाला है, जिसमें वीआईपी सुरक्षा के नाम पर किसी को कहीं भी रोका जा सकता है। अगर सिस्टम जरा भी संवेदनशील होता तो वीआईपी भी सुरक्षित रहता और मरीज भी अस्पताल पहुंचता और उसकी जान बच जाती।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़


पौधरोपण जरूरी

जून के आखिरी सप्ताह की भीषण गर्मी ने लोगों के पसीने छुड़ा दिये। दिल्ली में 76 वर्षों बाद जून का आखिरी सप्ताह सबसे गर्म रहा। इसी गर्मी के बीच बिजली कटौती चल रही है। गर्मी की वजह से बिजली की मांग बढ़ी है तो ट्रांसफार्मर जलने की घटनाओं में तेजी आ रही है। सरकार को गर्मी को कम करने और गर्मी के जोखिम से आबादी की रक्षा के लिए शमन नीतियां अपनानी होंगी। सरकार को 2007 के रेड प्लस गठन को फिर से संज्ञान में लाना होगा ताकि वनों के उन्मूलन को नियंत्रित किया जा सके और एक सुनियोजित ग्लोबल मैकेनिजम बन सके। साथ ही पौधरोपण को प्रोत्साहन देना होगा।

रितिक सविता, दिल्ली


साजिश की आशंका

धर्म परिवर्तन चिंता का विषय है। काफी लोग प्रलोभन में धर्म बदल रहे हैं। ऐसा लगता है कि इन सबके पीछे कोई गहरी साजिश रची जा रही है। धर्म परिवर्तन कराने के लिए इन्हें बरगलाया जाता है तथा लालच भी देते हैं। देखा गया है कि कुछ मामलों में इन गरीब परिवारों को बेरहमी से प्रताड़ित भी किया जा रहा है। सरकार को इस पर सख्त संज्ञान लेना चाहिए।

नरेंद्र शर्मा, भुजड़ू, जोगिन्दरनगर

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Jul 02, 2021

चिंता की बात

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी 11 सितम्बर तक पूरी हो जायेगी। केवल 650 जवान काबुल में टिके रहेंगे। अमेरिका ने पिछले 20 वर्षों में अफगानिस्तान में काफी नुकसान उठाया है। आशंका है कि अमेरिकी फ़ौज के जाते ही तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्ज़ा हो जायेगा। भारत जानता है अफगानिस्तान में पाकिस्तान का हस्तक्षेप उसके लिए सिरदर्द बन सकता है और वह तालिबान से मित्रता करके उसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन तालिबान का साफ़-साफ़ कहना है कि उसका कश्मीर समस्या से कोई लेना-देना नहीं है। वह भारत का आंतरिक मामला है। तालिबान के इस रुख से पाकिस्तान को झटका तो जरूर लगा है लेकिन  फिर भी भारत को सतर्क रहने की जरूरत है।

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली 

प्रेरक पहल

27 जून के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में मदन गुप्ता स्पाटू की ‘अंतिम इच्छा’ कहानी माता-पिता के प्रति संतान के स्वार्थी रवैये का आद्यंत चित्रण करने में सफल रही। कथा नायक मिस्टर मित्तल सफल समाजसेवी के रूप में तन-धन के प्रति निर्मोही बन, अपना अंग प्रत्यंग दिव्यांग प्रतिभाओं को समर्पित कर उनके जीवन में नव संचार करते हैं। उनकी वसीयत संतान के स्वार्थ के खिलाफ प्रेरक-अंगीकार करने योग्य प्रस्तुति रही। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

नया खतरा

पिछले दिनों जम्मू में भारतीय वायुसेना के बेस पर ड्रोन से आतंकी हमले से पता चलता है कि आतंकियों ने अपने तरीके बदले हैं। पाकिस्तान अपने अस्तित्व में आने पर से ही आतंकी गतिविधियों और इसको बढ़ावा देता आया है। ऐसे में, इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर पाकिस्तान, अपने आपको एक बार फिर बेनक़ाब कर रहा है। इस तरह के हमले के बाद से यह सुनिश्चित हो गया कि आतंकवादी आसानी से मिलने वाले ड्रोन का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

अमन जायसवाल, दिल्ली 

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आंदोलन की तार्किकता

Jul 01, 2021

आंदोलन के समर्थन में तर्क है कि किसान यह समझने लगा है कि किसान आंदोलन वस्तुतः पूंजीपति वर्ग के खिलाफ है। इन कृषि कानूनों के लागू होने से कृषि कॉरपोरेट्स घरानों के लिए विशुद्ध मुनाफे की चीज बनकर रह जाएगी। अतीत मेें किसानों ने अपने नेताओं पर आंख मूंदकर विश्वास के साथ आंदोलन चलाया था। नेताओं ने सरकार से जो भी बातचीत की व निर्णय किया, किसानों ने उसको मान लिया। आज भी किसान अपने संयुक्त किसान मोर्चा पर पूरा भरोसा करके आंदोलन चला रहे हैं। आज किसानों की समझदारी ‘कानून वापिस नहीं तो घर वापसी नहीं’ के नारे के रूप में प्रदर्शित हो रही है। नि:संदेह, दिल्ली के बॉर्डर किसान आंदोलन के प्रतीक बन चुके हैं। आज जनप्रतिनिधियों के पास किसानों के सवालों का जवाब नहीं है। वे किसानों के साथ लुकाछिपी का खेल खेल रहे हैं। सिर्फ पुलिस-प्रशासन का सहारा ही उनके पास एकमात्र विकल्प है। आंदोलन से भयभीत सरकार, आंदोलन करने के जन्मसिद्ध अधिकार को छीनने के लिए अलोकतांत्रिक हथकंडे अपना रही है, वहीं किसान आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए भी साथ-साथ लड़ रहा है। किसान आंदोलन ने उन्हें भी संबल दिया है जो सरकार की जन-विरोधी नीतियों से बेहाल हैं। इतिहास गवाह है जनता जीतती है। और जनता केवल जीतती ही नहीं बल्कि एक नए इतिहास का निर्माण भी करती है।

राजेंद्र सिंह एडवोकेट, रेवाड़ी


पुनर्विचार की जरूरत

29 जून के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों के अंतर्विरोध व चीन’ लेख मानव अधिकारों को लेकर समय-समय पर चीन की आलोचना किए जाने का जवाब देने वाला था। अमेरिका तथा अन्य देश मानवाधिकारों के हनन के लिए चीन की आलोचना करते रहते हैं जबकि सत्य यह है कि जितने प्रतिशत लोग चीन में अपनी सरकार द्वारा किए गए कामों की प्रशंसा करते हैं, उससे बहुत कम अमेरिकी, सभी प्रकार की स्वतंत्रता दिए जाने के बावजूद अपनी सरकार की प्रशंसा नहीं करते। मानव अधिकारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र को अपने मानकों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक